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PIX: यकीन नहीं करेंगे आप, 60 साल पहले ऐसा था अफगानिस्तान!

Agency | Feb 21, 2013, 15:46 IST

  • ‘बैटलफील्ड ऑफ द वर्ल्ड’ नाम से पहचाने जाने वाला अफगानिस्तान अब सिर्फ अशांति, आतंक और आतंकवादियों की शरणस्थली बन चुका है। लेकिन इसका अतीत बिल्कुल इसके विपरीत था। पहाड़ियों और खूबसूरत वादियों से पूर्ण यह देश हमेशा से ही आक्रमणकारियों की शरणभूमि रहा है। हालांकि इस मुल्क की स्वतंत्रताप्रिय जनता ने किसी भी ताकत के आगे घुटने नहीं टेके, चाहे फिर वह ब्रिटिश सेना रही हो या फिर विशाल रूसी सेना। अंतत: इन्हें हार मानकर यहां से खाली हाथ ही लौटना पड़ा है। अनेकों सम्राटों के भीषण आक्रमणों को झेलने के बाद भी 50 साल पहले तक इस देश के लोगों की सोच शांत ही थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। आइए, अमेरिका के डॉ. विलियम पोडलिक द्वारा सन् 1967 में खीचीं गई तस्वीरों से इस खूबसूरत देश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हैं..

    सन् 1967 में डॉ. विलियम पोडलिक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचे थे, जहां वे दो साल तक रहे। विलियम ‘एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी’ में प्रोफेसर थे। युनिवर्सिटी से छुट्टी लेकर उन्होंने यूनेस्को के साथ दो साल तक काबुल के टीचर्स कॉलेज में शिक्षण कार्य किया। उनके साथ उनकी पत्नी मार्गरेट और दो बेटियां जेन व पेग भी उस दौरान वहां रहीं। दोनों बेटियों ने अमेरिकन इंटरनेशनल स्कूल ऑफ काबुल में शिक्षा भी ली।

    यह वह समय था, जब अफगानिस्तान बहुत शांत था। इस दौरान विलियम ने कई फोटो भी क्लिक किए थे, जिन्हें देखकर आप समझ जाएंगे कि इस देश के सबसे बड़ा शहर काबुल में आज की तरह कट्टरता, अशांति और अराजकता नहीं थी, बल्कि इसका नाम शांत और प्रगतिशील शहरों की सूची में था। तब यहां विदेशियों पर गोलियां नहीं दागी जाती थीं, बल्कि गर्मजोशी से उनका स्वागत किया जाता था। शिक्षण क्षेत्र में भी इस शहर का स्तर सराहनीय था। लड़कियां बिना बुर्का ओढ़ेस्कूल जाया करती थीं। यूनिवर्सिटी, पुस्तकालय और आर्केलॉजिकल साइट्स सुरक्षित थीं। कानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी थी और देश की सेना मजबूत थी।

    लेकिन 40 सालों की भीषण लड़ाई के बाद बदलाव साफ दिखाई देता है। अब परिस्थितियां एकदम विपरीत हैं। अब महिलाएं अपने अधिकारों से वंचित हैं और वे पहले की तरह अब सड़कों पर घूमती नजर नहीं आती। पेग कहती हैं, ‘जब मैं अपने पिता की खींची हुई ये तस्वीरें देखती हूं तो मुझे अफगानिस्तान हजारों साल पुरानी संस्कृति और सभ्यता का पोषित देश नजर आता है। इन फोटो को देखना एक बेहतरीन अनुभव है।’


    स्लाइड्स में देखें विलियम पोडलिक द्वारा ली गईं कुछ रोचक तस्वीरें, जो 1960 के दशक में काबुल की खूबसूरती बयां करती हैं...

  • पेग कहती हैं कि एरिजोना और अफगानिस्तान के कल्चर में काफी अन्तर था, लेकिन उस समय के लोग बहुत ही मिलनसार थे। वह समय आज के अफगानिस्तान से काफी अच्छा था।

  • काबुल जोर्ज जिसे टंग-इ-घारू के नाम से भी जाना जाता है। यह एक हाई-वे है, जो काबुल को जलालाबाद से जोड़ता है।

  • पेग ने वहां के यातायात के बारे में भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि हालांकि सड़कें ऊबड़-खाबड़ थीं, पर सड़क के एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ खाई का नजारा देखते ही बनता था।

  • धूप का चश्मा पहने पेग पोडविच, एक बस में परिवार के साथ टूर पर जाती हुईं। यह बस अफगानिस्तान के काबुल प्रांत से पाकिस्तान के पेशावर प्रांत को जा रही थी।

  • काबुल में राजा के महल पर गार्ड ड्यूटी करते हुए।

  • काबुल के सेह अरब रोड के पास स्थित हायर टीचर्स कॉलेज। यहां पर कॉलेज के टीचर्स को ट्रेनिंग दी जाती है।

  • पेग कहती हैं कि उस समय महिलाओं की स्थिति काफी अच्छी थी। लड़कियां बिना बुर्का पहने स्कूल जाती थीं।

  • काबुल का एक गैस स्टेशन।

  • परवान प्रांत में सैलेंग टनल जो उत्तरी अफगानिस्तान को दक्षिणी अफगानिस्तान से जोड़ता है। इसे सोवियत संघ ने बनाया था।

  • पाघमैन गार्डेन में जेन और पेग पोडलिक। यह 2001 में अमेरिकी सेना के आक्रमण से पहले के युद्ध में नष्ट हो गया।

  • पाघमैन गार्डेन में किंग्स हिल। पोडलिक ने कहा कि इसकी खूबसूरती 1960 के दशक में देखने लायक थी, पर अब तो जैसे यहां की सुनहरी छटा कहीं खो-सी गई है।

  • काबुल में शाह-ए-दो शमशीरा मस्जिद।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: It was 60 years ago Afghanistan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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