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PAK में शाहबाज कलंदर की दरगाह पर ISIS का फिदायीन हमला, 100 की मौत

Dainikbhaskar.com | Feb 17, 2017, 11:05 IST

  • फिदायीन हमलावर दरगाह के गोल्डन गेट से दाखिल हुआ। उसने पहले ग्रेनेड फेंका। लेकिन वह नहीं फटा। इसके बाद उसने खुद को उड़ा लिया।
    पेशावर. दुनियाभर में मशहूर सूफी संत लाल शाहबाज कलंदर की पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मौजूद दरगाह पर गुरुवार शाम फिदायीन हमला हुआ। इसमें करीब 100 जायरीनों की मौत हो गई। 250 से ज्यादा घायल हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है। ब्लास्ट के वक्त दरगाह पर कलंदर जलसा चल रहा था। ये जलसा हर गुरुवार को अमूमन सभी दरगाहों पर होता है। बता दें कि 4 महीने पहले भी बलूचिस्तान प्रांत में एक दरगाह को निशाना बनाया गया था। हमलावर ने पहले ग्रेनेड फेंका...
    - पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक, घटना के वक्त सूफी परंपरा के मुताबिक जलसा (धमाल) चल रहा था। जहां ये जलसा चल रहा था, उसके चारों तरफ काफी लोग मौजूद थे।
    - पुलिस के मुताबिक, फिदायीन हमलावर दरगाह के गोल्डन गेट से दाखिल हुआ। उसने पहले ग्रेनेड फेंका। लेकिन वह नहीं फटा। इसके बाद उसने खुद को उड़ा लिया।
    - इस हमले का पैटर्न पिछले साल नवंबर में बलूचिस्तान में शाह नोरानी दरगाह पर हुए ब्लास्ट जैसा ही था।
    कहां हुआ ब्लास्ट?
    - ब्लास्ट सहवान शरीफ इलाके में हुआ। यह कराची से 200 किमी दूर है।
    - यह शहरी इलाका नहीं है। जहां पर दरगाह मौजूद है, वहां से सबसे नजदीकी हॉस्पिटल भी करीब 40 किमी की दूरी पर मौजूद है।
    - यह दरगाह सिंध के चीफ मिनिस्टर सैयद मुराद अली शाह के इलाके में मौजूद है।
    - शाह ने कहा कि हमने जामशोरो, नवाबशाह और हैदराबाद से डॉक्टरों को सहवान इलाके में भेजा है। पूरे सिंध प्रांत में मौजूद दरगाहों पर सिक्युरिटी बढ़ा दी गई है।
    - आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने जवानों को तुरंत दरगाह इलाके में भेजा है।
    4 महीने पहले भी सूफी दरगाह पर हुआ था ब्लास्ट
    - पिछले साल 13 नवंबर को बलूचिस्तान प्रांत की मशहूर शाह नूरानी दरगाह पर ब्लास्ट में 52 लोग मारे गए और 100 से ज्यादा जख्मी हुए थे।
    - इस दौरान 500 साल पुरानी दरगाह में सूफी संगीत का प्रोग्राम ‘धमाल’ चल रहा था। एक हजार से ऊपर लोग यहां मौजूद थे।
    कौन थे सूफी लाल शाहबाज कलंदर?
    - लाल शाहबाज कलंदर मशहूर सूफी संत थे। उनका जन्म 1177 में हुआ। इंतकाल 1275 में हुआ। उनके नाम के आगे ‘लाल’ इसलिए जुड़ा था, क्योंकि वे लाल रंग की पोशाक ही पहनते थे।
    - कलंदर इसलिए, क्योंकि इस शब्द का अर्थ फकीर होता है। वे झूलेलाल कलंदर के नाम से भी जाने जाते थे।
    - इस दरगाह को 1356 में काफी बड़ा बनाया गया। श्राइन को सिंधी काशी टाइल्स और शीशों से सजाया गया।
    - ईरान के एक शाह ने यहां एक सोने का दरवाजा डोनेट किया। यह गोल्डन गेट या सुनहरा दरवाजा के रूप में मशहूर है। गुरुवार को इसी के पास ब्लास्ट हुआ।
    दमा-दम मस्त कलंदर गीत से क्या है कनेक्शन?
    - ‘दमा-दम मस्त कलंदर’ सूफी गीत है। इसे महान सूफी कवि अमीर खुसरो ने लिखा था। कहा जाता है कि अमीर खुसरो ने यह गीत सूफी लाल शाहबाज कलंदर के सम्मान में लिखा था। बाद में इसे कई सूफी संतों ने गाया।
  • हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है। ब्लास्ट के वक्त दरगाह पर कलंदर जलसा चल रहा था।
  • मशहूर लाल शाहबाज कलंदर की दरगाह पर बम ब्लास्ट हुआ।
  • पाक में हमले के बाद कैसा था मंजर... देखें वीडियो।
  • ये दरगाह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है।
  • इसी दरगाह पर हर गुरुवार को हजारों जायरीन पहुंचते हैं। -फाइल
  • पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक, घटना के वक्त सूफी परंपरा के मुताबिक जलसा (धमाल) चल रहा था।
  • जिस इलाके में ये जलसा चल रहा था, उसके चारों तरफ काफी लोग मौजूद थे।
  • पुलिस के मुताबिक, फिदायीन हमलावर दरगाह के गोल्डन गेट से दाखिल हुआ।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: 30 dead in pakistan Lal Shahbaz shrine Sindh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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