Home »Haryana »Ambala » Satyagraha Forced Debt Forgiveness

बापू की राह: ‘खादी ग्राम उद्योग’ भी सत्याग्रह के लिए मजबूर

भास्कर न्यूज | Dec 05, 2012, 04:22 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
बापू की राह: ‘खादी ग्राम उद्योग’ भी सत्याग्रह के लिए मजबूर
अम्बाला .न कोई नारेबाजी, न हाय-हाय। न सरकार की आलोचना और न कोई आरोप। दो घंटे तक चरखे की तान पर सूत कताई और रघुपति राघव राजा राम..भजन गाकर प्रार्थना।
बुजुर्गो ने शायद देखा होगा और नई पीढ़ी ने किताबों में पढ़ा होगा। बापू का यह तरीका आज खादी व ग्राम उद्योग के कर्मचारी और इससे जुड़े लोग अपनाने को मजबूर हैं। खादी रक्षा उनका अभियान है।सोमवार से अम्बाला कैंट में खादी व ग्रामोद्योग आयोग के कार्यालय के सामने ये सत्याग्रह शुरू हुआ है। यह सभी खादी संस्थाओं की ऋण मुक्ति की तीन साल पुरानी घोषणा पर अमल चाहते हैं।
पूरे हरियाणा में 18 से 20 हजार लोग या तो खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारी हैं या फिर बुनकर व कतिन के तौर पर इससे जुड़े हैं। संयोजक बाली राम कहते हैं कि पूरे देश में सात दिसंबर तक यह सत्याग्रह चलेगा। खादी रक्षा अभियान पिछले तीन साल से चल रहा है। आयोग और सरकार ने आश्वासनों के अलावा कोई मदद नहीं की है। समस्याओं के समाधान के लिए अब 31 दिसंबर तक की मोहलत दी गई है।
ऋण मुक्ति की सिर्फ घोषणा हुई
खादी मिशन की मांग पर केंद्र सरकार ने पूर्व मंत्री ने खादी संस्थाओं के 2,400 करोड़ की ऋण मुक्ति की घोषणा की थी। आज तक क्रियान्वयन नहीं हुआ। मदन छोकर, रघुवीर, धर्मवीर शर्मा, सुरेश राणा कहते हैं कि औद्योगिक घरानों को तो सरकार विशेष आर्थिक पैकेज देती है। 1999 से 2004 के दौरान 47 हजार करोड़ की कर्ज माफी दी।
2005 से 2011 के बीच टैक्स के चार लाख करोड़ रुपए की छूट दी। जबकि खादी ग्रामोद्योग के लिए सिर्फ ऋण मुक्ति की घोषणा हुई। खादी मिशन की सरकार से मांग है कि खादी संस्थाओं को ऋण भार से मुक्त किया जाए। सहयोगी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए आयोग को निर्देश दिए जाएं।
सात दिसंबर तक अलग-अलग जिलों में सत्याग्रह
चरखा कताई सत्याग्रह का यह क्रम सात दिसंबर तक चलेगा। रोजाना अलग अलग जिलों से खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारी व इससे जुड़े लोग इस सत्याग्रह में शामिल होंगे। पहले दिन सोमवार को अम्बाला की बारी थी। मंगलवार को कुरुक्षेत्र और करनाल, 5 दिसंबर को रोहतक और हिसार, 6 दिसंबर को भिवानी, गुड़गांव और फरीदाबाद और 7 दिसंबर को पानीपत के कर्मी अम्बाला में सत्याग्रह करेंगे।
हर तरह से परेशान खादी से जुड़े संस्थान
संस्थाओं का वर्ष 2010-11 व 2011-12 का एमडीए का पूर्ण भुगतान नहीं हुआ जबकि प्रति तिमाही भुगतान होना चाहिए। इसी तरह ब्याज सब्सिडी क्लेम का भुगतान देरी से होने के कारण बैंक द्वारा ब्याज पर ब्याज और पैनल ब्याज लगाया जाता है।
खादी संस्थाएं कच्चा माल ख्ररीदने के लिए भी स्वतंत्र नहीं हैं। आयोग समय पर कच्चा माल नहीं देता। पारंपरिक कतिनों की मजदूरी काफी कम है। इससे उनका गुजारा मुश्किल है। खादी संस्थाओं की बेशकीमती भूमियां अनुपयोगी पड़ी हैं। सरकार खुद पूंजी विनिवेश की बात कहती है और अतिरिक्त भूमि को बेच रही है। वहीं खादी संस्थाओं की भूमि बिक्री पर प्रतिबंध ही नहीं लगाया बल्कि लोन चुकता करने के बावजूद उस भूमि पर अपना अधिकार जमाए रखना चाहती है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
DBPL T20
Web Title: Satyagraha forced debt forgiveness
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।
 

Stories You May be Interested in

      More From Ambala

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top