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सात से 20 हजार रुपए लेकर बढ़ाए छात्रों के अंक

हेमंत अत्री/विजेंद्र कौशिक | Feb 20, 2013, 05:12 AM IST

सात से 20 हजार रुपए लेकर बढ़ाए छात्रों के अंक
रोहतक.एमडीयू के उत्तरपुस्तिका घोटाले की शुरुआती पुलिस जांच में सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं। घोटाले में संलिप्त दलालों ने प्रति पेपर अंक बढ़वाने के लिए इंजीनियरिंग छात्रों से 7 से 20 हजार रुपए वसूले।
मामले की मिलीभगत ऊपर तक होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इसके बाद पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बुधवार को विवि के परीक्षा नियंत्रक बीएस संधू को पूछताछ के लिए तलब किया है।
सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा गार्ड यशवंत द्वारा की गई सौदाबाजी की एक सीडी पुलिस के हाथ लगी है। सीडी में यशवंत छात्रों से पेपरों में अंक बढ़वाने के लिए रेट तय करते नजर आ रहा है। सीडी हाथ लगने के बाद एसआईटी ने उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की, लेकिन वह हाथ नहीं आ सका। पुलिस सावधानी से एक एक कदम आगे बढ़ा रही है।
‘खेल’ में परीक्षक भी
सूत्रों का कहना है कि घोटाले में पेपरों की जांच करने वाले कई परीक्षक भी शामिल हैं। इसके लिए जहां दलाल को प्रति पेपर एक हजार से 1500 रुपए मिले हैं, वहीं परीक्षकों व विवि के अधिकारियों को 8 से 10 हजार की रकम दी गई है। कई शिक्षकों ने आरटीआई के डर से सीधे अंक बढ़ाने से मना कर दिया। इस कारण छात्रों से दोबारा पेपर हल करवाने का तरीका अपनाया गया।
नपेंगे दर्जनों
मामले में विवि के आला अफसरों से लेकर कर्मचारियों तक का फंसना तय है। पुलिस ने मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली शुरू कर दी है।
एसआईटी पर एसपी की निगाह सूत्रों के मुताबिक पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पल एसआईटी की जांच पर स्वयं निगाह रखे हुए हैं। पिछले तीन दिनों में चार बार एसआईटी से मुलाकात कर चुके हैं।
परीक्षा नियंत्रक संधू से पूछताछ आज
जांच में गोपनीय व परीक्षा शाखाओं के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत के संकेत मिले हैं। बुधवार को एसआईटी परीक्षा नियंत्रक बीएस संधू से पूछताछ करेगी। पता चला है कि एक परीक्षा केंद्र से गोपनीय शाखा में 1132 इंजीनियरिंग की उत्तर पुस्तिकाएं आईं, लेकिन इनमें से गोपनीय शाखा ने मात्र 612 उतर पुस्तिकाएं ही जांच के लिए आगे भेजी, जबकि 520 उतर पुस्तिकाएं नहीं भेजी गई।
सवाल उठता है कि सभी उत्तर पुस्तिका एक ही दिन क्यों नहीं भेजी गई। रोल नंबर की कोडिंग व कॉपी जांच करने वाले परीक्षकों की जानकारी केवल गोपनीय शाखा के आला अधिकारियों को होती है, लेकिन यह सूचना दलालों तक कैसे पहुंच गई। इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए जांच टीम मंथन कर रही है।

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Web Title: seven the number of students
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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