Home »Haryana »Yamunanagar » Banda Singh Bahadur Rulled At Lohgarh Fort, Himachal Pradesh India

यह है भारत का महाकिला, 7000 एकड़ में फैले इस किले के अंदर थे 200 फोर्ट

bhaskar news | Mar 20, 2017, 15:14 IST

लोहागढ़ किले का एक हिस्सा।

यमुनानगर. हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर पहाड़ों के बीच बसे लोहगढ़ किला बहुत बड़ा था। यह फोर्ट 7 हजार एकड़ में फैला है। इसे बनाने में 60 से 70 साल लगे थे। बाबा बंदा सिंह बहादुर ने 1710 में सरहिंद जीतने के बाद इस किला लोहगढ़ को सिखों की पहली राजधानी बनाया था। आगे 200 छोटे किले दुश्मन को ऐसे खड़ी करते थे परेशानी...
इस किले के अंदर लगभग 200 छोटे किले मौजूद हैं। ये किले एक से दूसरे का रणनीतिक संबंध है। यदि दुश्मन एक किले को जीत लेता तो वह दूसरे किले के अंदर घुस नहीं सकता था। हर किले कि रक्षा प्रणाली की दीवारें तीन भाग में हैं। मिले अवशेषों से लगता है कि हर पहाड़ी पर गांव बसता था। ऐसी सैकड़ों पहाड़ियां है। एरिया के हिसाब से ये सबसे बड़ा किला है और इसे महाकिला कह सकते है।
इतिहासकार हरजिंद्र सिंह दलगीर ने बताया कि रिसर्च में किले के अवशेषों में बड़ी दीवारें मिली है। ऐसा कभी हमने सोचा भी नहीं था, जो यहां पर आकर देखने को मिला। सिखों की पहली राजधानी लोहगढ़ को लेकर सीएम मनोहरलाल खट्टर ने काफी रुचि दिखाई है। इसके सरकार इसे विकसित करना शुरू कर दिया है।
इतिहासकार यहां का इतिहास खंगालने में जुटे हैं। बाबा बंदा सिंह बहादुर हैरिटेज डेवलेपमेंट फाउंडेशन यमुनानगर के शोध में इंग्लैंड के इतिहासकार हरजिंद्र सिंह दलगीर ने पाया कि अभी तक मोर्चे, कुएं, आटा पीसने की चक्कियां, घड़े के टूटे अवशेष और तेल निकालने के कोल्लू भारी मात्रा में मिले है। जंगल में कुएं बने हैं। इन अवशेषों से यह प्रतीत होता है कि लोहगढ़ के अंदर बहुत बड़ा शहर बसता था।
बाबा बंदा सिंह बहादुर हैरिटेज डेवलपमेंट फाउंडेशन यमुनानगर के चेयरमैन गुरविंद्र सिंह धमीजा नोडल अधिकारी डीडीपीओ गगनदीप सिंह ने बताया कि शोध के लिए इंडियन रूलर हैरिटेज डेवलेपमेंट न्यू दिल्ली के साथ फाउंडेशन ने एमओ पर किए हुए है। आठ माह से इस पर शोध चल रहा है।
गुरुनानक देव और गुरु गोबिंद सिंह के सिक्के चलाए
बाबा बंदा सिंह बहादुर ने लोहगढ़ की विरासत संभालते हुए गुरु नानकदेव और गुरु गोबिंद सिंह के नाम से सिक्का जारी। सिक्के के पीछे भारत में लोहगढ़ को खालसा तख्त की उपाधि दी गई। कुछ सिक्के आज भी लोहगढ़ गुरुद्वारे में मौजूद हैं।
मुकलिसगढ़ नहीं है लोहगढ़
इतिहासकार ने बताया कि कुछ विद्वानों ने लोहगढ़ को मुकलिसगढ़ बताया गया है, लेकिन नए शोध के अनुसार यह गलत है। मुकलिसगढ़ जिस जगह को बताया जाता है, वह जगह हरियाणा- उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित हथनीकुंड बैराज के साथ लगते गांव फैजाबाद में स्थित है।
शोध में सामने आया कि गुरु हरगोविंद साहिब की ग्वालियर के किले से रिहाई के बाद 1626 में बिलासपुर, नाहन हिंदुवार का राजा गुरु साहिब से मिलने के लिए अमृतसर गए थे और वहीं से इस किले के निर्माण की इन चार व्यक्तियों द्वारा रुप रेखा बनाई गई। मौजूदा लोहगढ़, नाहन के राजा के क्षेत्र में बनाया गया।
गुरु हरराय साहब (1645-1666) 17 साल की गुरु गद्दी के कार्यकाल में से 13 साल लोहगढ़ यमुनानगर में रहे। उनके दोनों पुत्र रामराय गुरु हरकृष्ण साहब बेटी स्वरूप कौर भी यहीं लोहगढ़ किले में पैदा हुए। गुरु तेग बहादुर साहब भी 1644 से लेकर 1656 तक यहां पर मौजूद रहे और उनके साथी भाई लक्की राय बंजारा, भाई मक्खन शाह लबाना ने किला लोहगढ़ के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई। वे उस समय के भारत के बड़े व्यवसायी थे।
इसके बाद गुरु गोबिंद सिंह ने लोहगढ़ किले से लगभग 10 किलोमीटर दूर पौंटा साहिब में 4 साल गुजरे और लोहगढ़ में स्थित सिख फौज को मुख्य ट्रेनिंग दी। इसके बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर द्वारा 1710 में लोहगढ़ किले का सिख कौम की राजधानी करार दिया गया।
आगे की स्लाइड्स में विशाल किले के अवशेष और यहां मिली ऐतिहासिक वस्तुएं...
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: Banda Singh Bahadur Rulled at Lohgarh Fort, Himachal Pradesh india
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।
 

Stories You May be Interested in

      More From Yamunanagar

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top