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सोने से 40 गुना महंगा है उल्कापिंड

एजेंसी | Feb 19, 2013, 07:45 IST

  • मॉस्को।सेंट्रल रूस में शुक्रवार को गिरे उल्‍का पिंड के टुकड़े (देखें तस्‍वीरें) सोने से भी 40 गुना महंगे हैं। (वीडियो) रूसी वैज्ञानिकों ने सोमवार को घोषणा की है कि उन्हें शुक्रवार को गिरे उल्कापिंड के 50 टुकड़े मिल गए हैं। यह टुकड़े शुक्रवार को रूस की उराल की पहाडिय़ों और चेलियाबिंस्क के आसपास गिरे थे।
    एक यंग रिसर्चर के मुताबिक उल्कापिंड के टुकड़े बहुमूल्य है। इस उल्कापिंड के टुकड़े की कीमत 2200 डॉलर प्रति ग्राम (1.21 लाख रुपए प्रति ग्राम) है जो सोने से करीब 40 गुना अधिक है। रूसी विज्ञान अकादमी के सदस्य विक्टर ग्रोशोस्की ने कहा, हम चेबरकुल झील के पास उल्कापिंड के 50 टुकड़े मिलने की पुष्टि करते हैं।
    अकादमी ने इन टुकड़ों का रासायनिक परीक्षण किया। यह साबित हुआ कि ये बाहरी अंतरिक्ष से आए थे। यह उल्कापिंड रेगुलर कॉन्ड्राइट्स श्रेणी का है। इसमें लौह, क्राइसोलाइट और सल्फाइट के तत्व पाए गए हैं।
    रशियन एकेडमी ऑफ साइंस की टीम ने यह टुकड़े एकत्रित किए हैं। जिनका येकेटेरिंगबर्ग स्थित यूरल्स फेडरल यूनिवर्सिटी की लेबोरेट्री में परीक्षण चल रहा है। इसमें 10 फीसदी तक आयरन मिला है।


  • रूस में शुक्रवार को उल्कापिंड की बारिश से करीब 500 किलोटन ऊर्जा निकली थी। यह 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से करीब 30 गुना अधिक थी। रूस की राजधानी मॉस्को से पूर्व की ओर करीब 15 सौ किलोमीटर दूर हुई इस घटना में चार हजार से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। लगभग 12 सौ लोग घायल हुए थे।
    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मार्शल स्पेस फ्लाइट सेंटर के अधिकारी बिल कुक के मुताबिक उल्का पिंड 30 परमाणु बमों के बराबर था। रूस के आसमान के ऊपर 55 फुट चौड़ा और 10 हजार टन वजनी यह पिंड पृथ्वी से वातावरण में घुसते ही छिन्न-भिन्न हो गया था। इसके हजारों टुकड़े इधर-उधर बिखर गए। सबसे अधिक तबाही रूस के चेलियाबिंस्क शहर में हुई है। उल्का पिंड का एक बड़ा टुकड़ा जोर के धमाके के साथ शहर की चेबरकुल झील में गिरा था।
    कुक ने बताया कि उल्कापिंड के टकराने इससे पैदा हुई ऊर्जा द्वितीय विश्वयुद्ध में इस्तेमाल सभी हथियारों की ऊर्जा से अधिक थी। कुक के मुताबिक इतने बड़े आकार का उल्कापिंड 100 साल में एक बार गिरता है। दुनिया के पांच इन्फ्रारेड स्टेशन से मिले आंकड़ों से पता चला है कि उल्कापिंड के गिरने की रफ्तार 6,43,734 किमी प्रति घंटे थी।

  • क्या होता है उल्कापिंड
    अंतरिक्ष में गृहों और उप गृहों के बीच पत्थर और धातु के छोटे-बड़े पिंड घूमते रहते हैं। ये अपना रास्ता बदलकर जब पृथ्वी के वायुमंडल में आते हैं, तो वायुमंडल की विभिन्न परतों के घर्षण से नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कई बड़े पिंड पृथ्वी तक आ पहुंचते हैं, जिन्हें उल्कापिंड कहते हैं। सामान्य बोलचाल में इसे तारा टूटना भी कहा जाता है।
  • क्या था जो रूस पर गिरा
    नासा ने बताया कि रूस पर फटा चट्टान छोटा क्षुद्रग्रह था, उसका आकार 49 फुट था जो करीब दो छोटी कारों के आकार के बराबर है। वह 18 किमी प्रतिसैकंड की गति से आया था। उसका वजन 7000 टन था। पृथ्वी के वातावरण में आने से उसमें लगी आग 30 सैकंड तक दिखी। उसके साथ ही वह टुकड़े टुकड़े होकर बिखर गया। यह 1908 में साइबेरिया में गिरे उल्कापिंड के बाद सबसे बड़ा था। रूसी सांसद व्लादिमीर झिरिनोस्की ने कहा, ‘रूस पर आसमान से उल्कापिंड के टुकड़े नहीं गिरे, बल्कि प्रकाश की चमक और झटके अमेरिकी हथियार परीक्षणों के परिणाम थे।’
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Meteor shower over Russia sees meteorites hit Earth
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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