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नियम ठेंगे पर, एससी/एसटी, ओबीसी माइनॉरटी कमीशन की भर्तियों में घपला

प्रकाश पालीवाल | Apr 18, 2017, 15:57 IST

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नियम ठेंगे पर, एससी/एसटी, ओबीसी माइनॉरटी कमीशन की भर्तियों में घपला
शिमला.एससी/एसटी, ओबीसी और माइनॉरटी कमीशन के भर्ती अभियान को लेकर हो विवाद हो गया है। इसमें किसी बड़े घपले की आशंका जताई जा रही है। एससी/एसटी, ओबीसी और माइनॉरटी आयोग के पूर्व चेयरमैन के फैसले का कुछ अफसरों ने बदलवा दिया।आगे कमीशन ने इसी माह तीन पदों पर भर्ती कर डाली...

29 नवंबर 2016 को आयोग के पूर्व चेयरमैन जस्टिस सुरजीत सिंह ने इस डिपार्टमेंट में कई पदों की भर्ती प्रक्रिया स्टेट स्टाफ सर्विस सलेक्शन बोर्ड हमीरपुर से करवाने की सिफारिश की थी। एसएसएसएस बोर्ड से भर्तियां करवाने के पीछे उनका तर्क था कि डिपार्टमेंट का काम एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य माइनॉरटी का पता लगवाना है, न कि भर्तियों में उलझा रहना। कमीशन ने इसी माह तीन पदों पर भर्ती कर डाली है, जबकि एक पोस्ट पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इस बारे में कमीशन का कोई भी अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
चेयरमैन की रिटायरमेंट के बाद भर्ती
एससी/एसटी, ओबीसी और बैकवर्ड क्लास कमीशन की चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस सुरजीत के सेवानिवृत्ति के बाद बैठक हुई। इस बैठक में आयोग के चार सदस्यों के अलावा मेंबर सेक्रेटरी संजीव भटनागर में भाग लिया। इस बैठक में पहले तो भर्ती को लेकर रिजेक्ट हुए सभी मामले लगा दिए। फिर बिना चेयरमैन के जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, रिसर्च ऑफिसर, क्लर्क और एक कर्मचारी का पद नाम बदलने का फैसला ले लिया गया।
बैठक में चार लोगों की तैनाती पर लिया फैसला
सूत्र बताते हैं कि कमीशन में तैनात एक अफसर एक कर्मचारी को हर हाल में यहां पर नियुक्ति दिलवाना चाह रहा था। इस कर्मचारी को नियुक्ति देने के लिए तीन अन्य वही मैटर इस बैठक में लगा दिए गए जो 23 दिन पहले रिजेक्ट हुए थे। कमीशन रिसर्च ऑफिसर के पद पर भर्ती को लेकर सबसे ज्यादा विवाद है। इसके लिए इंटरव्यू हुआ। इंटरव्यू के लिए कमीशन में तैनात अफसर ने अपने ही नजदीकी रिश्तेदार अफसर को बुला दिया।
रिटायर्ड जस्टिस ने बोर्ड से भर्ती की थी सिफारिश
एससी/एसटी, ओबीसी और बैकवर्ड क्लास कमीशन ने भर्तियों के बारे में अक्टूबर 2016 में एक नीतिगत निर्णय लिया। कमीशन में जो भी क्लास थर्ड और क्लास टू की भर्तियां होंगी। उन्हें भर्ती के लिए हिमाचल प्रदेश स्टेट सर्विस सलेक्शन बोर्ड हमीरपुर को भेजा जाएगा। इसमें स्पष्ट कर दिया गया था कि एससी/एसटी, ओबीसी और बैकवर्ड क्लास कमीशन का काम भर्तियां करना नहीं है, बल्कि इस कैटेगरी के लोगों को लेकर तमाम सर्वे करवाना है। इससे उनका फायदा हो सके।
जस्टिस ने नियुक्तियों की फाइल पर लगाई आपत्ति
कमीशन में जब नियुक्तियों वाली फाइल 29 नवंबर, 2016 को फिर उस वक्त के चेयरमैन रिटायर्ड जस्टिस सुरजीत सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए एक पैरा का नोट लिख दिया।
अध्यक्ष ही कर सकते हैं कर्मचारियों की नियुक्ति
एससी/एसटी, ओबीसी और बैकवर्ड कमीशन में नियुक्ति के लिए सरकार ने सिर्फ अध्यक्ष को ही शक्तियां दी हैं। इस बारे में समाज एवं महिला कल्याण विभाग के सचिव ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि आयोग एक स्वायत्त शासित अधिकरण है। इस लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति सिर्फ अध्यक्ष ही कर पाएंगे।
अध्यक्ष का पद रिक्त
कमीशन में पिछले चार महीने से अध्यक्ष का पद रिक्त है। सरकार ने यहां पर किसी को तैनात नहीं किया है। ऐसे में इन नियुक्तियों में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। कमीशन का चेयरमैन सरकार हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज को ही लगाती है।
नहीं दी प्रतिक्रिया
कमीशन के सदस्य धर्मचंद चौधरी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। कमीशन के स्पेशल सेक्रेटरी संजीव भटनागर ने भी इस पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
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Web Title: scame in recruitment of SC, ST,OBC, Minority in Himachal Pradesh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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