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इसलिए गिराया गया था यहां ‘परमाणु’ बम, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

dainikbhaskar.com | Mar 19, 2017, 00:06 IST

  • परमाणु बम से बनाया गया कजागस्तान की चेगान नदी के पास बना तालाब।
    इंटरनेशनल डेस्क.अक्सर हम परमाणु बमों के टेस्ट को तबाही के रूप में ही देखते हैं। लेकिन, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इसके कुछ धमाके इंसानों की भलाई के लिए भी किए गए। जी हां, ऐसे ही कुछ धमाके सोवियन यूनियन ने कजागस्तान में तालाब बनाने और नहरों के निर्माण के लिए किए थे, लेकिन ये प्रयोग बेकार ही साबित हुए। इसका जीता-जागता उदाहरण कजागस्तान की चेगान नदी के पास बना तालाब है, जो परमाणु धमाके से खोदा गया था।150 फीट गहरा गड्ढा 350 फीट गहरे 500 फीट चौड़े गड्ढे में तब्दील हो गया था...
    - दरअसल, परमाणु बमों के परीक्षण की होड़ सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद ही शुरू हो गई थी।
    - एटमिक बमों की यह होड़ खासतौर पर अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच लगी हुई थी।
    - शीत युद्ध के दौरान अमेरिका को दिखाने के लिए सोवियत यूनियन ने सैकड़ों एटमिक बमों का टेस्ट किया।
    - इसी दौरान यह भी सोचा गया कि क्या परमाणु बमों का उपयोग इंसानों के हित के लिए भी हो सकता है।
    - मसलन, कोल खदानों से लेकर नहरों के निर्माण और तालाब बनाने में।
    - इसका सबसे पहला प्रयोग 15 जनवरी, 1965 को कजाख्स्तान में चेगान नदी के पास किया गया।
    - यहां पहले करीब 150 फीट गहरा गड्ढा किया गया और परमाणु विस्फोट किया गया।
    - इस विस्फोट से यह 150 फीट गहरा गड्ढा 350 फीट गहरे 500 फीट चौड़े गड्ढे में तब्दील हो गया।
    बारिश से तालाब भरा, कई बार पानी बदला गया
    - परमाणु विस्फोट के चलते यहां रेडिएशन था। इसके चलते कुछ सालों तक इसे ऐसे ही रहने दिया गया।
    - कुछ सालों बाद इस तालाब में पानी भर दिया गया, लेकिन रेडिएशन की वजह से पानी जहरीला ही रहा।
    - इसके बाद तालाब कई बार बारिश के पानी से भरा, पानी भी बदला गया, लेकिन रेडिएशन खत्म नहीं हुआ।
    - इतना ही नहीं, इसके आसपास का एरिया भी बंजर हो गया, जहां आज तक पेड़-पौधे भी नहीं ऊग सके हैं। आज भी इस तालाब का पानी हानिकारक है।
    - इस तरह एटमिक बमों का प्रयोग मानव हित के लिए हो सकता है, यह कल्पना सिर्फ कल्पना ही बनकर रह गई।

    आगे की स्लाइड्स में देखें, परमाणु बम से बनाए गए इस तालाब की फोटोज...
  • बमों के टेस्ट के दौरान यह भी सोचा गया कि क्या परमाणु बमों का उपयोग इंसानों के हित के लिए भी हो सकता है।
  • मसलन, कोल खदानों से लेकर नहरों के निर्माण और तालाब बनाने में।
  • इसका सबसे पहला प्रयोग 15 जनवरी, 1965 को कजाख्स्तान में चेगान नदी के पास किया गया।
  • यहां पहले करीब 150 फीट गहरा गड्ढा किया गया और परमाणु विस्फोट किया गया।
  • इस परमाणु विस्फोट से 150 फीट गहरा गड्ढा 350 फीट गहरे और 500 फीट चौड़े गड्ढे में तब्दील हो गया।
  • परमाणु विस्फोट के चलते यहां रेडिएशन था। इसके चलते कुछ सालों तक इसे ऐसे ही रहने दिया गया।
  • कुछ सालों बाद इस तालाब में पानी भर दिया गया, लेकिन रेडिएशन की वजह से पानी जहरीला ही रहा।
  • इसके बाद तालाब कई बार बारिश के पानी से भरा, पानी बदला भी गया, लेकिन रेडिएशन खत्म नहीं हुआ। इस तरह एटमिक बमों का प्रयोग मानव हित के लिए हो सकता है, यह कल्पना सिर्फ कल्पना ही बनकर रह गई।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Chagan nuclear test fired on 15 January 1965 in Kazakhstan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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