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PICS: ट्रॉले से कैंटर की हुई भीषण टक्कर, क्रेन से खींच कर निकालने पड़े शव

bhaskar news | Sep 15, 2013, 00:05 IST

  • हिसार. सड़क पर खड़े ट्राले से एक कैंटर के टकरा जाने से हुए हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए। हादसे में जिन लोगों की जान गई वे शहर के जाने माने कैटर्स आरसीबी (राम चाट भंडार) के लिए काम करते थे और एक समारोह में कैटरिंग के लिए कैंटर से बठिंडा जा रहे थे।

    दिल्ली बठिंडा मार्ग पर जिंदल पुल के पास हुए इस हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने ट्रैफिक जाम कर दिया और ट्राले को आग लगा दी। वे घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बहुत समझाने बुझाने व हादसे का शिकार लोगों के परिजनों को आर्थिक मदद का आश्वासन मिलने के बाद ही माने।

    घटना शुक्रवार सुबह साढ़े छह बजे की है। सेक्टर 27/28 स्थित आरसीबी के गोदाम से बठिंडा जाने के लिए निकला कैंटर जिंदल पुल की ओर चला ही था कि मोड़ पार करते ही कुछ दूरी पर खड़े ट्राले से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्राला में 40 टन लोड होने और पाए लगाकर रोके जाने के बावजूद पांच मीटर घिसटता चला गया। कैंटर में 13 लोग सवार थे। पांच लोग चालक के साथ उसके केबिन में और नौ लोग पीछे बैठे थे।

    चालक के साथ केबिन में बैठे सभी लोगों की मौत हो गई। मुरादाबाद निवासी 24 वर्षीय नवी जान, आगरा निवासी 35 वर्षीय ओमवीर, उत्तराखंड निवासी 32 वर्षीय देवेंद्र और धौलपुर निवासी 28 वर्षीय राकेश ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए गए युवक प्रदीप की भी शाम को मौत हो गई।

    25 वर्षीय प्रदीप हिसार के चैनत गांव का रहने वाला था। हादसे में डाबड़ा निवासी चालक दलबीर के अलावा पीछे बैठे कृष्णपाल, रूप कुमार, अनिल, बलजीत, विकास, विकास, दलबीर और मुकेश भी घायल हो गए। वहां पहुंचे लोगों ने पुलिस को सूचना दी और घायलों को अस्पताल लेकर भागे। हादसे के बाद पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ट्राला चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

    ब्रेकर पर उछला कैंटर,फिर ट्राले से टकरा गया

    अस्पताल में भर्ती चैनत गांव के बलजीत ने बताया कि वह कैंटर के पीछे सामान के साथ बैठा था। कैंटर की रफ्तार बहुत तेज थी। हादसे से पहले कैंटर ब्रेकर पर उछला। तभी हमें किसी हादसे का संदेह हुआ था। कुछ दूर आगे जाकर कैंटर ट्राले से टकरा गया। इससे पहले कैंटर डिवाइडर की ओर गया था, फिर अचानक वह कुछ घूमा और जोर का धमाका हुआ। उसके बाद हम सब नीचे जमीन पर जमीन पर जा गिरे।

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  • गुस्साए लोग बोले,क्यों सड़क पर खड़े रहते हैं ट्राले और ट्रक

    हादसे के बाद गुस्साई भीड़ ने जिंदल पुल के पास सड़क पर जाम लगा दिया। इसी बीच किसी ने ट्राले में आग लगा दी। ट्राले को जलता देख पुलिस के जवान पास की एक फैक्ट्री से बाल्टियों में पानी भर कर लाए और किसी तरह आग को नियंत्रित किया। गुस्साए लोगों का कहना था कि सड़क पर रोज ट्राले और ट्रक खड़े रहते हैं। सड़क पर ब्रेकर भी नहीं है। इस कारण वाहनों की स्पीड अधिक रहती है।

    बावजूद इसके, किसी का इस तरफ ध्यान ही नहीं जाता। हादसा होने के बाद अधिकारी आश्वासन तो दे देते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं। उन्होंने हादसे के शिकार लोगों के परिवार को मुआवजा देने की भी मांग की। घटनास्थल पर पहुंचे एएसपी मनोज कुमार, डीएसपी हेडक्वार्टर विनोद कुमार, एसडीएम जेके आभीर ने जाम खोलने का आग्रह किया।

    बाद में डीएसपी ने उन्हें पर सड़क पर ब्रेकर बनाने, मुआवजा देने और सड़क पर ट्राले और ट्रक नहीं खड़े होने देने का आश्वासन दिया तब उन्होंने जाम खोला। इस दौरान एसएचओ सिटी भगवानदास, एसएचओ सिविल लाइन सतपाल यादव, एसएचओ सदर विपिन कुमार, सीआईए प्रभारी इंस्पेक्टर दलीप सिंह, एसटीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार, एसएचओ ट्रैफिक विद्यानंद मौजूद थे।

  • क्रेन से खींच कर निकाले शव

    डेरा सच्चा सौदा के बलबीर इंसा ने बताया कि उन्हें फोन पर किसी ने सड़क हादसे की सूचना दी थी। इसके बाद डेरा की ग्रीन एस फोर्स मौके पर पहुंची। टीम ने अपना बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि पुलिस भी मौक पर पहुंच चुकी थी। पुलिस के साथ मिलकर टीम के सदस्यों ने मृतकों के शव क्षतिग्रस्त कैंटर से निकाले।

    इसके लिए क्रेन की मदद लेनी पड़ी। क्रेन की मदद से खींच कर शवों को निकाला गया। डेरा सदस्य सतपाल ने बताया कि हादसे के बाद कैंटर और ट्राला दोनों बुरी तरह चिपके हुए थे। इन्हें क्रेन से खींचकर अलग किया। मृतकों के शव कैंटर के केबिन में फंसे हुए थे। इन्हें निकाला।

    अवरोधक लगाए,ट्रैफिक लाइट लगेंगी

    जिंदल पुल के पास शुक्रवार सुबह पांच युवकों की मौत के बाद प्रशासन जागा है। हादसे के कुछ घंटों बाद ही सातरोड स्थित हनुमान मंदिर के पास मोड़ पर स्थाई अवरोधक लगा दिए गए। यहां एक ब्रेकर बनाने के अलावा ट्रैफिक लाइट लगाने की भी तैयारी है। इस बारे में पुलिस विभाग नगर निगम को पत्र लिखेगा। अवरोधक वाहनों की गति धीमी करने के लिए लगाए गए हैं। इनके बीच से होकर वाहनों को गुजरना होगा। यहां पुलिस के तीन जवान भी तैनात रहेंगे।

    राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 10 पर सड़क किनारे खड़े रहने वाले ट्राले या ट्रक अब नजर नहीं आएंगे। इसके लिए पुलिस विभाग ने एक राइडर की ड्यूटी लगा दी है। राइडर यहां पेट्रोलिंग पर रहेंगे। सड़क किनारे ट्राले या ट्रक नजर आने पर उनका चालान किया जाएगा। शुक्रवार को हुए हादसे की वजह भी नो पार्किग में खड़ा ट्राला बताया गया है। यदि यह ट्राला वहां न होता तो हादसा नहीं होता। इस सड़क पर अक्सर नो पार्किग में वाहन खड़े रहते हैं। इस कारण आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। इन्हें रोकने के लिए नई व्यवस्था की गई है।

    शहर में यातायात व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस प्रशासन जिंदल ग्रुप से सहयोग लेगा। इसके लिए जिंदल ग्रुप को पत्र लिखा जाएगा। इसमें कंपनी से ट्राले सड़क पर खड़े न करके पार्किग में खड़े करने की अपील की जाएगी। कंपनी से पार्किग की अलग व्यवस्था करने को भी कहा जाएगा। इससे सड़कों पर अव्यवस्था नहीं बनेगी।

    नो पार्किग जोन में सख्ती

    पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में नो पार्किग जोन में खड़े रहने वाले वाहनों के सौ से ज्यादा चालान किए हैं। इनमें ट्राले और ट्रक शामिल हैं। सड़कों पर नो पार्किग से वाहन हटाने के लिए पुलिस अब और सख्ती करेगी। इसके लिए चालान भी किए जाएंगे।

  • अरसे से परेशानी हैं नो पार्किग के वाहन : पार्षद

    वार्ड 11 के पार्षद राजपाल मांडू ने कहा कि अरसे से नो पार्किग जोन में खड़े रहने वाले ट्राले और दूसरे भारी वाहन परेशानी का सबब बने हुए हैं। फैक्ट्री में माल लाने ले जाने वाले ट्राले ही सड़कों पर खड़े रहते हैं। पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस ने सड़कों पर ट्राले खड़े नहीं होने देने, ब्रेकर बनाने और मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने का वायदा किया है। प्रशासन ने 14 की शाम तक का समय मांगा है।

    20मिनट में आई एंबुलेंस

    चैनत के 20 वर्षीय रूप ने बताया कि वह चार सौ रुपये दिहाड़ी के लिए आरसीबी की केटरर टीम के साथ जाता है। शुक्रवार सुबह वह सेक्टर 27/28 स्थित आरसीबी गोदाम से कैंटर में बैठकर निकला था। वह पीछे सामान के साथ था। उसके साथ नौ और साथी बैठे थे। चार लोग कैंटर चालक के साथ केबिन में बैठे थे। वे सभी सीनियर थे। कैंटर की ट्राले से टक्कर के कारण जमीन पर जा गिरे। 20 मिनट तक सड़क पर ही पड़े रहे। बाद में एंबुलेंस आई।

    पुलिस ने हादसा स्थल पर स्थाई अवरोधक लगा दिए हैं। यहां एक एसआई और कांस्टेबल भी रहेंगे। इसके अलावा इसी इलाके में एक ब्रेकर बनाने और ट्रैफिक लाइट लगाने का भी प्रयास है। नगर निगम को इसके लिए पत्र लिखा जाएगा।

    अमित दहिया,डीएसपी ट्रैफिक।

  • हादसे ने छीना चार परिवारों का सहारा

    खजान अभी दुधमुंहा है। प्रियांशी भी महज दो साल की है। दोनों भाई बहन अपना नाम तक नहीं जानते। इतनी छोटी सी उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। अब कैसे उनका लालन पालन होगा। जिंदल पुल के नजदीक हुए हादसे में राकेश की मौत के बाद ये जिम्मेदारी उसकी पत्नी कमल को संभालनी होगी। यह अकेली कमल की मुश्किल नहीं है, बल्कि देवेंद्र की पत्नी गीता, नवीजान की पत्नी जैतूल व ओमवीर की पत्नी विमल की भी है। अब इन परिवारों पर दो जून की रोटी जुटाने की भी समस्या खड़ी हो गई है।

    धौलपुर का राकेश कैटरिंग के काम के लिए 23 अगस्त को ही हिसार आया था। वह दो बच्चों का पिता है। उसका नौ महीने का बेटा खजान सिंह और दो साल की बेटी प्रियांशी है। इनकी जिम्मेदारी अब उसकी पत्नी कमल पर आन पड़ी है।

    पिता का साया उठा

    मुरादाबाद का नवीजान दो बच्चों का पिता है। इसका तीन साल का बेटा फैसल और पांच साल की बेटी फैमिस है। वह पिछले छह साल से कैटरिंग का काम रहा था। इसी से उसका घर चलता था। अब उसकी पत्नी जैतूल पर परिवार की जिम्मेदारी आन पड़ी है। नवीजान के चार भाई थे।

    होटल छोड़ बना था केटरर

    ओमवीर सुल्तानपुरी दिल्ली का रहने वाला है। वह मूलरूप से दलालपुर फतेहाबाद आगरा का निवासी है। इसके दो बच्चे हैं। बेटी सुमन 12 साल और बेटा अभिषेक नौ साल का है। एक साल से वह हिसार में कैटरिंग का काम कर रहा था। पहले वह दिल्ली के इंडियन होटल में था।

    सुबह निकला था घर से

    देवेंद्र मूलरूप से उत्तराखंड का रहने वाला है। कुछ समय से वह अपने परिवार के साथ दयानंद कॉलोनी में रहता है। परिवार में उसकी नौ साल की बेटी प्रियंका और पांच साल का बेटा अंकित और पत्नी गीता है।

    इकलौता बेटा था प्रदीप

    प्रदीप चैनत गांव के पूर्णचंद का इकलौता बेटा था। उसने 2011 में पॉलीटेक्निक कॉलेज से इलेक्ट्रिकल में डिप्लोमा किया था। डिप्लोमा करने के बाद उसने गुड़गांव में एक फैक्ट्री में कुछ समय काम भी किया।

    संस्था ने भी की मदद

    मदद संस्था के सदस्य भी शुक्रवार सुबह घटना स्थल पर मदद के लिए पहुंचे। सुनील, जसवंत और अजय ने घायलों को अस्पताल पहुंचवाया।

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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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