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7 फीसदी बड़े किसानों को जा रहा बिजली सब्सिडी का 35 फीसदी लाभ, 23 फीसदी वंचित

मनोज ठाकुर | Mar 21, 2017, 04:19 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
7 फीसदी बड़े किसानों को जा रहा बिजली सब्सिडी का 35 फीसदी लाभ, 23 फीसदी वंचित
चंडीगढ़।23 फीसदी स्माल एंड मार्जन किसानों को बिजली सब्सिडी का फायदा नहीं मिल रहा है। क्योंकि इनके पास बिजली कनेक्शन ही नहीं हैं। ऐसे किसानों को सिंचाई के लिए पानी बड़े किसानों या नहर से लेना पड़ रहा है। इसकी एवज में पैसा चुकाना पड़ता है। जबकि छोटे किसानों को इस मदद की बहुत ज्यादा जरूरत है।

इधर प्रदेश के सात फीसदी बड़े किसानों को ही 35 फीसदी बिजली सब्सिडी मिल रही है। उन्हें इसकी जरूरत ही नहीं है। क्रिड (सेंट्रल फॉर स्टडी इन रूरल एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट) ने कृषि बिजली सब्सिडी पर स्टडी की है, जिसमें यह तथ्य उभरकर सामने आया। क्रिड के प्रोफेसर डाॅक्टर सुच्चा सिंह गिल बताया कि बिजली की कृषि सब्सिडी को लेकर अब कोई नीति बननी चाहिए, क्योंकि अभी तक इससे न सिर्फ पैसा, बल्कि बिजली और पानी की भी बर्बादी हो रही है। इसे रोके जाने की सख्त जरूरत है। यह न सिर्फ खेती के लिए बल्कि बिजली निगम और सरकार के लिए भी आवश्यक हो गया है।

बिजली निगम के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 6 लाख 16 हजार 458 नलकूप बिजली पर आधारित हैं। इन्हें 6800 करोड़ रुपए की रियायत दी जाती है। औसतन एक नलकूप पर 1 लाख 10 हजार 307 रुपए रियायत मिल रही है। सरकार बिजली औसतन 7 रुपए 34 पैसे प्रति यूनिट खरीद रही है और किसानों से औसतन 10 रुपए प्रति यूनिट वसूला जाता है।
कोई माडल होना चाहिए, आखिर इस सब्सिडी से चाहते क्या हैं?
1. सब्सिडी खेत को आधार बनाकर दी जाए, न की नलकूप व बिजली कनेक्शन को देखकर।
फायदा : सभी किसानों को इसका लाभ मिलेगा। ऐसा नहीं होगा कि जिन किसानों के पास बिजली से चलने वाले नलकूप हैं, सिर्फ उन्हें ही इसका लाभ मिल रहा है।
2. सब्सिडी के पात्र किसानों की पहचान होनी चाहिए।
फायदा : क्योंकि बड़े किसान (25 या इससे अधिक एकड़ जमीन के मालिक) इन्हें सब्सिडी की जरूरत नहीं है। इससे जरूरतमंद किसान सब्सिडी के दायरे में आएंगे। उन्हें भी इसका लाभ मिल पाएगा और तब सरकार का पैसा भी बचेगा।
3. सब्सिडी की राशि सीधे खाते में डाली जाए, बिजली बिल पूरा वसूला जाए।
फायदा : तब किसान पानी बचाने के उपाय अपनाएगा, क्योंकि उन्हें फायदा होगा तो पानी का इस्तेमाल भी कम होगा।

पानी बचाने के लिए काम कर रही संस्था सेव वाटर के अध्यक्ष भीम सिंह रावत ने बताया कि बिजली निगम ने तकरीबन नलकूप पर बिजली कनेक्शन के 37 हजार 222 आवेदन इसलिए रद्द कर दिए, क्योंकि उनके क्षेत्र डार्क जोन में आ गए हैं। इधर, खेती में आधुनिक तरीके अपना कर 70 फीसदी तक पानी बचाया जा सकता है। रियायती बिजली से किसान बिजली और पानी बचाने की ओर ध्यान नहीं देते हैं। बिजली बचाने वाले उपकरण और मोटर की ओर अभी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सब्सिडी के बचे हुए पैसे को प्रदेश में सिंचाई के आधुनिक तरीके जैसे स्प्रिंकलर, ड्रिप और रेनी वाटर हार्वेस्टिंग पर खर्च किया जाना चाहिए।
डीबीटी सिस्टम लागू करने की योजना बन रही : सीएफओ
निगम के चीफ फाइनेंस आॅफिसर अमित दीवान ने बताया कि योजना है कि बिजली सब्सिडी को सीधे किसानों के खातों में डाला जाए। इस सिस्टम को लेकर काम किया जा रहा है, जहां तक सब्सिडी के किसी मॉडल की बात है तो यह तो सरकार के स्तर पर का मामला है।
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Web Title: 35 percent electric subsidy get big farmers
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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