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PHOTOS: आज से नहीं बरसों से बर्बर है चीन, अपराधियों को देता था भयानक सजा

dainikbhaskar.com | Jan 22, 2013, 00:00 IST

  • अपराधियों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की हत्याएं करने का चलन दुनिया में काफी समय से है। शासकों द्वारा कैद किए गए अपने प्रतिद्वंद्वियों और किसी अपराध के दोषी को बेहद क्रूर तरीके से मौत के घाट उतारा जाता था।
    चीन की बात करें तो हम पाएंगे कि भारत के विपरीत वहां हार साल औसतन 70 लोगों को फांसी दी जाती है. वहीं 19वीं सदी के चीनी लोग सजा देने के मामले में सबसे ज्यादा बर्बर हुआ करते थे. न्याय प्रक्रिया का हिस्सा होने के कारण ऐसे कठोर दंडों को समाज द्वारा स्वीकार भी किया जाता था। आज हम आपको 19वीं सदी के चीन में ले चलते हैं, जहां एक गलती की सजा भी दर्दनाक मौत समझी जाती थी.
    अंदर की स्लाइड में देखें बर्बर चीन में कैसे दी जाती है सजा...
  • सिर कलम कर देना, गला घोंट देना और भूखा मार देना यह सब चीन में सजा देने के तरीके होते थे। यह सब 19वीं सदी में सबसे ज्यादा चरम पर था। वहीं ऐसे लोग, जिन्हें मार डालने की सजा नहीं भी दी जाती थी, ऐसे लोगों की बाकी जिंदगी भी खत्म ही समझी जाती थी। क्योंकि उन्हें दी जानी वाली यातनाओं की फेहरिस्त इतनी लंबी होती थी कि वह आने वाले सालों में कुछ कर सकने के काबिल नहीं होते थे।

    (तस्वीरों में देख सकते हैं कि इस बंदी का गला घोंट कर मार डाला है। इसके हाथों की लंबी अंगुलियों पर भी ध्यान दीजिए)

  • बॉक्सर विद्रोह का खुनी दौर...

    उत्तरी चीन में 1899 से 1901 तक बॉक्सर विद्रोह चीनी इतिहास का सबसे ज्यादा रक्तपात वाला विद्रोह था। यह यूरोपियाई साम्राज्यवाद और ईसाई धर्म के फैलाव के विरुद्ध एक हिंसक आंदोलन था। यूरोप के देशों ने चीन को अपने प्रभाव क्षेत्र बांट लिया था, जहां वे अपनी हुकूमत चलाते थे। चीनियों को ईसाई भी बनाया जाता था। इसके खिलाफ एक धार्मिक यीहेतुआन नाम का संगठन खड़ा हुआ। विद्रोहियों ने सारे विदेशियों को खदेड़कर बीजिंग के दूतावासी मोहल्ले में बंद कर दिया था। चीन की शाही सरकार पहले तो अलग कर बैठी रही, लेकिन दरबार के कुछ दरबारियों के उकसाने पर उन्होंने विद्रोह का पक्ष लिया। इस दौरान बर्बरता की हदें पार कर दी गई। कई ईसाईयों को मार डाला गया। यह तस्वीरें उस समय की हैं। सार्वजनिक रूप से गले काटकर दुश्मनों को चेतवानी दी जाती थी.

  • यह तस्वीरें चीन के हांको की हैं, जिसे पश्चिमी फोटोग्राफर जेम्स रिकल्टन ने कैमरे में कैद किया है। गले में कांग डालकर मौत या यातना दी जाती थी।

  • बारिश में अपनी मौत का इंतजार करता कैदी, शायद उसके आंसू कोई न देख पाए। घुटनों के बल कीचड़ में बैठा दोनों हाथ पीठ से बंधे हुए और सिर झुकाए हुए अपनी बारी का इंतजार करता हुआ कैदी। जल्लाद पीछे खड़ा होकर उस का काम तमाम करने के लिए तैयार है।

  • कुछ देर बाद वहीं हुआ, जो सब जानते थे। जल्लाद हाथ में कैदी का सिर लेकर कुछ ऐसे दिखा रहा हो मानो वह दूसरे लोगों को चेतावनी दे रहा हो।

  • जेम्स रिकाल्टन द्वारा खींची गई यह तस्वीरें 1990 में प्रकाशित की गई थीं। संपादक जे लूकास के मुताबिक, उनकी इस तस्वीर की भारी मांग थी। वे उस दौर के सबसे बड़े फोटोग्राफर्स में से एक थे।

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Web Title: Brutal Torture and Execution in 19th Century China Disturbing Images
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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