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Brexit: EU ने कहा- ब्रिटेन अब फौरन फैसला ले, जानसन बन सकते हैं पीएम

dainikbhaskar.com | Jun 25, 2016, 07:22 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
लंदन/बर्लिन/पेरिस.यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के फैसले से ब्रिटिश इंडियंस को बड़ा झटका लगा है। यहां रह रहे भारतीय मूल के ज्यादातर लोग नहीं चाहते थे कि देश EU से अलग हो जाए। कंजरवेटिव पार्टी के एमपी ऋषि सुनाक और आलोक शर्मा ने हमेशा ईयू में बने रहने का सपोर्ट किया था। शर्मा ने तो क्रॉस पार्टी तक बना ली थी। इस बीच, लंदन को ब्रिटेन से अलग करने की मांग उठने लगी है। ऐसी ऑनलाइन पिटीशन पर अब तक एक लाख से ज्यादा लोग साइन कर चुके हैं। इसमें मेयर सादिक खान से अपील की गई है कि वे लंदन को इंडीपेंडेंट स्टेट डिक्लेयर करें, ताकि लंदन EU में बना रहे। क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत, क्या आए नतीजे...
- बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं।
- यूके में लंबे समय से यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से देश अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है।
- यह कहा गया था कि ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा।
- पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे।
क्या आए नतीजे?
- शुक्रवार को आए नतीजों में 52 फीसदी ने ईयू छोड़ने, जबकि 48 फीसदी ने इसमें बने रहने के फेवर में वोट किए।
- यूथ चाहते थे EU में ही रहे UK, लेकिन बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग ने देश को अलग करने का फैसला दिया।
- 13 लाख वोटों के चलते यस और नो के बीच 4% वोटों का अंतर पैदा हुआ।
लंदन को अलग करने की मांग
- रेफरेंडम में लंदन के 2,263,519 लोगों ने वोट दिया था। इनमें से वोट 1,513,232 यूरोपियन यूनियन में जाने के फेवर में थे।
- अब लंदन को यूके से अलग करने की मुहिम जेम्स ओ-मैले ने शुरू की है।
- उनका कहना है कि लंदन एक इंटरनेशनल सिटी है और हम यूरोप में ही रहना चाहते हैं।
- उन्होंने कहा कि हम मेयर सादिक खान से अपील करते हैं लंदन को यूके से आजादी दिलवाएं, ताकि हम यूरोपियन यूनियन ज्वाइन कर सकें। क्या मिस्टर सादिक प्रेसिडेंट नहीं बनना चाहते?
टाटा ग्रुप ने एक दिन में गंवाए 30 हजार करोड़ रुपए
- शुक्रवार को ब्रेक्सिट का असर दुनियाभर के मार्केट्स में देखने को मिला। टाटा ग्रुप की कंपनियों का कुल मार्केट कैप सिर्फ एक दिन में करीब 30 हजार करोड़ रुपए घट गया। बता दें कि टाटा मोटर्स की टोटल इनकम का 13.4 फीसदी हिस्सा यूके से और 12 फीसदी हिस्सा बाकी यूरोप से आता है। टाटा ग्रुप की यूके में 19 कंपनियां हैं। यह ग्रुप इस देश में 60 हजार लोगों को इम्प्लॉयमेंट देता है।
ग्लोबल मार्केट में इन्वेस्टर्स के डूबे 140 लाख करोड़
- शुक्रवार को दुनियाभर के स्टॉक मार्केट में तेज गिरावट की वजह से इन्वेस्टर्स के 140 लाख करोड़ रुपए डूब गए।
- वहीं, इंडियन स्टॉक मार्केट करीब 2 फीसदी टूटे हैं। गिरावट की वजह से एक दिन में इन्वेस्टर्स को 1.77 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इंडियंस ने ईयू के फेवर में वोट डाले
- यूके पार्लियामेंट के मेंबर करण विलिमोरिया ने कहा, ''यूके में रह रहे 15 लाख ब्रिटिश इंडियन यहां का सबसे बड़ा माइनॉरिटी ग्रुप हैं। ये आर्थिक तौर पर कामयाब भी है।''
- ''इस कम्युनिटी के एक बड़े हिस्से ने यूरोपियन यूनियन के साथ बने रहने के लिए सपोर्ट किया। इसमें हर उम्र के लोग शामिल हैं।''
- लिबरल डेमोक्रेट्स पार्टी के डिप्टी लीडर नवनीत ढोलकिया भी इस बात से सहमत हैं कि यहां रह रहे इंडियंस ईयू का साथ न छोड़ने के सपोर्ट में थे।
- ढोलकिया के मुताबिक, ''ज्यादातर इंडियंस आर्थिक वजहों से यूके आए हैं। आर्थिक मंदी न आए, इस डर से वे यूनियन के साथ जुड़े रहना चाहते थे।''
- कंजरवेटिव पार्टी के एमपी आलोक शर्मा ने तो यूनियन में बने रहने के लिए एक क्रॉस पार्टी तक बना ली थी।
- 'ब्रिटिश इंडियन फॉर इन' नाम की इस क्रॉस पार्टी ने लोगों को ईयू में बने रहने का सपोर्ट करने को कहा।
कहां डाले वोट

- मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश इंडियन आबादी वाले ज्यादातर एरिया में ईयू का हिस्सा बने रहने के लिए वोट पड़े।
- इनमें वेम्बले, क्रॉएडन, साउथहॉल, हाउनस्लो, न्यूहेम, लिसेस्टर, रेडब्रिज, बार्नेट और मैनचेस्टर शामिल हैं।
- वेल्स बेस्ड इंडियन एकेडमिक ने कहा कि पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन ने ब्रेक्जिट के लिए वोट किया।
- इसके पीछे सिक्युरिटी और सोशल सर्विस जैसी जरूरतें बताई जा रही हैं। साथ ही, बढ़ते आतंकवाद का खतरा भी अहम कारणों में से है।
अब ब्रिटेन के टूटने का खतरा
- यूरोपियन यूनियन से बाहर होने के ब्रिटेन के रेफरेंडम के नतीजे (Brexit) से यूरोप हिल गया है। नतीजे उम्मीद के उलट आए। सर्वे गलत साबित हुए।
- अब ब्रिटेन के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। स्कॉटलैंड-आयरलैंड ने अलग होने का इशारा कर दिया है। वहीं, ईयू में शामिल कुछ और देश भी इससे अलग हो सकते हैं।
फिर उठी रेफरेंडम की मांग
- यूके में दोबारा रेफरेंडम की मांग उठी है। कुछ ही घंटे में ऑनलाइन पिटीशन पर 77 हजार लोगों ने साइन किए।
- इसमें कहा गया है कि हां और ना में सिर्फ चार पर्सेंट का फर्क है। इसलिए दोबारा रेफरेंडम की जरूरत है।
- जो ऑर्गनाइजेशन दोबारा रेफरेंडम का कैम्पेन चला रहा है, उसकी ऑनलाइन पिटीशन पर साइन करने वाली वेबसाइट शुक्रवार को कुछ ही घंटों में क्रैश हो गई।
- ब्रिटेन की स्कॉटलैंड नेशनल पार्टी (एसएनपी) की नेता निकोला स्टरजियोन ने कहा- "नतीजों से साफ है कि स्कॉटलैंड की जनता यूरोपियन यूनियन में अपना भविष्य देख रही है। ऐसे में, हमारी सरकार जल्द ही स्कॉटलैंड की आजादी के लिए दूसरे रेफरेंडम का एलान करेगी। आयरलैंड ने भी ऐसी ही बात दोहराई है।"
EU में हुईं इमरजेंसी मीटिंग्स
- रेफरेंडम के नतीजों के बाद यूरोपियन यूनियन के मजबूत देश फ्रांस में लगातार तीन इमरजेंसी मीटिंग हुई।
- फ्रेंच प्रेसिडेंट फ्रांस्वा ओलांद ने फोन पर जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल और यूरोपियन यूनियन के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क से लंबी बात की।
दूसरे देश भी जा सकते हैं बाहर
- ब्रिटेन के बाहर निकलने के बाद अब फ्रांस, डेनमार्क, फिनलैंड, हंगरी जैसे दूसरे देश भी यूरोपियन यूनियन से बाहर निकल सकते हैं।
कौन बन सकता है पीएम
- लीव कैम्पेन के बोरिस जॉनसन पीएम रेस में आगे हैं। वे लंदन के मेयर रह चुके हैं।
- फराज नाइजल भी दौड़ में हैं। उन्होंने अपने कैम्पेन में लगातार मुस्लिम इमिग्रेंट्स का मुद्दा उठाया।
इकोनॉमी की जगह इस्लामोफोबिया बना मुद्दा
- लीव कैम्पेन ने इमिग्रेंट्स का मुद्दा उठाया। सीरिया-इराक में आईएसआईएस के असर वाले इलाकों से आने वाले रिफ्यूजियों का विरोध किया। उन्हें खतरा बताया।
- ब्रिटेन में इमिग्रेंट्स के मुद्दे को उन्होंने देश की संस्कृति, पहचान और नेशनलिटी से जोड़ दिया।
- कैमरन ने जमकर 'रीमेन इन ईयू' का प्रचार किया, लेकिन नाइजल का 'लीव ईयू' कैम्पेन इंग्लैंड और वेल्स में कहीं ज्यादा कामयाब रहा।
- माइकल गोव ने ईयू से अलग होने के बाद ब्रिटेन का एजेंडा क्या होगा, इसका मसौदा तैयार करने में समय लगाया।
- ब्रिटेन हर हफ्ते ईयू को 350 मिलियन डॉलर देता है। इसका इस्तेमाल अब हेल्थ सेक्टर में होगा।
सोशल मीडिया पर रिएक्शन
- "मैंने आज सुबह अपना वजन किया और पाया कि मैंने कई पाउंड गंवा दिए हैं।" - ऋषि कपूर, एक्टर
- "मुझे नहीं लगता कि मैं कभी भी इस तरह का जादू चाहती थी। स्काॅटलैंड के अलग होने का खतरा पैदा हो गया है।" - जे के राउलिंग, राइटर
- "यह जश्न मनाने का वक्त नहीं है और न ही अलग होने का। नफरत का भी नहीं...यह बदलाव का समय है।" - गैरी लिनेकर, पूर्व फुटबॉलर
अागे की स्लाइड्स में पढ़ें : किसने क्या कहा, अभी ब्रिटेन के बाहर होने में काफी पेंच फंसे हुए हैं,ईयू का आर्टिकल 50 क्या है और भारत पर क्या होगा असर?
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Web Title: EU foreign ministers to London: We won’t wait for you
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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