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डिस्टलरियों से हर माह निकल रही 150 लाख प्रूफ लीटर अवैध शराब, हरियाणा, यूपी-दिल्ली में सप्लाई

राजेश खोखर | Apr 21, 2017, 06:15 IST

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डिस्टलरियों से हर माह निकल रही 150 लाख प्रूफ लीटर अवैध शराब, हरियाणा, यूपी-दिल्ली में सप्लाई
पानीपत.प्रदेश में अवैध शराब का बड़ा कारोबार चल रहा है। चंडीगढ़ व आसपास की डिस्टलरियों से शराब अरुणाचल प्रदेश में सप्लाई के नाम से निकलती है और हरियाणा के ठेकों में डिस्ट्रीब्यूट होने के बाद उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में सप्लाई कर दी जाती है। प्रदेश में हर माह औसतन 150 लाख प्रूफ लीटर अवैध शराब आ रही है। जो अलग-अलग दामों पर बेची जाती है, इसका अौसतन कारोबार 220 करोड़ रुपए प्रतिमाह है। यानी एक साल में करीब 2100 लाख प्रूफ लीटर शराब अवैध रूप से बिक रही है। यह आंकड़ा वैध तरीके से बिकने वाली शराब से भी ज्यादा है।

एक्सपोर्ट, इंपोर्ट, एक्साइज ड्यूटी और सरकार को प्रति पेटी लाइसेंस फीस बचाने के लिए इस गोरखधंधे में ऊपर से नीचे तक पूरा चेन सिस्टम बना हुआ है। अवैध रूप से बिकने वाली इस शराब को बनाने में डस्टलरी भी घटिया सामग्री का इस्तेमाल करती हैं। पिछले वित्त वर्ष की छिटपुट कार्रवाई में ही करीब 20 लाख प्रूफ लीटर ऐसी शराब पकड़ी जा चुकी है। इस धंधे को संचालित करने वाली बड़ी मछली तो आज तक हाथ नहीं आई, ठेकों में काम करने वाले चंद कर्मचारी ही पकड़े गए हैं। इतने बड़े स्तर पर प्रदेश में खप रही अवैध शराब के कारोबार को रोकने के लिए न तो एक्साइज महकमा और न ही प्रदेश सरकार गंभीर रुख अपना रही है।
ठेकों व रेहड़ियों पर सस्ते दाम में मिलने के कारण खराब गुणवत्ता की भी यह शराब आम आदमी आसानी से खरीद लेता है। मार्च-अप्रैल में तो इसका धंधा और भी बढ़ जाता है। क्योंकि इस समय ठेकों की नीलामी का समय होता है।
फ्रॉड चंडीगढ़ टू अरुणाचल के नाम पर
प्रदेश की राजधानी चंडीगढ़ एक छोटा शहर है, लेकिन यहां पर 10 डिस्टलरी हैं। इनसे न केवल हरियाणा और पंजाब बल्कि अरुणाचल और गोवा तक शराब की सप्लाई की जाती है। चंडीगढ़ और अरुणाचल इन्हीं दो छोटी जगहों से इस कारोबार के तार जुड़े हुए हैं। पिछले वित्त वर्ष में हरियाणा समेत आसपास की जगहों पर पकड़ी गई अवैध शराब के मामलों में निकल कर आया है कि वह शराब चंडीगढ़ की अलग-अलग डिस्टलरी से निकली है और उस पर ‘फोर अरुणाचल सेल’ के लेबल लगे मिले हैं। लेकिन शराब अरुणाचल गई ही नहीं। पूरी शराब हरियाणा और आसपास के राज्यों में बेची गई।
शराब तस्कर हर बार जगह बदल कर बोतलों पर लगाता है नकली लेबल
अवैध शराब की बिक्री करने वाले मुख्य सरगना हर बार जगह बदल कर नकली लेबल लगाने का काम करता है। हाल ही में 29 मार्च को सोनीपत जिले के खरखौदा में सीएम फ्लाइंग टीम ने एक फैक्ट्री पर छापेमारी की और वहां 8 हजार से ज्यादा शराब की पेटियां पकड़ी। मौके पर जो शराब मिली वह भी चंडीगढ़ से बनकर आई थी और ‘सेल फोर अरुणाचल’ के लेबल लगे थे। पिछले वर्ष जुलाई माह में पानीपत में एल वन गोदाम पर छापेमारी हुई तो यहां भी चंडीगढ़ में अरुणाचल के लिए बनी शराब बरामद हुई। इन दोनों स्थानों से भारी मात्रा में नकली लेवल भी मिले। इनमें कैंटीन के लेवल भी शामिल थे।
शराब माफिया को फायदा, सरकार को नुकसान
{डिस्टलरी से शराब निकल कर अरुणाचल जाएगी तो उसे चंडीगढ़ में एक्सपोर्ट, अरुणाचल में इंपोर्ट ड्यूटी समेत एक्साइज ड्यूटी देनी पड़ेगी। लेकिन शराब अरुणाचल प्रदेश जाती ही नहीं इसलिए कोई टैक्स डयूटी नहीं देनी पड़ती।
-सरकार प्रदेश में ठेकेदारों के लिए टारगेट और लाइसेंस फीस फिक्स कर देती है। एक ठेकेदार को एक जोन के लिए प्रति पेटी लाइसेंस फीस चुकानी पड़ती है। लेकिन अवैध कारोबार करने वालों को किसी तरह की फीस नहीं देनी पड़ती। जिससे वो सस्ते रेट में शराब बेच देते हैं और ठेकेदारों के टार्गेट पुरे नहीं होते और दोबारा ठेके लेने के लिए सामने नहीं आते।
-अवैध शराब बेचने के लिए डिस्टलरी मैटेरियल भी सस्ता और अवैध तरीके से खरीदती है इसलिए इस शराब की कोई गारंटी नहीं कि वो सही हो। इसलिए इस शराब का सेवन करने वालों की सेहत और जान का खतरा भी बना रहता है।
सरकार के रेवेन्यु का लॉस, शराब भी निम्न स्तर की
-पानीपत में जब सीएम फ्लाइंग ने छापेमारी की उस समय पानीपत के और हाल में अंबाला के डीईटीसी एन के ग्रेवाल ने बताया कि पानीपत की छापेमारी में भी अरुणाचल के लेबल की शराब मिली थी। यह बात बिलकुल सही है कि चंडीगढ़ की डिस्टलरियों से अरुणाचल के नाम पर शराब निकलती है। हम रास्ते में जांच करते हैं तो गाड़ी के पास परमिट होता है। लेकिन वो गाड़ी हाइवे पर कहां उतार दें कुछ नहीं पता। उतारते समय या बाद में किसी ठिकाने पर छापेमारी कर पकड़ लें तो ठीक नहीं तो पकड़ना बहुत मुश्किल है। इससे प्रदेश सरकार के रेवेन्यु का बड़ा लॉस हो रहा है क्योंकि एक परमिट पर सामान्य 10 चक्कर लगा देते हैं।

बड़ा गिरोह कर रहा काम : दूहन
सीएम फ्लाइंग के बाद पानीपत के मामले की जांच डीएसपी जगदीप दूहन ने बताया कि जांच में जो शराब मिली वह चंडीगढ़ में बनी हुई थी और अरुणाचल के लेबल थे। जांच में सामने आया था कि इसके पीछे बड़ा गिरोह काम कर रहा है। जिसके कुछ सदस्य पकड़े गए थे और कुछ फरार हैं।
प्रदेश में नए आदेश से और बढ़ा अवैध शराब का कारोबार
जब से सुप्रीम कोर्ट ने हाइवे के 500 मीटर तक शराब बिक्री पर रोक लगाई है तब से अवैध शराब बिक्री का कारोबार और ज्यादा बढ़ गया है। हाइवे किनारे शहरों में जहां-जहां पर भी अवैध शराब बिक्री हो रही है उन्हें यही शराब सप्लाई की जा रही है। चंडीगढ़ से आने वाली यह शराब किसी एक ठिकाने पर उतार कर फिर छोटी-छोटी मात्रा में सप्लाई हो रही है।
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Web Title: 150 million proof liters of illicit alcohol every month
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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