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16 साल की उम्र, और बदले की आग में खून से रंग दी थी युद्धभूमि

bhasker news | Dec 10, 2012, 00:03 IST

  • भारत की धरती आरंभ से ही वीरों से भरी रही है। यहां पर आदि काल से ही राज्य तथा राजाओं की व्यवस्था चली आ रही है। इसी के फलस्वरूप उनके मध्य अपने साम्राज्य का विस्तार करने के लिए युद्ध होते रहते थे।
    इसी के चलते कई वीरों ने युद्ध क्षेत्र में अपना कौशल सिद्ध किया है। इन्हीं वीरों में से एक राजा हर्षवर्धन भी हैं। इन्हें हर्ष, हर्षवर्धन या हर्षा वर्धन भी कहा जाता था।
    आगे की तस्वीरों में जानिए हर्षवर्धन ने कैसे जीता था 16 साल में युद्ध...
    उपरोक्त चित्र का प्रयोग युद्ध भूमि दिखाने के लिए किया गया है।
  • इनका जन्म 590 ईसा पूर्व में हुआ था। इस भारतीय शासक ने 606 से लेकर 647 तक उत्तरी भारत पर शासन किया था। इनके पिता का नाम प्रभाकरवर्धन था तथा इनके बड़े भाई का नाम राज्यवर्धन था। इनकी राजधानी हरियाणा के थानेसर में थी।

  • इनकी शक्ति के दम पर इनका राज्य पंजाब, राजस्थान, गुजरात, बंगाल तथा उड़ीसा के साथ-साथ नर्मदा नदी के सभी राज्यों में फैला था। छठवीं के शाताब्दी के मध्य में गुप्त साम्राज्य के पतन के पश्चात उत्तरी भारत कई स्वतंत्र राज्यों में विभक्त हो गया था। इस समय हूणों ने पंजाब पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लिय था।

  • भारत के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र को एक दर्जन से अधिक सामंती राज्यों के हाथों में सौंप दिया गया था। 605 में प्रभाकरवर्धन की मृत्यु के पश्चात उनके बड़े बेटे राज्यवर्धन को सिंहासन प्राप्त हुआ। हर्षवर्धन राज्यवर्धन के छोटे भाई थे। राज्य और हर्ष की बहन राज्यश्री का विवाह मौखरी के राजा ग्राहवर्मन के साथ हुआ था।

  • ये राजा कुछ वर्षों के पश्चात मालवा के राजा देवगुप्त के हाथों युद्ध में पराजित हुआ था तथा मार डाला गया था। ग्राहवर्मन की मृत्यु के पश्चात राज्यश्री को विजेता राजा द्वारा जेल में बेद कर दिया गया था।

    इसी दौरान राज्यवर्धन के एक दोस्त के रूप में पूर्वी बंगाल में गौड़ के एक राजा शशांक ने मगध में प्रवेश किया। लेकिन उसका मालवा के राजा के साथ एक गुप्त गठबंधन था।

  • उसी के अनुसार शशांक ने विश्वासघात करके राज्यवर्धन हत्या कर दी। अपने भाई की हत्या के बारे में सुनकर हर्षवर्धन ने शशांक पर आक्रमण कर दिया और उसे मार डाला। उस समय हर्ष की आयु 16 वर्ष थी और इसके बाद वे सिंहासन पर विराजमान हुए।

  • हर्षवर्धन ने शक्ति तथा राज्य के विस्तार की महात्वकांक्षा के चलते डेक्कन तथा दक्षिण भारत तक अपने राज्य का विस्तार किया लेकिन उसे उत्तर भारत के चालुक्य सम्राट पुलकेषी-2 ने रोक दिया। चालुक्य के राजा ने उत्तरी कर्नाटक के नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की सेना को 620 में हरा दिया था।

  • नर्मदा नदी को हर्ष के राज्य की दक्षिणी सीमा के रूप में चिह्नित किया गया था। हर्ष के पिता प्रभाकर थानेश्वर क्षेत्र से थे। उनके भाई ने बाद में हिनायान बौद्ध धर्म अपना लिया था। एक बौद्ध के अनुसार स्वयं हर्ष भी बाद में महायान बौद्ध बन गए थे। हर्ष एक धर्म सहिष्णु शासक थे और भारत में प्रसारित सभी धर्मों का सम्मान करते थे।

  • अपने जीवन के आरंभ के वर्षों में वह सूर्य पूजा करते थे और बाद में शैव और बौद्ध धर्म के संरक्षक बने। 647 में हर्षवर्धन की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने 41 वर्षों तक शासन किया था।

    हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात उनकी स्मृति में बनवाया गया स्मारक

  • हर्ष की मृत्यु के बाद उनका साम्राज्य भी समाप्त हो गया था। उनका राज्य छोटे-छोटे राज्यों में तेजी से विघटित होता चला गया। उत्थान का काल बहुत ही अच्छा था लेकिन यह बहुत ही बुरी तरह से बिखर गया था।

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Web Title: age was 16 and colored the battle field by blood to take revenge
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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