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युवाओं ने अपना रखी है ऐसी लाइफस्टाइल, अभी से हो रही है ये बूढ़ों वाली बीमारी

अनीता भाटी | Feb 18, 2013, 02:21 IST

  • युवाओं ने अपना रखी है ऐसी लाइफस्टाइल, अभी से हो रही है ये बूढ़ों वाली बीमारी

    फरीदाबाद.बदलती लाइफ स्टाइल के प्रेशर में शरीर के ज्वाइंट जवाब दे रहे हैं। कभी बुजुर्गों की बीमारी माने जाने वाले जोड़ों के दर्द से अब युवा पीढ़ी भी परेशान है।

    सरकारी व निजी अस्पतालों में ज्वाइंट दर्द से परेशान युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। रोज करीब 100-150 लोग फिजियोथैरेपी के सहारे दर्द कम करने के लिए आ रहे हैं। एक साल में इनकी संख्या 15 से 20 हजार तक पहुंच जाती है।

    आगे की तस्वीरों पर क्लिक करके देखिए क्या हैं इस बीमारी के कारण और क्या है बचाव...

  • युवाओं ने अपना रखी है ऐसी लाइफस्टाइल, अभी से हो रही है ये बूढ़ों वाली बीमारी

    क्यों जवाब दे रहे हैं जोड़: बीके अस्पताल में रेडक्रॉस द्वारा संचालित फिजियोथैरेपी यूनिट के डॉ. राकेश कहते हैं कि बदलती लाइफ स्टाइल ने काफी इफेक्ट किया है। खाने में पौष्टिक आहार का दूर होना। बाहर जंक फूड अधिक खाना। सीटिंग जॉब अधिक होना।

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    विशेषज्ञों के अनुसार जब से कंप्यूटर का दौर शुरू हुआ तब से यह दिक्कत ज्यादा बढ़ी है। बैठने की जॉब अधिक हो गई। घंटों बैठकर वाहन चलाना। घंटों हेलमेट का प्रयोग। घर के कार्य में भी भागीदारी कम हो गई।

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    ऐसे में शारीरिक क्रियाएं कम हो गई है। एक्सरसाइज व योगा से दूर होने की वजह से जोड़ों में दर्द की शिकायत बढ़ी है। खासतौर पर युवाओं में। कॉरपोरेट ऑफिस में काम करने वाले अधिक युवा ज्वाइंट पेन से पीडि़त हैं।

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    युवाओं पर शिकंजा:बीके, ईएसआई व निजी सेंटरों में फिजियोथैरेपी के लिए आने वालों में युवाओं की संख्या अधिक है। इनमें 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग इस समस्या से अधिक पीडि़त है।

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    बीके में रोज इससे 60-70 लोग फिजियोथैरेपी कराने आ रहे हैं। निजी अस्पतालों में भी रोज 35-40 लोग आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले पांच साल में युवाओं में ज्वाइंट दर्द की दिक्कत में 20 प्रतिशत इजाफा हुआ है।

  • युवाओं ने अपना रखी है ऐसी लाइफस्टाइल, अभी से हो रही है ये बूढ़ों वाली बीमारी

    तो क्या करें: फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. शेलेंद्र अत्री व डॉ. मीनू के अनुसार जोड़ों की बीमारियों से दर्द और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। इनमें से कुछ समस्याओं के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है।

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    वैसे अधिकांश समस्याएं दवाओं से ठीक हो जाती हैं। डॉ. अत्री ने कहा कि जोड़ों के दर्द को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अगर आपकी समस्या उग्र या साधारण है।

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Web Title: Youth who have made such a lifestyle, it's already getting old disease
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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