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गुजरात चुनाव में क्यों हारे ये दिग्गज, सुनिए इन्हीं की जुबानी

भद्रेश कुमार मिस्त्री | Jan 07, 2013, 00:04 IST

  • गांधीनगर। गुजरात विधानसभा 2012 के चुनाव में तीसरी बार भाजपा ने भारी बहुमत से जीत हासिल की और नरेंद्र मोदी चौथी बार गुजरात की गद्दी पर आसीन हुए। हालांकि मोदी की जीत तो पहले से ही तय मानी जा रही थी, लेकिन इस बार जो सबसे बड़ा उलटफेर हुआ, वह यह कि इस चुनाव में ऐसे कई दिग्ग्जों को हार का मुंह देखना पड़ा, जिसकी कल्पना नहीं की गई थी।


    यह हादसा भी किसी एक पार्टी के साथ नहीं हुआ, बल्कि इसकी चपेट में गुजरात की तीनों प्रमुख पार्टियां.. भाजपा, कांग्रेस और गुजरात परिवर्तन पार्टी आईं। कोई प्रजा के गुस्से का शिकार हुआ, किसी को जातिवाद का समीकरण ले डूबा तो कोई अपनी ही पार्टी की अंदरूनी राजनीति की वजह से मात खा गया।


    अब हार के बाद क्या कहना है इनका, सुनिए इन्हीं की जुबानी...

  • नाम : आरसी फलदु (प्रदेश प्रमुख)
    पार्टी : भाजपा

    हार से कुछ लुट नहीं गया है। मैं आगामी लोकसभा के चुनाव की तैयारियों में व्यस्त हो गया हूं।



    हार का कारण :


    मुझे जो सीट मिली थी, वह बिल्कुल मेरे विपरीत थी। मुझे पार्टी ने यहां से उतारा और मैंने पार्टी का आदेश माना।

  • नाम : जयनारायण व्यास (पूर्व स्वास्थ्य मंत्री)
    पार्टी : भाजपा

    हार-जीत तो लगी रहती है। मैं पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूती देने के काम में लगा हुआ हूं।


    हार का कारण :

    मैं अपनी हार का कारण देते-देते अब थक गया हूं। अब मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना, क्योंकि अब इस बात का कोई मतलब नहीं रहा।

  • नाम : फकीरभाई वाघेला (पूर्व सामाजिक अधिकारिता मंत्री)
    पार्टी : भाजपा

    मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं। पार्टी द्वारा मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे ईमानदारी से पूर्ण करुंगा।


    हार का कारण :


    वडगाम की सीट परंपरागत रूप से कांग्रेस की ही सीट है। पिछले टर्म में मैं जीता था, लेकिन इस बार अधिकतर लोग भाजपा के खिलाफ थे।

  • नाम : दिलीप संघाणी (पूर्व कृषि मंत्री)
    पार्टी : भाजपा

    आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को अधिक से अधिक सीटें मिलें, इसके लिए प्रयासरत रहूंगा।



    हार का कारण :


    कांग्रेस की तहर मेरी छवि बिगाड़ने में आंतरिक लोगों का हाथ रहा। मुझे हराने के लिए पूर्व प्लानिंग कर ली गई थी।

  • नाम : प्रफुल्ल पटेल (पूर्व गृह, राज्यमंत्री)
    पार्टी : भाजपा

    कार्यकर्ताओं के बीच रहकर समस्याओं का समाधान कर रहा हूं। पार्टी जो कहेगी, वहीं करूंगा।



    हार का कारण :


    हार के लिए कोई न कोई कारण तो होगा ही। मैं तो अपने भाग्य को ही इसका जिम्मेदार मानता हूं और हार के लिए अपने आपको ही जिम्मेदार मानता हूं। हार का ठीकरा मैं किसी अन्य के सिर नहीं फोड़ना चाहता।

  • नाम : अजरुन मोढवाडिया (पूर्व प्रदेश प्रमुख)
    पार्टी : कांग्रेस

    पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, उसका पालन करता रहूंगा। मुरी रुचि सत्ता में नहीं सेवा में है।



    हार का कारण :


    पोरबंदर क्षेत्र मसल और मनी पॉवर के लिए पहचाना जाता है। मेरे सामने नामचीन उम्मीदवार था, जिस पर करोड़ों के खनिज घोटाले का आरोप था, जबकि मेरे पास अन्य जवाबदारियां थीं।

  • नाम : शक्तिसिंह गोहिल (पूर्व विपक्ष नेता, प्रदेश प्रमुख)
    पार्टी : कांग्रेस
    पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है, मैं हमेशा पार्टी के लिए काम करता रहूंगा। कांग्रेस के जीते हुए उम्मीदवारों की मदद करूंगा।



    हार का कारण :


    विधानसभा इस बार अलग था और जातिवाद का समीकरण मेरे पक्ष में नहीं था। विरोधी उम्मीदवार ने साम-दाम और दंड-भेद की नीति अपनाई, जबकि मैं सिद्धांतों में विश्वास रखता हूं।

  • नाम : सिद्धार्थ पटेल (पाटी के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश प्रमुख)
    पार्टी : कांग्रेस

    मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं और हमेशा रहूंगा। मैं अपने पार्टी को मजबूती देने का प्रयास कर रहा हूं।


    हार का कारण :


    हार-जीत तो चलती रहती है। हां, प्रजा का विश्वास जीतने में मेरी तरफ से कोई कसर रह गई होगी। प्रजा का निर्णय मुझे स्वीकार्य है।

  • नाम : गोरधन झडफिया (महामंत्री)
    पार्टी : गुजरात परिवर्तन पार्टी

    मैं अपनी हार से बिल्कुल भी चिंतित नहीं हूं। पार्टी को मजबूत करने के लिए प्रयासरत रहूंगा।



    हार का कारण :


    गोंडल की प्रजा का मुझे पूरा सहयोग मिला। शायद चुनाव की तैयारी के लिए समय कम मिला और इस पर नई सीट भी थी, लोगों से अच्छे तरीके से संपर्क नहीं हो पाया।

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Web Title: know why these powerful ministers lost the election
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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