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500 रुपए उधारी लेकर कमरे में शुरु की मशरूम की खेती, अब है लाखों में कमाई

Bhaskar news | Mar 21, 2017, 08:19 IST

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500 रुपए उधारी लेकर कमरे में शुरु की मशरूम की खेती, अब है लाखों में कमाई
फरीदाबाद .पांडवकालीन ऐतिहासिक गांव तिलपत की सुशीला प्रेरणा दायर है। सुशीला ने वर्ष 2007 में 500 रुपए उधारी लेकर एक छोटे से कमरे में मशरूम की खेती शुरू की थी। छह महीने के परिश्रम और अनुभव के बूते अब यह महिला किसान सालाना तीन से चार लाख रुपए कमा लेती है।
खुद स्वावलंबी बन सुशीला ने दूसरी महिलाओं को भी मशरूम की खेती से जोड़ा है। कुछ महीनों में ही 20 महिलाओं को इस खेती से जोड़कर स्वयं सहायता समूह बनाकर खड़ा कर दिया। अब यह गांव मशरूम की खेती के लिए आसपास के इलाके में प्रसिद्ध है। सुशीला तीन दिवसीय कृषि नेतृत्व शिखर सम्मेलन में लोगों को अपनी सफल कहानी के साथ-साथ उन्हें मशरूम की खेती की बारीकियों से अवगत करा रही हैं।
कैसे करें बिजाई
एक क्विंटल गोबर खाद और भूस के मिश्रण को एक बंद कमरे में रखा जाता है। इसमें कुछ मात्रा में पानी छोड़ा जाता है। इसके बाद जिप्सम, पोटाश, चने का छौक्कर, यूरिया का मिश्रण कंपोस्ट में मिलाकर सड़ने दिया जाता है। कमरे में उमस हो और उसका तापमान 35 डिग्री सेल्सियस पहुंचने के बाद एक क्विंटल कंपोस्ट में 600 ग्राम बीज मिलाया जाता है। इसका चार इंच मोटा बेड तैयार किया जाता है। सरकारी एजेंसी पर यह बीज प्रति छह सौ ग्राम 75 रुपए में मिलता है जबकि प्राइवेट बीज विक्रेता के पास यह 90 रुपए में उपलब्ध है। बेड तैयार करने के बाद उसे पॉलीथिन से ढक दिया जाता है। करीब 12 दिन बाद पॉलीथिन को हटाकर उस पर एक इंच मोटी वर्मी कंपोस्ट की परत चढ़ाई जाती है। हफ्ते बाद मशरूम की पिन दिखाई देने लगती है। सर्दियों में 30 दिन में मशरूम तैयार हो जाती है जबकि गर्मिर्यों में यह 18-20 दिन में तैयार होती है।
भूपानी कृषि विज्ञान केंद्र से लिया था प्रशिक्षण
सुशीला ने मशरूम की खेती के लिए भूपानी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर पहले प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण लेने के उपरांत उसने 8 बाई 10 फीट के एक कमरे में मशरूम का बीज केंचुआ खाद में डालकर उसे तैयार किया। पहली बार केवल 10 किलो मशरूम का ही उत्पादन कर पाई थी। मौजूदा समय में सीजन के दौरान प्रत्येक महीने में 10 क्विंटल मशरूम की खेती कर लेती है। मशरूम के लिए उसने 12 बाई 15 फीट के सात कमरे बना रखे हैं, जिसमें इसका उत्पादन होता है।
कीटनाशक का करें प्रयोग : मशरूम की बिजाई के बाद जब बेड पर वर्मी कंपोस्ट की एक इंच मोटी परत चढ़ाई जाती है, तभी कोई भी 500 ग्राम कीटनाशक दवा 300 लीटर पानी में मिलाकर उसका छिड़काव किया जाता है। जब मशरूमपन की तरह दिखाई देता है, एक बार तब दवा का स्प्रे किया जाता है।

नारियल मशरूम भी होता है तैयार :नारियल मशरूम के लिए उपरोक्त प्रक्रिया के तहत ही बिजाई होती है लेकिन जिस वक्त बेड तैयार किया जाता है और उस पर 12 दिन पश्चात वर्मी कंपोस्ट की परत चढ़ाई जाती है, उसी वक्त वर्मी कंपोस्ट की परत न चढ़ाकर उस पर नारियल बुरादे की परत चढ़ाई जाती है। इसके बाद मशरूम का रंग स्वत: नारियल जैसा हो जाता है।
ग्रामीण बैंक से मिलता है ऋण : स्वयं सहायता समूह को सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की तरफ से ऋण भी दिया जाता है। यह ऋण सब्सिडी पर आधारित होता है और बहुत कम ब्याज दर होती है। ऐसे में यदि किसान चाहे तो स्वयं सहायता समूह बनाकर मशरूम की खेती के लिए आर्थिक प्रबंधन भी कर सकते हैं।
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Web Title: success story of sushila
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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