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PICS: अपनी मेहनत के दम पर इजरायल बना, दुनिया का सबसे खतरनाक मुल्क

dainikbhaskar.com | Jan 24, 2013, 00:00 IST

  • इजरायल के तेवरों के कारण कई लोग हद से भी ज्यादा नफरत करते हैं। इसी के चलते ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने हाल ही में इजरायल को खत्म करने का संकल्प लिया है। लेकिन संघर्ष और राजनीति से परे भी बहुत कुछ है इजरायल

    इजरायल की चर्चा होते ही एक ऐसे देश का चेहरा सामने आता है, जो कभी अपने परमाणु कार्यक्रम तो कभी अरब देशों के साथ अपने संबंधों के चलते गलत कारणों से चर्चा में रहा है, लेकिन इससे एक अलग इजरायल भी है, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और विकास के मॉडल की वजह से दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार है।

    कृषि से लेकर तकनीक और धर्म से लेकर फैशन तक के क्षेत्र में इजरायल दूसरे देशों के लिए एक मिसाल है। खासकर इसलिए भी कि तमाम आंतरिक समस्याओं और अंतरराष्ट्रीय दबावों के बावजूद इस देश में विकास की प्रक्रिया लगातार जोर पकड़ती रही है।

    इजरायल में दो दिन पहले वोटिंग हुई है और dainikbhaskar.comअपने पाठकों को बता रहा है कि कैसे देश ने तरक्की के मुकाम हासिल किए|

  • पानी की समस्या, फिर भी खाद्यान्न में आत्मनिर्भर

    इजरायल की भौगोलिक संरचना और मिट्टी कृषि के अनुकूल नहीं है, इसके बावजूद वह कृषि उत्पादकता एवं कृषि तकनीक के मामले में दुनिया का अग्रणी राष्ट्र है। देश का आधे से ज्यादा हिस्सा रेगिस्तान है, केवल 20 प्रतिशत हिस्सा ही प्राकृतिक रूप से कृषि योग्य है। पूरे देश में पानी की समस्या बनी रहती है। देश के कुल प्रोडक्टिव वर्कफोर्स में से 3.5 प्रतिशत हिस्सा ही कृषि कार्य में लगा है। इसके बावजूद वह अपनी खाद्य जरूरतों का 95 प्रतिशत हिस्सा खुद ही पैदा करता है।

  • आर्थिक मंदी में भी विकास दर रही पॉजिटिव

    वर्ष 2010 के आंकड़ों के मुताबिक इजरायल देश की 24वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। खुली अर्थव्यवस्था पर आधारित इजरायल दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तो इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक आजादी एवं भ्रष्टाचार मुक्त माहौल है। पूरी दुनिया में इकोनॉमिक फ्रीडम का औसत आंकड़ा जहां 59.7 है, वहीं इजरायल के मामले में यह 68.5 है। 2000 के दशक के अंत में पूरी दुनिया जब आर्थिक मंदी से गुजर रही थी, तब इजरायल की जीडीपी ग्रोथ रेट पॉजिटिव बनी रही। यही कारण है कि आर्थिक मुश्किलों के बीच इजरायल की अर्थव्यवस्था को सबसे टिकाऊ माना जाता है।

  • सिलिकॉन वैली की तर्ज पर

    हाईटेक उद्योगों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण इजरायल में भी कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली की तर्ज पर सिलिकॉन वादी का विकास हुआ है। यूं तो पूरे देश में ही औद्योगिक इकाइयां तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन तेल अबीब के अलावा रानाना, पेटाह टिकवा एवं हाइफा शहरों के आसपास हाईटेक उद्योगों की भरमार है। इसके साथ-साथ वेंचर कैपिटल इंडस्ट्री की मजबूती ने देश को औद्योगिक विकास के वैश्विक नक्शे पर शीर्ष कतार में खड़ा कर दिया है।

  • रूस के यहूदियों से बढ़ी विकास की रफ़्तार

    1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ के विघटन के बाद वहां से यहूदियों का आप्रवासन शुरू हुआ। इसमें करीब दस लाख लोग इजरायल के नागरिक बने, जिनमें अधिकतर उच्च शिक्षा प्राप्त तथा सोवियत संघ की विकास प्रक्रिया से अच्छी तरह वाकिफ थे। देश की मौजूदा आबादी में इनकी हिस्सेदारी अब करीब 16 प्रतिशत है और वे पूरे देश में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों वाले पदों पर हैं।

  • ऊर्जा और पानी की कमी के मद्देनजर सरकार ने सौर ऊर्जा और वाटर कंजर्वेशन को प्रोत्साहित किया। विलुप्त हो चुकी अपनी भाषा हिब्रू को संरक्षित कर आत्मगौरव जगाया।

  • 1950 के दशक में जब इजरायल ऊर्जा संसाधनों की कमी से परेशान था तो लेवी यिसार ने सोलर वाटर हीटर बनाया। यह इतना सफल रहा कि 1967 के आते-आते करीब दस प्रतिशत घरों में इसका इस्तेमाल होने लगा था। इसके बाद 1970 के दशक में जब देश तेल संकट से जूझ रहा था, तब हारी ताबोर ने एक प्रोटोटाइप सोलर वाटर हीटर बनाया और आज 90 प्रतिशत घरों में इसका इस्तेमाल हो रहा है। (फोटो में इजराइली संसद का दृश्य)

  • पानी का सही इस्तेमाल

    देश में बारिश केवल ठंड के मौसम में ही होती है और वह भी अधिकतर उत्तरी इलाकों में। पानी के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए इन क्षेत्रों से पानी को देश के दूसरे इलाकों में पहुंचाने के लिए विशालकाय प्रोजेक्ट्स लगाए गए हैं। ऐसा ही वर्ष 1964 में पूरा हुआ नेशनल वाटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। इजरायल ने ऐसी स्वदेशी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे समुद्र के खारे पानी को घरों में इस्तेमाल करने लायक बनाया जाता है। वहां किसानों के लिए भी पानी का एक फिक्स कोटा तय किया गया है। (फोटो में इजराइली विदेश मंत्रालय)

  • भाषा का संरक्षण

    अपनी भाषा को बचाने का इजरायल का उदाहरण दुनिया का दुर्लभतम उदाहरण है। लगभग लुप्तप्राय: हो चुकी हिब्रू भाषा को पुनर्जीवित करने का प्रयास आधुनिक इजरायल देश के गठन से कुछ अरसा पहले ही हो चुका था। इसमें ऐलिजर बेन येहूदा का योगदान सबसे अहम है, जिन्होंने कई दशकों तक हिब्रू पर काम करके उसे यहूदियों में लोकप्रिय बनाया। आज इजरायल की 80 लाख की आबादी में से 75 फीसदी लोग हिब्रू भाषा का ही उपयोग करते हैं। इसके साथ-साथ सरकार दूसरी भाषाओं के विकास के लिए भी उतना ही प्रयास करती है। यही कारण है कि हिब्रू के अलावा अरबी को भी देश में राजकीय भाषा का दर्जा हासिल है। (फोटो में तेल अबीब का शानदार दृश्य)

  • 1952 में वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन को इजरायल का राष्ट्रपति बनाने की पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। एक यहूदी राष्ट्र की अवधारणा को लेकर वे आश्वस्त नहीं थे। आइंस्टाइन कभी इजरायल में नहीं रहे, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यहूदी उन्हें अपने हीरो की तरह मानते थे। उन्होंने येरूशलम के हिब्रू यूनिवर्सिटी के गठन में भी अहम भूमिका निभाई थी।

  • 32वें स्थान पर था इजरायल 2009 में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में।

    24 प्रतिशत आबादी (कुल प्रोडक्टिव वर्कफोर्स) के पास यूनिवर्सिटी की डिग्री है।

    26 फीसदी उत्पादन बढ़ गया कृषि का 1999 से 2009 के बीच।

    22 गुना बढ़ गया सात साल में देश का सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट।

    17वें स्थान पर था 2010 के ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में।

  • थेडोर हेर्ज जिन्होंने पहली बार यहूदी देश बनाने का सपना देखा था|

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: The most dangerous country in the world
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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