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दक्षिण चीन सागर मामले पर चीन की भारत को चेतावनी

एजेंसी | Dec 06, 2012, 07:52 IST

बीजिंग.चीन ने भारत को चेतावनी दी है कि वह दक्षिण चीन सागर में तेल की खुदाई करने का कोई एकतरफा फैसला न करे। चीन का कहना है कि इस विवादित क्षेत्र में बाहरी देश के दखल के वह खिलाफ है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने बुधवार को कहा कि चीन इस क्षेत्र में किसी देश द्वारा एकतरफा तौर पर तेल और गैस निकालने के खिलाफ है। यह चीन की संप्रभुता पर हमला है। सभी देशों को इसका सम्मान करना चाहिए। लेई नौसेना अध्यक्ष डीके जोशी के बयान पर टिप्पणी कर रहे थे। जोशी ने कहा था कि दक्षिण चीन सागर में देश के हितों की रक्षा के लिए वहां भारतीय नौसेना के जहाज तैनात करने को तैयार हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने कहा है कि जोशी के बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है।

हेनान प्रांत में विदेशी जहाज की तलाशी के नए नियम बनाए

चीन के दक्षिण चीन सागर के समीप स्थित प्रांत हेनान की सरकार ने वहां से गुजरने वाले जहाजों की पुलिस जांच संबंधी नए नियम पारित किए है। इनके अनुसार उसे जहाजों की जांच करने और उसे हिरासत में लेने का भी प्रावधान किया गया है। दक्षिणी चीन सागर में अधिकार को लेकर चीन के वियतनाम, फिलीपींस, ताई-वान, ब्रुनेई एवं मलेशिया के साथ लगातार विवाद बना हुआ है। विवादों के बीच इस तरह के नियमों से चीन और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध बिगडऩे की आशंका जताई जा रही है। चीन इस पूरे सागर पर अपना दावा जताता है जिसका पड़ोसी देश जबरदस्त विरोध करते है।

चीन के अधिकारिक सूत्रों ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह चीन की केंद्रीय सरकार का फैसला नहीं है बल्कि प्रांतीय सरकार का फैसला है। हेनान के विदेश मामलों के कार्यालय के प्रमुख वू शिकून ने बताया कि पराकल द्वीप के आस पास के इलाके से वियतनामी मछुआरा नौकाओं की बढ़ती आवाजाही के चलते यह फैसला लिया गया है। चीन के दक्षिण चीन सागर अध्ययन के राष्ट्रीय संस्थान के भी प्रमुख वू ने बताया कि प्रांतीय सरकार का यह फैसला एक जनवरी से लागू होगा। लेकिन इस कानून के कारण इस जलक्षेत्र से गुजरने वाले अधिकतर जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी । चीन और विदेश नीति के विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई नई नीति नहीं है और ना ही इस कानून से चीन की नीति में किसी तरह का कोई परिवर्तन प्रकट होता है। इस बीच चीन ने वादा किया है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाली विदेशी नौकाओं की आवाजाही पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

जीएमआर मसले पर भारत सख्त, मालदीव को चेताया

भारत ने जीएमआर मसले को काफी गंभीरता से लिया है। उसने मालदीव को दो-टूक कह दिया है कि अगर उसने इस मसले पर कानून का पालन नहीं किया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। खासकर रक्षा संबंधों समेत द्विपक्षीय संबंधों पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। उसने यह भी माना कि माले एयरपोर्ट के निर्माण से जुड़े जीएमआर के ५० करोड़ डॉलर के कांट्रैक्ट को रद्द करने का फैसला मालदीव सरकार का निजी मसला है। पर इस मुद्दे को उस देश में उठ रहे 'भारत विरोधी स्वर' से वह काफी नाराज है। इस बीच, सूत्रों ने कहा है कि जीएमआर का ठेका रद्द करने के फैसले में बाहरी ताकत का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने मालदीव से कहा है कि वह इस मसले पर सभी कानूनी पहलुओं को निश्चित तौर पर ध्यान में रखें।

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Web Title: China warns India on South China Sea
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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