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पीजीआई में यूं कैसे विकसित होंगी सुपर स्पेशलिटी।

भास्कर न्यूज | Dec 09, 2012, 04:48 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
पीजीआई में यूं कैसे विकसित होंगी सुपर स्पेशलिटी।
रोहतक .प्रदेश के एकमात्र पीजीआईएमएस के न्यूरोलॉजी विभाग को दो दशक में तीन सुपर स्पेशलिस्ट मिले, लेकिन मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं मिलने और अंदरूनी टांग खिंचाई के चलते तीनों ने संस्थान को बॉय कह दिया।
न्यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों द्वारा संस्थान छोड़ने से पीजीआई के सुपर स्पेशलिटी विभागों को विकसित करने की मंशा पर सवालिया निशान लग गया है।
वर्ष 1990-91 से अस्तित्व में आए न्यूरोलॉजी विभाग की कमान सर्वप्रथम डॉ. बर्मन ने संभाली, लेकिन इन्हीं हालात में कुछ माह बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह हिसार में शिफ्ट हो गए। वर्ष 2005-06 में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. बजाज ने कार्यभार संभाला।
करीब चार माह तक ड्यूटी करने के बाद उन्होंने भी विभाग को अलविदा कह दिया और न्यूरोलॉजी विभाग फिर लावारिस हो गया। इस वर्ष मार्च माह में पीजीआई ज्वाइन करने वाले डॉ. पवन भी प्रबंधन के कथित नकारात्मक रवैए के चलते संस्थान को छोड़ गए। रोजाना सौ से अधिक मरीजों की ओपीडी देख रहे गोल्ड मैडलिस्ट डॉ. पवन शर्मा के इस्तीफे से संस्थान के तमाम डॉक्टर भी हैरान हैं।
संस्थान छोड़ने के ये हैं कारण
युवा डॉक्टर सपने को पूरा करने की मंशा से पीजीआई ज्वाइन करते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद ही सच्चाई उनके आंखों के सामने आ जाती है। यहां चिकित्सकों की अंदरूनी राजनीति, सुविधाएं मुहैया नहीं कराने, काम करने वाले डॉक्टर की टांग खिंचाई और डॉक्टरों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेना आम है।
इसी राजनीति से तंग होकर प्रतिभाशाली डॉक्टर दूसरे संस्थानों में जाने को मजबूर हो रहे हैं। पीजीआई के माहौल से अच्छी तरह परिचित कुछ एमबीबीएस डॉक्टर भी डिग्री पूरी करते ही संस्थान छोड़ देते हैं।
अन्य विभागों में भी स्थिति अच्छी नहीं
पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलाजी के डीएम डॉ. विवेक आहूजा इस वर्ष जून और न्यूरो सर्जरी के डॉ. विनित भाई भी संस्थान को अलविदा कह चुके हैं। वहीं, हेमोटालाजी में भी कोई सुपर स्पेशलिस्ट नहीं है। गेस्ट्रोएंट्रोलाजी सर्जरी में एक पद मंजूर किया गया है, लेकिन अभी तक किसी डॉक्टर ने ज्वाइन नहीं किया है। वहीं, पीजीआई के पीडियाट्रिक सर्जरी, बर्न प्लास्टिक, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, कार्डिक सर्जरी, कार्डिक व ओंकोलॉजी में एक से दो सुपर स्पेशलिस्ट हैं, लेकिन यहां भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं हैं।
डॉ. शर्मा वापस आएं तो जरूर देंगे सुविधाएं
पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस के कुलपति डॉ. सुखबीर सांगवान का कहना है कि डॉ. पवन शर्मा के समक्ष सुविधाएं देने के लिए एमएस को निर्देश दिए, लेकिन डॉ. शर्मा को इस्तीफा देने की जल्दी रही। सुविधाएं देने में समय लग जाता है। अगर वे संस्थान से जुड़ना चाहते हैं तो उनका स्वागत है। जहां तक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की बात है, इसके लिए छह विभागों में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। संस्थान के छह डॉक्टर सुपर स्पेशलिस्ट की पढ़ाई के लिए देश के विभिन्न संस्थानों में गए हुए हैं। अधिक पैकेज के लिए कोई डॉक्टर जाता है तो उसे नहीं रोक सकते।
न्यूरो के मात्र ४ सुपरस्पेशलिस्ट
गुड़गांव व फरीदाबाद को छोड़कर प्रदेश में न्यूरो के मात्र चार सुपर स्पेशलिस्ट हैं। डॉ. पवन शर्मा के अलावा इनमें एक हिसार, एक पीजीआई रोहतक के मेडिसन विभाग और एक सोनीपत में है। शेष जिलों में न्यूरो का एक भी सुपर स्पेशलिस्ट नहीं है।
क्यों जरूरी है न्यूरोलॉजिस्ट
ब्रेन से संबंधित हर बीमारी के इलाज के लिए न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ती है। बदलती लाइफ स्टाइल से ब्रेन के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ओपीडी में मिर्गी, लकवा, हाथ पैर सुन्न होने, गर्दन दर्द, पीठ दर्द व ब्रेन हेमरेज के मरीजों को पहले न्यूरोलॉजिस्ट चेक करता है। आवश्यकतानुसार उन्हें न्यूरो सर्जन को भेज दिया जाता है।
‘काम नहीं करने देते डॉक्टरों को’
न्यूरोलॉजिस्ट गोल्ड मैडलिस्ट डॉ. पवन ने कुलपति के बयान के बाद कहा कि संस्थान में कुछ ऐसे वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी हैं, जो काम करने वाले डॉक्टरों की टांग खिंचाई करते रहते हैं। कुलपति नौ माह से सुविधाएं देने की बात कह रहे हैं, लेकिन आज तक नहीं दी।

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Web Title: PGI has developed the Super
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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