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दिल्ली, बिहार के बाद धनबाद में कर रहे मरीजों की सेवा

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:15 AM IST

दिल्ली, बिहार के बाद धनबाद में कर रहे मरीजों की सेवा
डॉ सनोज बताते हैं कि यूएस से लौटने के बाद तीन वर्ष तक एम्स दिल्ली में सेवा देने के बाद दिल्ली के ही एक अन्य अस्पताल में और दो वर्ष तक मरीजों की सेवा करने के बाद खुद का हार्ट सेंटर स्थापित किया। दिल्ली के बाद बिहार में मल्टीस्पेशलिस्ट एंड हार्ट सेंटर और फिर धनबाद में हार्ट सेंटर शुरू किया। भविष्य में यहां हार्ट स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू करने की योजना है। कहते हैं इतने बड़े शहर में हृदय रोगियों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। धनबाद में पले-बढ़े होने के कारण यहां से काफी लगाव है और उद्देश्य है कि हृदय रोगों के इलाज के लिए धनबाद के लोगों को यहीं सुविधा उपलब्ध करा पाएं। ताकि इलाज के लिए मरीजों को राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े।

चिकित्सकीय पेशा और मरीजों के इलाज में व्यस्तता के बावजूद डॉ सनोज सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाते हैं। उनके अनुसार वर्तमान में चिकित्सक केवल मरीजों के इलाज से सरोकार रखते हैं लेकिन वह मरीजों का इलाज करने के साथ जागरूक भी करते हैं। गरीब मरीजों को इलाज में जरूरत के अनुसार छूट भी देते हैं। इनका कहना है कि लोग इलाज कहीं भी कराएं डॉक्टरों से बीमारी के कारण जरुर पूछें, यह मरीजों का अधिकार भी है। मरीज काे पता होना चाहिए कि उनके तकलीफ का कारण क्या है।

डॉ सनोज कहते हैं कि उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी संघर्षमय रहा है। वह लोग मूलत: बिहार के रहने वाले हैं। खराब माली हालत के कारण पिता के साथ 1990 में धनबाद आए। लंबे समय तक रेलवे स्टेशन अन्य स्थानों पर वक्त गुजारा। उन दिनों पिता ने परिवार के लिए कड़ा संघर्ष किया। बताया कि उन्होंने हायर सेकेंडरी तक की शिक्षा आईएसएल स्कूल से की। 12 वीं संत जेवियर कॉलेज रांची से पास आउट होने के बाद यूएस स्कॉलरशिप के लिए क्वालिफाई किया। कहते हैं कि पिता का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं इसके साथ ही सेवा भावना के कारण खुद भी इस प्रोफेशन को पसंद किया। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए भरपूर प्रयास किया और सफल रहे। बताते हैं कि यूएस से मेडिकल की डिग्री प्राप्त की। मेडिसिन डिपार्टमेंट में लाइफस्टाइल एंड हार्ट केयर मैनेजमेंट में विशेषज्ञता हासिल की।

अब बिना चीर-फाड़ के हो सकेगा हृदय रोगों का अचूक इलाज : डॉ. सनोज राज

धनबाद . हृदयरोगों का इलाज बगैर सर्जरी यानी बिना किसी चीर फाड़ किए। इस पद्धति से 60 फीसदी रोगियों का इलाज भी सफल होता है। ऐसे रोगियों को इलाज के बाद कोई परेशानी नहीं होती। मरीज की दिनचर्या पर भी किसी तरह का प्रभाव नहीं होता। बगैर चीर-फाड़ के हर्ट रोगियों के इलाज में उम्र भी किसी प्रकार की बाधा नहीं बनती। यह दावा है डॉ सनोज राज का। बताते हैं कि किसी भी रोग की सही पहचान के बाद बेहतर उपचार ज्यादा जरूरी है। यही कारण है कि हम सबसे पहले बीमारी के कारणों का पता लगाते हैं फिर इलाज शुरू किया जाता है। बगैर सर्जरी हर्ट का इलाज आर्थिक दृष्टिकोण से भी काफी किफायती है।

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Web Title: दिल्ली, बिहार के बाद धनबाद में कर रहे मरीजों की सेवा
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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