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गोपाल कांडा, अरुणा पर एक और एफआईआर, जानिए क्या था अनुराधा के सुसाइड नोट में

bhaskar news | Feb 17, 2013, 02:27 AM IST

घुट-घुट कर जीने से अच्छा है मर जाऊं
अकेलेपन और दहशत के बीच जिंदगी से जूझ रहीं अनुराधा न तो बेटी की मौत को भूल पा रही थीं और न ही इंसाफ की उम्मीद थी। उस पर गोपाल कांडा की पहुंच ने बाकी बची हिम्मत को तोड़ कर रख दिया था।

मीडिया में आई खबर ने भले ही आरोपी गोपाल कांडा को जेल पहुंचा दिया लेकिन न्याय प्रक्रिया की सुस्त चाल से वह हार गईं और मौत को गले लगाने से पहले इतना कहा कि घुट-घुट कर मरने से अच्छा है कि आज ही मर जाऊं..।

दो पन्नों के सुसाइड नोट में अनुराधा ने लिखा है कि सारा दिन वह घर पर अकेली बैठ कर बेटी की यादों में ही खोई रहती थीं। 24 घंटे बेटी की तस्वीर उनकी आंखों के सामने घूमती रहती थी।

उन्हें धीमी न्यायिक प्रक्रिया के चलते एक तरफ बेटी को अब तक इंसाफ न दिला पाने का मलाल था तो दूसरी ओर गोपाल कांडा जैसे प्रभावशाली व्यक्ति की पहुंच के चलते अब उन्होंने इंसाफ की आस खो दी।

सुसाइड नोट में अनुराधा ने लिखा कि कल भी मरना है और आज भी। वह बेटी की याद में तिल-तिल कर मर रही हैं। बेहतर है कि वे आज ही मौत को गाले लगा लें।

मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि बेटे के नाम लिखे सुसाइड नोट में अनुराधा ने उनकी मौत के बाद बेटे को मजबूती से परिस्थितियों का सामना करने की सलाह दी है।

उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि उनकी मौत के बाद परिवार वाले मीडिया से बात न करें और पोस्टमार्टम कराने के बाद उनके शव को घर लाए बगैर सीधे अंतिम संस्कार कर दिया जाए।

आगे की तस्वीरों के जरिए जानिए कांडा से जुड़ी 10 ऐसी सीक्रेट बातें जिनके चलते और भी ज्यादा उलझ गया था कांडा का केस।
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Web Title: Anuradha Sharma, Gopal Kanda suicide case, on Aruna and FIR
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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