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गोपाल कांडा, अरुणा पर एक और एफआईआर, जानिए क्या था अनुराधा के सुसाइड नोट में

bhaskar news | Feb 17, 2013, 02:27 AM IST

गीतिका को एमाइरेट्स से निकालने के लिए कांडा ने की थी शिवरूप की नियुक्ति
गोपाल गोयल कांडा की एमडीएलआर कंपनी में वर्ष 2010 में शिवरूप को बतौर असिस्टेंट मैनेजर रखा गया था। शिवरूप की नियुक्ति का मकसद कंपनी की उन्नति व तरक्की से जुड़ा न होकर कांडा के नापाक इरादों को साकार करना था। रोहिणी अदालत में दाखिल चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने यही दावा किया था।
शिवरूप अब दिल्ली पुलिस का गवाह बन चुका है। चार्जशीट के मुताबिक कंपनी में नियुक्ति होने के तुरंत बाद शिवरूप को अरुणा और कांडा ने दुबई भेज दिया था। इससे पहले गीतिका गोपाल कांडा द्वारा समाज में उसकी इज्जत को तार-तार करने से परेशान होकर उसकी कंपनी छोड़कर दुबई स्थित एमाइरेट्स कंपनी ज्वाइन कर चुकी थी।
कांडा और अरुणा खुद भी दुबई जाकर गीतिका को वापस कंपनी ज्वॉइन करने के लिए मनाने की कोशिश कर चुके थे। जब वह नहीं मानी तो उन्होंने शिवरूप को हथियार की तरह इस्तेमाल किया। शिवरूप को दुबई भेजने का मकसद उस अनापत्ति पत्र की जांच करना था, जिसे एमडीएलआर कंपनी ने गीतिका के नाम जारी किया था।
शिवरूप एमडीएलआर कंपनी का जांच अधिकारी बनकर दुबई स्थित एमडीएलआर कंपनी के दफ्तर गया। वहां पहुंचकर उसने एमाइरेट्स कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से संपर्क किया और एमडीएलआर कंपनी द्वारा गीतिका को दिए गए एनओसी की जांच की बात कही।
हालांकि, शुरुआत में इससे गोपाल कांडा और अरुणा को कुछ खास फायदा नहीं हुआ। जब इससे कोई बात नहीं बनी तो कांडा ने शिवरूप को एक ई-मेल भेजा। इस ई-मेल में गुडगांव के सिविल लाइन थाने में एमडीएलआर द्वारा दर्ज कराई गई फर्जी शिकायत की कॉपी थी।
अगली तस्वीर: अंकिता से थी कांडा को एक बच्ची
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Web Title: Anuradha Sharma, Gopal Kanda suicide case, on Aruna and FIR
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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