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जिले के 10 नेताओं ने उतारी लालबत्ती, अफसर अभी आदेश के इंतजार में

Bhaskar News | Apr 21, 2017, 08:14 IST

  • फरीदाबाद.वीआईपी कल्चर समाप्त करने के लिए लालबत्ती हटाने को लेकर कैबिनेट के निर्णय के तुरंत बाद फरीदाबाद के नेताओं ने इस पर अमल भी कर दिया। जिले में 13 नेताओं व चेयरमैन को लालबत्ती मिली हुई है। इनमें से 10 ने अपनी गाड़ी से इसे हटा दिया है। कुछ नेताओं ने तो बुधवार रात को ही लालबत्ती हटा दी थी। बाकी बचे हुए नेता भी 1 मई तक लाल बत्ती हटाने का दावा कर रहे हैं।
    प्रदेश सरकार की तरफ से इस बारे में कोई आदेश न आने के कारण अफसरों ने लालबत्ती नहीं हटाई है। कुछ एक नेता भी सरकार के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। लालबत्ती का शौक रखने वाले नेताओं को कैबिनेट ने तगड़ा झटका दिया है।

    सरकार का आदेश मानेंगे

    तिगांव विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक ललित नागर का कहना है कि वह सरकार का आदेश मानेंगे। हरियाणा सरकार ने ही लाल बत्ती दी है। अगर वह चाहेगी कि यह उतरनी चाहिए तो वह तुरंत इसे हटा देंगे।

    मैंने तो लगाई ही नहीं : दीप भाटिया
    खेल परिषद के उपाध्यक्ष दीप भाटिया के अनुसार उन्हें इस पद पर आसीन होते ही लाल बत्ती मिल गई थी। इसे एक दिन भी नहीं लगाया। समाज में रुतबा जमाने के लिए लालबत्ती की जरूरत नहीं है। उनके पिता सेशन जज थे। इसके बाद भी उन्होंने कभी लाल बत्ती नहीं लगाई थी।
    लालबत्ती मिलते ही उतारने की तैयारी
    नगर निगम के वार्ड नंबर-33 के पार्षद धनेश अदलक्खा को 18 अप्रैल को हरियाणा राज्य सहकारी कृषि व ग्रामीण विकास बैंक लिमिटेड का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इससे अगले दिन ही कैबिनेट ने इसे हटाने का फैसला ले लिया। ऐसे में लालबत्ती में घूमने का शौक अभी पूरा भी नहीं हो पाया कि इसे हटाने की मजबूरी भी पैदा हो गई। अदलक्खा का कहना है, उनके पास सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले में भी एक मई से यह नियम लागू होना बताया गया है। इसलिए एक मई तक वे लालबत्ती हटा देंगे।
    पायलट व गनमैन की क्या जरूरत है
    अब नेताओं को मिलने वाले पायलट व गनमैन को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इस पर सवाल खड़ा किया है खेल परिषद के उपाध्यक्ष दीप भाटिया ने। भाटिया के अनुसार नेता भी आमजन की तरह ही होता है। नेता बनने से पहले वह आमजन के बीच ही रहता है, खाता है और घूमता है। अचानक ऐसी सुरक्षा की क्या जरूरत पड़ जाती है कि उसे गनमैन भी चाहिए। नेताओं की गाड़ी के आगे पुलिस की तरफ से पायलट दी जाती है। ये भी संसाधनों का दुरूपयोग है। यह कल्चर बंद होना चाहिए। नेता को आम आदमी की तरह जीवन जीना चाहिए।
    लाल बत्ती का महत्व
    -समाज में रुतबा समझा जाता है।
    -सड़क पर चलते समय पुलिस अलर्ट हो जाती है और जाम में स्पेशल रास्ता मिल जाता है।
    -टोल टैक्स पर दूर से ही पता लग जाता है कि वीआईपी आ रहा है, इसलिए बैरियर हटा दिया जाता है।
    -परिवार के सदस्य भी लालबत्ती की गाड़ी में घूमते हैं, यहां तक कि कई बार बच्चों को स्कूल भी इसी गाड़ी में छोड़ा जाता है।
    अब क्या होगा
    -लाल बत्ती हटने के बाद अब नेताओं को जाम में फंसे रहना पड़ सकता है।
    -टोल टैक्स पर गाड़ी रोकी जाएगी, परिचय देने के बाद ही इसे जाने दिया जाएगा।
    -सड़क मार्ग से आने व जाने में अब अधिक समय लगेगा, चौराहे पर बैठे पुलिसकर्मियांे को नहीं पता होगा कि कोई वीआईपी आ रहा है।
    {लाल बत्ती के शौकीन के अरमानों पर पानी फिर जाएगा।
    इन्होंने हटाई लाल बत्ती
    -भारत सरकार के केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर
    -प्रदेश के उद्योगमंत्री विपुल गोयल
    -प्रदेश की मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा
    -बल्लभगढ़ के विधायक मूलचंद शर्मा
    -एनआईटी के विधायक नगेंद्र भड़ाना
    -पृथला के विधायक टेकचंद शर्मा
    -नगर निगम की मेयर सुमन बाला
    -लेबर फेड के चेयरमैन सुरेंद्र तेवतिया
    -बंजर भूमि विकास निगम के चेयरमैन अजय गौड़
    -जिला परिषद के चेयरमैन विनोद चौधरी।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: 10 leaders of district released red light
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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