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वीसी को पद से हटाने के लिए कार्यालय के बाहर छात्रों और पुलिस में धक्का-मुक्की

Bhaskar News Network | May 19, 2017, 02:15 IST

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वीसी को पद से हटाने के लिए कार्यालय के बाहर छात्रों और पुलिस में धक्का-मुक्की
एचपीयूनिवर्सिटी के वीसी कार्यालय के बाहर एक बार फिर से एसएफअाई कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का मुक्की हो गई। एसएफआई कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के अारोपों के चलते वीसी को पद से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वीरवार को दोपहर 12 बजे जैसे ही वीसी कार्यालय के बाहर छात्र पहुंचे, वैसे ही पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोक लिया। ऐसे में दोनों ओर से धक्का मुक्की होने लगी। काफी देर तक छात्र पुलिस कर्मियों के साथ उलझते रहें। वहीं, कार्यकर्ताओं का अारोप है कि कुछ पुलिस कर्मियों ने थप्पड़ भी लगाए। ऐसे में काफी देर तक कैंपस में विवाद चलता रहा।

कैंपसमें माहौल खराब

विविकैंपस में फिर से धरने प्रदर्शन शुरू होने के साथ ही शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ने लगा है। इन दिनों कैंपस में जहां पीजी की इंटरनल असेसमेंट की परीक्षाएं चली हुई है, वहीं प्रोफेशनल कोर्सिस में दाखिला के लिए फार्म भी भरे जा रहे हैं। इसके चलते इस तरह से माहौल खराब होने से छात्रों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है। एसएफआई के कैंपस अध्यक्ष रोनी का कहना है कि यदि वीसी को फिर से सेवा विस्तार दिया गया तो वह प्रदेश भर में शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर देंगे। जिसकी पूरी जिम्मेवारी प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि छात्रों को कोई सुविधाएं नहीं मिल रही है, जबकि भारी भरकम फीस उनसे ली जा रही है।

एसएफआई का कहना है कि वीसी को उनके पद से हटा देना चाहिए। एसएफअाई के कैंपस सचिव नोवेल ठाकुर का कहना है कि वर्ष 2011 में जब ये एचपीयू के कुलपति बने थे तो इन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को छुपाया था।

शिमला में वीरवार को वीसी को पद से हटाने की मांग को लेकर एसएफआई कार्यकर्ताओं ने वीसी कार्यालय में घुसने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस कर्मियों के साथ छात्रों की धक्का-मुक्की भी हुई।

धरने-प्रदर्शन सिर्फ राजनीति से प्रेरित

संजौलीकॉलेज में एक सेमिनार में भाग लेने आए विवि के वीसी प्रो. एडीएन वाजपेयी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कैंपस में होने वाले धरने प्रदर्शन सिर्फ राजनीति से प्रेरित हैं। इससे शैक्षणिक माहौल खराब हो रहा है। उनका कहना है कि एचपीयू प्रशासन छात्रों को बेहतर माहौल देने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।

एचपीयू की पूर्व एससीए ने वीसी के खिलाफ धांधली का अारोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वीसी पर आरोप लगाया है कि वर्ष 2011 में जब ये एचपीयू के कुलपति बने थे तो इन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को छिपाया था। जबकि इससे पहले जिस यूनिवर्सिटी में ये कार्यरत थे, वहां पर इनके खिलाफ कई तरह के मामले चले हुए थे। पूर्व एससीए अध्यक्ष पुनीत धांटा ने कहा था कि कुलपति की नियुक्ति के लिए दो प्रकार की योग्यताअों का अनुसरण किया जाता है। जिसमें एक विवि अधिनियम जबकि दूसरा यूजीसी के दिशा निर्देश शामिल हैं। इन दोनों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को जिसके खिलाफ कोई भी भ्रष्टाचार का मुकदमा न्यायालय में लंबित हो तो उसे कुलपति की कुर्सी पर नहीं बैठाया जा सकता है। आरटीआई के तहत जो जानकारी ली है, उसमें पता लगा है कि एचपीयू को वीसी ने पिछले पांच वर्षों में लगभग 2 करोड़ 7 लाख का नुकसान पहुंचाया है। गैर हिमाचल दिव्यांग व्यक्ति को हिमाचली दिव्यांग आरक्षित सीट पर भर्ती किया। अब तक जाे वेतन उसे दिया गया वह 30 लाख के करीब है। एक व्यक्ति को सरकारी आवास की फीस अनापति प्रमाण पत्र देने से विवि को 50 लाख का नुकसान हुआ। विवि के 18 कर्मियों को गैर कानूनी तरीके से निजी आवास में पिछले पांच वर्षों से काम कराने से विवि को उनके भुगतान से करीब 1 करोड़ 62 लाख का नुकसान हुआ। और भी कई मामले हैं।

शिमल| प्रदेशयूनिवर्सिटी के वीसी प्रो.एडीएन वाजपेयी के खिलाफ दायर याचिका में 15 जून को अब सुनवाई होगी। इससे पहले 18 मई को इस मामले में सुनवाई रखी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रो. एडीएन वाजपेयी इस पद पर नियुक्ति की पात्रता नहीं रखते। उन्हें पद से हटाने के आदेशों की मांग की है। अधिवक्ता वीरेंद्र ठाकुर और अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा द्वारा दायर याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार एडीएन वाजपेयी ने 3 फरवरी 2011 को वीसी के पद के लिए आवेदन किया था। आवेदन करते समय वाजपेयी ने इसका जिक्र नहीं किया कि उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच लंबित है। प्रो.वाजपेयी ने यह भी छिपाया कि उन्हें अवधेश प्रताप यूनिवर्सिटी से बर्खास्त किया गया था। प्रो. एडीएन वाजपेयी पर आरोप है कि अब भी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में भी वित्तीय अनियमितताओं में वे संलिप्त है। 24 मई को प्रो. वाजपेयी का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

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Web Title: वीसी को पद से हटाने के लिए कार्यालय के बाहर छात्रों और पुलिस में धक्का-मुक्की
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