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चीन के 10 फैसलों ने फेर दिया अमेरिका की 200 साल की मेहनत पर पानी

dainikbhaskar.com | Jan 07, 2013, 01:00 IST

  • चीन में सत्ता परिवर्तन का दौर पूरा हो चुका है। जल्दी ही देश की कमान नई पीढ़ी के हाथ में होगी। चीन में यह बदलाव राजनीतिक है, लेकिन वहां आर्थिक से लेकर वैचारिक बदलावों की शुरुआत तो काफी अरसा पहले ही हो चुकी थी। चीन में सत्ता परिवर्तन का दौर पूरा हो चुका है। जल्दी ही देश की कमान नई पीढ़ी के हाथ में होगी। चीन में यह बदलाव राजनीतिक है, लेकिन वहां आर्थिक से लेकर वैचारिक बदलावों की शुरुआत तो काफी अरसा पहले ही हो चुकी थी।
    आज से लगभग पांच दशक पहले चीन के वूडेन क्लॉथ हैंगर, चाइना टी सेट, हॉट वाटर बॉटल्स आदि कुछ देशों में बिकते थे। भारत में चीनी पेन की बहुत डिमांड हुआ करती थी, लेकिन यह चीन की शुरुआत भर थी। आज भारत सहित अनेक देशों के बाजार ‘मेड इन चाइना’ सामग्री से अटे पड़े हैं।
    जानकार मानते हैं कि अमेरिका जैसे देश को विकास की जिस गति पर आने में 200 साल लग गए, चीन ने उस गति को 20 साल में ही प्राप्त कर लिया। इस तरह चीन जहां अपने आप में मिसाल है तो कई मायनों में यह दुनिया को डरा भी रहा है।
    dainikbhaskar.com आपने पाठकों को बता रहा है, कैसे पूरी दुनिया को अपने इशारे पर नचा रहा है चीन|
  • ऐसे बदलता और बढ़ता गया चीन
    विकास दर में सबसे आगे
    चीनी अर्थव्यवस्था काफी आगे निकल चुकी है। जानकारों का मानना है कि विकास दर घट कर 7 फीसदी रहने के बावजूद वह 2018 तक अमेरिका को पछाड़ देगा। अफ्रीका में चीनी उत्पाद और निवेश का बढ़ना भी नए प्रकार का उपनिवेशवाद हैं। चीन दुनिया का केंद्र बनना चाहता है।
  • अंतरिक्ष में उड़ान
    चांद पर कदम रखने की तैयारी कर चीन ने स्पेस साइंस में खुद को अमेरिका जैसे देशों के बराबर खड़ा कर दिया है। चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम बहुत ही महत्वाकांक्षी हैं, जो पूरी दुनिया के लिए एक नई बात है। यानी अमेरिका को चीन जल्द ही इस क्षेत्र में चुनौती देता नजर आएगा। 
  • अब सीख रहे हैं अंग्रेजी
    चीनी भाषा का भी काफी विस्तार हुआ है। चीन की बोली मैंडेरियन आज अमेरिका-यूरोप में पकड़ बना चुकी है। चीन में इंग्लिश लर्निग का भी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार पूरे देश में इस समय सरकारी स्तर पर सात हजार से भी अधिक सेंटर अंग्रेजी भाषा सिखा रहे हैं।
  • सरल की वीजा प्रक्रिया
    1995 तक चीन से बाहर जाने के लिए छह महीने लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 2011 में 7 करोड़ से ज्यादा चीनियों ने विदेश यात्रा की। जर्मनी और अमेरिका के बाद चीन पर्यटन पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला देश बन गया है। चीन की विदेशों में पकड़ बढ़ी है।
  • अमीरों की संख्या बढ़ी
    पिछले कुछ दशकों में चीनी बिजनेस मैन्स का दुनिया में दखल बढ़ा है, जिससे उनके बिजनेस में जबरदस्त तरक्की हुई है। आज चीन में दस लाख ऐसे लोग हैं, जो डॉलरों में लखपति हैं। 35 साल पहले ही यहां के नेता डेंग जियाओपिंग ने नारा दिया था कि ‘धनी होना यानी आनंददायक होना है।’
  • दूसरों को बनाया निर्भर
    चीन में सस्ती मजदूरी के कारण यूरोप पहले ही पूरी तरह चीन पर निर्भर है। दूसरी तरफ पिछले कई सालों से अफ्रीका में निवेश करते हुए चीन अब वहां सबसे बड़ा निवेशक बन चुका है। दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक चेन वॉलमार्ट आधा माल चीन से खरीदता है।
  • एक्सपोर्ट लगातार बढ़ा
    चीन ने 1970 के दशक में एक्सपोर्ट पर जोर दिया। उसने उद्योगों को जबरदस्त सब्सिडी देना शुरू किया। फाइनेंस उपलब्ध कराया और मुनाफे की गारंटी दी। आज चीन द्वारा एक्सपोर्ट किए जाने वाले उत्पाद और सेवाएं उसकी जीडीपी में 39.7 फीसदी हिस्सेदारी रखती हैं।
  • माओ जेडांग
    माओ जेडांग की गिनती 20वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में होती है। चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी और रेड आर्मी की स्थापना का श्रेय इन्हें ही जाता है। माओ ने कई ऐसे राजनीतिक कदम उठाए, जिनसे चीन की तस्वीर बदली है। भूमि सुधार, खेती का समूहीकरण और देश में चिकित्सा सेवा का विस्तार माओ की ही देन है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए माओ को हमेशा याद रखा जाएगा।
  • डेंग जियाओपिंग
    चीन के मशहूर नेता और रिफॉर्मिस्ट डेंग जियाओपिंग का चीन के विकास में अहम योगदान है। 1976 में माओ के निधन के बाद चीन में उदारवाद और आर्थिक सुधार का श्रेय इन्हें ही जाता है। चीन को आधुनिक, शक्तिशाली और धनी बनाना उनका मुख्य उद्देश्य था। टाइम मैगजीन द्वारा दो बार ‘मैन ऑफ द ईयर’ चुने गए डेंग ने देश में विदेशी निवेश को बढ़ाया और अन्य देशों से अच्छे संबंध स्थापित किए।
  • 10 फीसदी औसतन रही है चीन की अर्थव्यवस्था की विकास दर पिछले 30 सालों में। चीन इस समय दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर और दूसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है।

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Web Title: South-east Asia, China and India
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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