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भारतीय महिलाओं के हाल पर आता है रोना तो जानें बाकी मुल्कों में कैसी है उनकी जिंदगी

dainikbhaskar.com | Feb 17, 2013, 00:01 IST

  • भारतीय महिलाओं के हाल पर आता है रोना तो जानें बाकी मुल्कों में कैसी है उनकी जिंदगी
    यूं तो मानवाधिकार आयोग का कहना होता है कि किसी भी व्यक्ति के साथ अपमानजनक, निर्दयता या अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, बावजूद इसके महिलाओं को जेंडर के आधार पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। सारी दुनिया में पुराने रीति-रिवाजों और धार्मिक सिद्धांतों की वजह से महिलाओं की दशा और भी खराब हो गई है।
    बहुत सारे मामलों में युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से दुनिया का ध्यान महिलाओं की इस दुर्दशा से दूसरी ओर मुड़ जाता है। हालांकि, अभी की कुछ घटनाओं से लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है। अरब क्रांति में ट्यूनीशिया, मिस्र, लीबिया और यमन में महिलाओं को अपनी आवाज उठाने का मौका मिला।
    दिसम्बर 2012 में दिल्ली में हुई रेप की घटना ने दुनिया को झकझोर दिया. 23 साल की लड़की के साथ 6 लोगों ने चलती बस में रेप और टॉर्चर किया. कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई. एक स्टडी से यह बात सामने आई है कि हर तीसरी महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है। कुछ तो ऐसे कल्चर भी हैं, जिनमें महिलाएं आज भी बहुत ही दयनीय स्थिति में हैं। उनके लिए तो मदद पाना भी बहुत ही मुश्किल हो गया है।
    dainikbhaskar.com अपने पाठकों को बता रहा है दुनिया के ऐसे 10 देशों के बारे में, जो महिलाओं के लिए सबसे बुरे हैं...(दुनियाभर का ताजा हाल जानने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें)
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    नेपाल

    10 साल के गृहयुद्ध के बाद नेपाल इस मुकाम पर पहुंच चुका है, जहां संसद में 33 फीसदी महिलाएं हैं। इसके बावजूद उनकी स्थिति में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया है। सफलता के बावजूद ये महिला राजनीतिज्ञ मानती हैं कि देश में पुराने रीति-रिवाजों का ही बोलबाला है। हाल ही के युद्ध में 15000 लोगों के मरने की बात कही गई है। उसी समय 22000 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो गई। नेपाल में कम उम्र में ही शादी हो जाना आम बात है। यहां पर लड़के के जन्म के लिए महिलाओं को कई बार प्रेग्नेंट होने के लिए मजबूर किया जाता है। जेंडर के आधार पर भेदभाव तो आम बात है। इससे महिलाएं शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। नेपाल में घरेलू हिंसा एक बहुत बड़ी समस्या है। यहां पर ‘रूरल वुमेंस नेटवर्क नेपाल’ जैसी संस्थाएं भी हैं, जो महिलाओं की दशा सुधारने का काम कर रही हैं।
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    सऊदी अरब
    2009 में 'द वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम' ने जेंडर के आधार पर भेदभाव के मामले में सऊदी अरब को सबसे बुरे देशों में से एक बताया है। सऊदी अरब में हर उम्र की महिला के साथ एक पुरुष अभिभावक का होना जरूरी है। यहां तक कि घर में घुसने के लिए महिला-पुरुष के दरवाजे भी अलग होते हैं। वहां भेदभाव वाले नियम आज भी मौजूद हैं, जैसे एक महिला 1990 के बाद से हवाई जहाज में यात्रा तो कर सकती है, लेकिन एयरपोर्ट तक कार चला कर नहीं जा सकती है। 2012 में पहली बार सराह अत्तर और वोजडन शाहरकनी ने ओलिंपिक में भाग लेकर एक नया इतिहास रचा। 2012 में एक नया नियम लागू किया गया, जिसमें 2015 में महिलाएं पुरुष की इजाजत के बिना भी वोट दे सकेंगी।
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    पाकिस्तान
    9 अक्टूबर, 2012 को मलाला यूसुफजई पर हुए हमले के कुछ महीनों बाद ही दुनिया भर से हजारों लोगों ने मलाला को ‘नोबल शांति पुरस्कार’ देने की मांग की। तालिबान ने इस 15 साल की लड़की को गोली मार दी थी, क्योंकि वह महिला शिक्षा के लिए आवाज उठा रही थी। इसका इलाज ब्रिटेन में किया गया था और वह बच गई। 2008 में ही तालिबान ने सिर्फ महिला शिक्षा को रोकने के लिए करीब 150 स्कूलों को तबाह कर दिया। मलाला पर हुआ यह हमला तो बस एक ही पक्ष को दिखाता है। इस देश में ऑनर किलिंग, जबरदस्ती शादी कराना, महिला तस्करी, रेप और एसिड से हमला काफी आम बात है। पाकिस्तान में 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं उनके परिवार के लोगों के द्वारा ही मानसिक रूप से प्रताड़ित की जाती हैं।
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    अफगानिस्तान
    अफगानिस्तान कई सारे झगड़ों से अभी तक उभर नहीं पाया है। इन सभी झगड़ों का असर देश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। यहां पर डिप्रेशन, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और ज्यादा चिंता करना एक कॉमन समस्या है। यह समस्या परिवार को तहस-नहस कर रही है, खासकर महिलाओं को इन सबसे बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
    अफगानिस्तान ‘तालिबान’ और ‘मुजाहिद्दीन’ के नियमों का पालन करते हुए पतन की तरफ जा रहा है। इस कारण यहां पर महिलाओं की शिक्षा अभी 15 फीसदी तक ही बढ़ पाई है। यहां पर सामान्यतः अरेंज मैरिज होती है और एक इंसान अपनी पत्नी को बिना उसकी मंजूरी के भी तलाक दे सकता है।
    महिलाओं की दशा सुधारने के लिए नए लोकतंत्र की मांग जारी है। हालांकि, यह उस देश के लिए एक बड़ी बात है, जिस देश में महिलाओं की मृत्यु दर काफी ज्यादा है। उनकी औसत आयु 44 साल है।
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    चीन
    चीन में मानवाधिकार बहुत ही ज्यादा समय से एक अंतरराष्ट्रीय मामला बना हुआ है। अब जाकर थोड़ा ध्यान महिलाओं के अधिकारों पर दिया जा रहा है। चार दशकों से चीन में ‘एक बच्चे’ की पॉलिसी को प्रमोट किया जा रहा है, जिसका देश में जेंडर अनुपात पर बहुत ही गहरा असर पड़ रहा है। यह अनुमान है कि चीन के लगभग 40 मिलियन पुरुषों को पार्टनर नहीं मिलेगी।
    इसके परिणामस्वरूप चीन के पड़ोसियों के लिए और भी बुरे हो सकते हैं। उत्तर कोरिया से कुछ महिलाएं पैसे कमाने के लिए सीमा पार जाती हैं, लेकिन यदि वो पकड़ी नहीं भी जाती हैं, तब भी यह देश उनके लिए काफी खतरनाक है। उत्तर कोरिया की हजारों लड़कियां इस देश में आती हैं। उनमें से लगभग 90 फीसदी को चीन में दुल्हनों (जिसके कई पति होते हैं) के काले बाजार में बेच दी जाती हैं।
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    माली
    माली में महिलाओं के गुप्तांग को अंग-भंग करने की बात सामने आती है। माली की 95 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाओं के साथ यह हुआ है। माली में शिक्षा की कमी के कारण लोग इससे होने वाले मानसिक एवं शारीरिक नुकसान को नहीं समझ पा रहे हैं। यह माना जाता है कि सेक्स के दौरान ज्यादा दर्द साइको-सेक्शुअल समस्याओं का कारण बन सकता है।
    माली में एक महिला को घर से बाहर जाने से पहले भी अपने पति से अनुमति लेनी पड़ती है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार वहां के ‘इस्लामिक चरमपंथी’ संगठन बिन ब्याही मां बन चुकी लड़कियों की एक लिस्ट बना रहे हैं। ऐसी हड़कियों को बर्बर दंड दिया जाता है। यह दंड फांसी, पत्थरों से मार देना और शरीर काट देने जैसे होते हैं। लगभग पिछले एक साल से महिलाओं के कुछ समूह अपने लिए अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
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    इराक
    इराक ऐसा देश है, जहां पर झगड़े और सांप्रदायिक विद्वेष बहुत ज्यादा है। सद्दाम हुसैन के न होने और अमेरिकी सेना के हटा लिए जाने के बावजूद इराक अभी भी खुद को बंटा हुआ मानता है। एक सर्वे से यह बात सामने आई है कि इराक में 19 फीसदी महिलाएं मानसिक परेशानियों से जूझ रही हैं। कहा जाता है कि सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से महिलाओं की स्वतंत्रता काफी कम हो गई है। 2003 में कुछ एनजीओ भी शुरू हुए जैसे, ‘ऑर्गेनाइजेशन फॉर वुमेंस फ्रीडम इन इराक’। नई सरकार ने 2004 में एक ‘शारिया’ कानून भी लागू किया जो महिलाओं के विकास के लिए बनाया गया। ओडब्ल्यूएफआई ने महिलाओं की सुरक्षा में एक बड़ा रोल अदा किया है। इसने लोगों का ध्यान बढ़ते हुए रेप के मामलों, महिलाओं पर होने वाले हमलों, ऑनर किलिंग जैसे मामलों की तरफ आकर्षित किया। धार्मिक एवं सांप्रदायिक मामलों की वजह से महिलाओं को संघर्ष करना पड़ रहा है। 2003 से इस्लाम के दबाव की वजह से बुर्का प्रथा को काफी बढ़ावा मिला। एक महिला डॉ. लुब्ना नाजी ने बताया कि सद्दाम शासनकाल में महिलाएं ज्यादा स्वतंत्र थीं।
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    भारत
    भारत एक बहुत ही तेजी से बढ़ने वाली इकॉनोमी है। हालांकि, हाल में ही हुए कुछ मामले जनता का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। दिसम्बर, 2012 को दिल्ली में बस में हुए गैंगरेप मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया और यहां पर महिलाओं की सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया। एक सर्वे के अनुसार हर 14 घंटे में एक महिला का रेप होता है। 2012 में ‘थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन’ के पोल के मुताबिक, भारत में महिलाओं की स्थिति अन्य जी20 देशों के मुकाबले बहुत ही खराब है। घरेलू हिंसा यहां की महिलाओं के मानसिक तनाव का एक कारण है।
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    सोमालिया
    नवम्बर, 2012 में फोजिया यूसुफ हाजी अदान सोमालिया की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं। महिलाओं के लिए सोमालिया एक बहुत ही बुरा देश माना जाता है।अदान ने कहा कि उनका विदेश मंत्री बनना राजनीति में एक बड़ी पहल है। इससे देश की हालत सुधारी जा सकेगी। 2011 में ‘थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन सर्विस ट्रस्ट लॉ’ ने यह पाया कि महिलाओं के लिए शिक्षा के अवसर बहुत कम हैं। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा आम बात है। यहां की 95 प्रतिशत लड़कियों के गुप्तांग अंग-भंग करने की बात भी सामने आई है। इस्लामी आतंकवादियों अल-शबाब वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा बुरे माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में महिलाओं को कैंपों में रहना होता है। यहां पर हथियार बंद गुटों के द्वारा उनके साथ रेप किया जाना एक आम बात है।
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    डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो
    डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो को ‘दुनिया की रेप की राजधानी’ कहा जाता है। यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2009 में लगभग 8000 महिलाओं का रेप किया गया था। द्वितीय कांगो युद्ध के बाद से इस देश में हिंसा बरकरार है। इन महिलाओं का इस्तेमाल न केवल रेप के लिए, बल्कि युद्ध में हथियार के रूप में किया जाता है।
    एक पत्रकार जिम्मी ब्रिग्स ने यहां कैंप में रहने वाली महिलाओं से बात की। उन्होंने पाया कि वे महिलाएं डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से ग्रसित थीं। उनमें से बहुत-सी महिलाएं अपने परिवार की इज्जत के लिए कुछ भी कहने से डर रही थीं। उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी कम सुविधाएं थीं।
    कम उम्र में ही शादी एक आम बात है। कुछ ऑर्गेनाइजेशनंस का कहना है कि जब बात अरेंज मैरिज के लिए बाध्य करने की आती है तो यहां की पुलिस और स्थानीय अथॉरिटी को भी दोषी पाया गया है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: 10 Worst Countries in the World for Women
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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