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मोदी को 'कप्‍तानी' देने पर भाजपा तैयार! बेनी ने कहा- मैं हूं नरेंद्र मोदी का 'बाप'

divyabhaskar network | Feb 18, 2013, 11:33 AM IST

नई दिल्ली. बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुले आम प्रधानमंत्री बनने की इच्‍छा जगजाहिर भले कर दी हो, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नरेंद्र मोदी को अभी से प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश करने में हिचक रही है। हालांकि पार्टी जल्द ही गुजरात के मुख्यमंत्री को अगले आम चुनावों के मद्देनजर प्रचार अभियान समिति का प्रमुख घोषित कर सकती है। पार्टी के इस कदम को अप्रत्यक्ष तौर पर प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी की सबसे मजबूत दावेदारी के तौर पर देखा जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक मोदी की नई 'भूमिका' को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी सहमति मिल गई है। बीजेपी को लगता है कि मोदी की छवि सकारात्मक शासन देने वाले नेता की है, जिसे पार्टी वोटरों के सामने मुख्य मुद्दे के तौर पर पेश करने की तैयारी में है। बीजेपी नरेंद्र मोदी की बढ़ती शोहरत को स्वीकार करते हुए यह मान चुकी है कि गुजरात के मुख्यमंत्री पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। मोदी की नई भूमिका पर मार्च की शुरुआत में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक में मुहर लगेगी। सूत्रों के मुताबिक मोदी को चुनाव प्रचार अभियान का प्रमुख नियुक्त करने का फैसला कई हफ्ते पुराना है और जनवरी में नितिन गडकरी की जगह राजनाथ सिंह के अध्यक्ष बनने से इसमें कोई फर्क नहीं आया।
संघ के बारे में बताया जा रहा है कि उसने बीजेपी को बता दिया है कि मोदी के नेता के तौर पर उभरने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। मोदी की हमेशा कोशिश रही है कि वे खुद को ऐसे नेता के तौर पर सामने ला सकें जो सरकार चलाने का मॉडल देता हो और जो सिर्फ कांग्रेस की खामियों की बात न करता हो। पिछले साल अगस्त में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में मोदी ने सुझाव दिया था कि कांग्रेस की खामियों की तुलना में बीजेपी को सकारात्मक एजेंडे सामने लाने चाहिए।
इस बीच, पार्टी ने अगले चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। बीजेपी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह पार्टी के भीतर ऐसे समूहों को तैयार कर रहे हैं जो राज्यों के चुनाव से पहले सकारात्मक एजेंडे को तैयार करने का काम करेंगे। अर्थव्यवस्था, खासकर औद्योगिक उत्पादन बढ़ाने, पारदर्शिता, आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को लेकर विशेष उपाय बताना पार्टी का लक्ष्य है।
सूत्रों का कहना है कि इन उपायों से साफ है कि बीजेपी सरकार को गिराने के उपायों पर काम करने की बजाय 2014 के आम चुनावों को लेकर दीर्घकालीन रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद हुई कई बैठकों में पार्टी के नेताओं को यह एहसास हुआ कि भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उन्होंने कई असरदार अभियान किए हैं, लेकिन बावजूद ये मुद्दे नकारात्मक थे। इन बैठकों में यह बात महसूस की गई कि यह बताना जरूरी है कि पार्टी तमाम मुद्दों पर क्या वैकल्पिक उपाय दे सकती है।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी की ताज़ा रणनीति के तहत ही शीर्ष नेतृत्व इस बात पर भी विचार कर रहा है कि संसद की कार्यवाही में गतिरोध पैदा करने वाली छवि से पार्टी को दूर होना चाहिए। ऐसे में इस बात के पुख्ता संकेत हैं कि अगर केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे आरएसएस और बीजेपी पर आतंकवादी शिविर चलाने से जुड़े बयान को वापस ले लें तो संसद की कार्यवाही सामान्य तरीके से चल सकती है। कुछ दिनों पहले लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने शिंदे के उस बयान को खारिज कर दिया था, जिसमें गृह मंत्री ने कहा था कि आतंक का कोई रंग नहीं होता है। स्वराज ने कहा था कि शिंदे पहले अपने पुराने बयान पर अफसोस जाहिर करें।
आगे की स्लाइड में पढ़िए, बेनी ने क्‍या कहा और मोदी को लेकर मुसलमानों की सोच में बदलाव की बात मानने लगे हैं बड़े नेता:
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Web Title: bjp ready to give captenship to modi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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