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BREXIT: UK की जनता का फैसला- यूरोपियन यूनियन से अलग होगा देश

dainikbhaskar.com | Jun 24, 2016, 10:43 IST

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लंदन.यूके अब यूरोपियन यूनियन (EU) का हिस्सा नहीं रहेगा। ऐतिहासिक रेफरेंडम के नतीजे शुक्रवार को आए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बुजुर्गों की एकतरफा वोटिंग के चलते ब्रिटेन को 28 देशों के यूरोपियन यूनियन से अलग होना पड़ा। कुल आबादी में बुजुर्ग 18% यानी 1.12 करोड़ हैं। वे यूके की यंग जनरेशन पर भारी पड़े। बता दें, रेफरेंडम में हिस्सा लेने वाले ब्रिटेन के 18 से 29 साल के लोग EU के साथ रहना चाहते थे।
क्यों पड़ी रेफरेंडम की जरूरत...
- बता दें कि यूके (यूनाइटेड किंगडम) को ही ग्रेट ब्रिटेन या ब्रिटेन कहा जाता है। इसमें इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और ईस्ट आयरलैंड शामिल हैं।
- यूके में लंबे समय से कहा जा रहा था कि यूरोपियन यूनियन अपने सिद्धांतों से भटक गया है।
- यह दलीलें दी जा रही थीं कि यूनियन में शामिल होने की वजह से यूके अपनी इकोनॉमी या फॉरेन पॉलिसी को लेकर आजादी से फैसले नहीं कर पा रहा है। उसकी डेमोक्रेसी पर असर पड़ रहा है।
- पिछले इलेक्शन के बाद जब डेविड कैमरन पीएम बने तो उन्होंने वादा किया था कि वे रेफरेंडम कराएंगे।
- बता दें कि यूके में इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्थ आयरलैंड शामिल हैं।
- ईयू से अलग होने पर यूके इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर भी खुद फैसले कर पाएगा। (यहां क्लिक करके जानिए क्या है EU)
48% लोगों ने किया ब्रिटेन के EU में बने रहने का फेवर, इनमें...
- सबसे ज्यादा 18 से 29 साल एज ग्रुप के लोग थे। ब्रिटेन में इनकी संख्या 90 लाख है। यह कुल आबादी का 14% है।
- इस एज ग्रुप में भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा फेवर किया।
- ग्रैजुएट या उससे ज्यादा पढ़े-लिखे वोटर्स का पर्सेंटेज ज्यादा।
- मैनेजरियल और हाईक्लास प्रोफेशनल्स ने EU में बने रहने पर की वोटिंग।
- 'हां' में वोटिंग करने वालों में AB सोशल क्लास (हाई इनकम ग्रुप) के लोग ज्यादा।
52% ने कहा- अलग हो ब्रिटेन, इनमें...
- 50+ एज ग्रुप वाले ज्यादा। ब्रिटेन में इनकी संख्या 2.24 करोड़ है। ये कुल आबादी का 35% है।
- कम पढ़े-लिखे लोगों की संख्या सबसे ज्यादा।
- इनमें भी लेबर और स्किल्ड मैनुअल वर्कर सबसे ज्यादा, जो ईयू के सख्त इमिग्रेशन नियम के खिलाफ थे।
- बता दें, 17 साल से कम उम्र के लोगों को वोट देने का हक नहीं था। इनके अलावा, 30 से 49 एज ग्रुप के लोगों ने मिली-जुली वोटिंग की।
ब्रिटेन की आबादी में सबसे ज्यादा 50+ वाले
एज ग्रुपआबादी (करोड़ में)कुल आबादी में %
0-17 साल1.4022
18-29 साल0.9014
30-49 साल1.8729
50 साल से ज्यादा वाले2.2435
कुल6.41100
ब्रिटेन के पीएम ने किया इस्तीफे का एलान
- इस बीच, ब्रिटेन के पीएम डेविड कैमरन ने कहा- ''मैं अक्टूबर तक इस्तीफा दे दूंगा। मुझे नहीं लगता कि देश जिस अगले पड़ाव पर जा रहा है, उसकी कमान मुझे संभालनी चाहिए। कंजर्वेटिव पार्टी को नया लीडर चुनना चाहिए।'' वहीं, यूरोपियन यूनियन ने कहा- "ब्रिटेन को अब जल्द से जल्द अलग हो जाना चाहिए।"
पाउंड समेत दुनियाभर की करंसी पर असर
- यूके के रेफरेंडम में आए नतीजों के बाद पाउंड में 31 साल की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। यूरो और रुपए में भी गिरावट आई।
- ऑस्ट्रेलियन डाॅलर, न्यूजीलैंड डॉलर, मेक्सिकन पेसो, साउथ अफ्रीका के रेंड, स्विट्जरलैंड के फ्रेंक, नॉर्वे के क्रोन और पोलैंड की करंसी जोल्टी पर भी असर पड़ा।
- नतीजों का भारत के शेयर बाजारों पर भी असर देखा गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में एक हजार प्वाइंट्स की गिरावट आई। हालांकि, बाद में बाजार संभल गया और 650 अंक की गिरावट के साथ बंद हुआ। दुनियाभर में करंसी कमजोर हुई।
EU ने क्या कहा?
- रेफरेंडम के नतीजे आने के बाद यूरोपियन यूनियन ने ब्रिटेन से जल्द से जल्द अलग होने को कहा है।
- यूनियन के अलग-अलग हेड्स ने ब्रेक्जिट के नतीजे आने के बाद ज्वाइंट स्टेटमेंट में कहा, "हम चाहते हैं कि यूके की गवर्नमेंट जनता के इस फैसले को जल्द से जल्द लागू करे। हालांकि, ये कई लोगों के लिए दुखदायी हो सकता है। बेवजह किसी भी तरह की देर से अनिश्चितता जाहिर होगी।"
- ये स्टेटमेंट ईयू प्रेसिडेंट डोनाल्ड टस्क, ईयू कमीशन चीफ जीन क्लॉड जंकर, ईयू पार्लियामेंट लीडर मार्टिन शुल्ज और डच प्रीमियर मार्क रुटे ने जारी किया।
भारत पर क्या होगा असर?
1# करंसी
- रुपया कमजोर हो सकता है।
- डॉलर के मुकाबले रुपया अगस्त 2013 में अपने सबसे निचले लेवल 68.85 पर पहुंचा था।
- शुक्रवार सुबह यूके के नतीजे आने लगे तो शुरुआत में रुपया 60 पैसा लुढ़का।
- जब यह 68.20 पर पहुंचा तो आरबीआई ने करंसी मार्केट में दखल दिया। फॉरेक्स डीलर्स से डॉलर की ब्रिकी शुरू कराई और रुपया रिकवर हुआ।
- रुपया कमजोर होता है तो क्रूड ऑयल खरीदने की भारत की कॉस्ट बढ़ती है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट में क्रूड सस्ता हो रहा है। इसलिए फिलहाल पेट्रोल-डीजल के महंगे होने के आसार नहीं हैं।
2# शेयर बाजार पर असर
- शुक्रवार सुबह जब BREXIT के नतीजे आ रहे थे, तब शुक्रवार सुबह सेंसेक्स 1000 और निफ्टी 236 प्वाइंट तक गिरा।
- दिनभर में सेंसेक्स में 604 प्वाइंट्स की गिरावट आई। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इससे भारतीय इन्वेस्टर्स का 1.79 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
- टाटा मोटर्स के शेयर्स में भी गिरावट देखी गई। टाटा की जगुआर-लैंड रोवर ब्रिटेन की सबसे बड़ी कार मेकर कंपनी है।
- ब्रिटेन के ईयू से अलग होने के मायने हैं कि टाटा मोटर्स को यूरोप के बाकी देशों में टैक्स और ड्यूटी चुकानी होंगी। कीमत बढ़ने से उसकी लग्जरी कारें यूरोप के मार्केट में पिछड़ सकती हैं।
3# भारतीय कंपनियां
- अगर इंडियन इकोनॉमी के लिहाज से देखें तो इसके काफी मायने हैं।
- ब्रिटेन में 800 इंडियन कंपनियां हैं। यूके के ईयू से बाहर होने के बाद इनके कारोबार पर असर पड़ेगा, क्योंकि इसमें ज्यादातर यहां रहकर ओपन यूरोपियन मार्केट में बिजनेस करती हैं। ये ब्रिटेन में 1.1 लाख लोगों को इम्प्लॉइमेंट देती हैं।
- इकोनॉमिस्ट डीएच पई पनंदिकर ने moneybhaskar.com को बताया कि टाटा मोटर्स, एयरटेल और भारत की फार्मा कंपनियां यूके में बेस बनाकर EU में आसानी से बिजनेस कर रही थीं। अब इन्हें यूरोपियन यूनियन के बाकी देशों में बिजनेस के लिए एक्स्ट्रा टैक्स और ड्यूटी देनी होंगी।
- हालांकि, इकोनॉमिस्ट विश्वजीत धर का कहना है कि Brexit से ब्रिटेन के साथ भारत के ट्रेड पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है यूरोपियन यूनियन?

- यूरोप एक कॉन्टिनेंट है, जिसमें 51 देश हैं। इनमें से ब्रिटेन समेत 28 देशों ने यूरोपियन यूनियन बनाया। यह 1993 में बना था।
- यूनियन के 19 देशों की एक अलग करंसी यूरो बनाई गई। इनकी इमिग्रेशन पॉलिसी भी एक जैसी तय हुई। डिफेंस, इकोनॉमी और फॉरेन पॉलिसी पर भी एक राय में फैसले लिए जाने लगे।
- एक वीजा से पूरे यूरोपियन यूनियन में एंट्री हो सकती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें : UK को अलग होने में कितना वक्त लगेगा?
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Web Title: UK votes to leave, Brexit wins EU referendum
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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