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उग्रवादियों का साथ देना छोड़ें जनप्रतिनिधि

Bhaskar News Network | Oct 19, 2016, 02:35 AM IST

उग्रवादियों का साथ देना छोड़ें जनप्रतिनिधि
डीजीपी ने हाथ उठाकर जनप्रतिनिधियों से संकल्प कराया कि वे उग्रवाद खत्म करेंगे

भास्करन्यूज|बानो/सिमडेगा

बानोथाना परिसर में पीएलएफआई के सबजोनल कमांडर रामू गंझू के आत्मसमर्पण कार्यक्रम में डीजीपी डीके पांडेय ने कहा कि जनप्रतिनिधि उग्रवादियों को साथ देना छोड़ दें। यह कानूनन जुर्म है। परिवर्तन जनप्रतिनिधियों को करना है। पुलिस उनके साथ है। अगर उनके संपर्क में उग्रवादी आएं तो उन्हें समझाएं की वे समाज की मुख्यधारा में लौट आएं। इस मौके पर उन्होंने हाथ उठाकर जनप्रतिनिधियों से संकल्प कराया कि वे उग्रवाद खत्म करेंगे।

उन्होंने कहा कि परिवर्तन जनप्रतिनिधियों को करना है पुलिस उनके साथ है। झारखंड को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने तथा विकास की राह पर ले जाने के लिए उग्रवाद का खात्मा जरूरी है। इसमें सबकी भागीदारी जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन एसडीपीओ अमित कुमार सिंह ने किया।

आयोजन में एएसपी सरोज कुमार, सिमडेगा इंस्पेक्टर सरोज श्रीवास्तव, बानो इंस्पेक्टर रविशंकर सिंह, बानो थाना प्रभारी विद्यापति सिंह,ओड़गा ओपी प्रभारी रणविजय शर्मा, कोलेबिरा थाना प्रभारी मनोहर कुमार, पाकरटांड़ थाना प्रभारी रवींद्र कुमार, एएचटीयू थाना प्रभारी राजेकुमारी कुजूर सहित कई पुलिस पदाधिकारी मौजूद थे।

2004 में छोटा मोटा ठेकेदार था रामू

रामूगंझू के सरेंडर के दौरान पुलिस द्वारा बताए गए उसके आपराधिक इतिहास के अनुसार 2004 में रामू गंझू छोटी-मोटी ठेकेदारी करता था। उस दौरान इलाके में सक्रिय जेएलटी नामक उग्रवादी संगठन के गुज्जू गोप और हीरा सिंह लगातार उसके घर में आते थे। रामू के बयान के अनुसार जेएलटी के लोग यह बोलते थे कि वे माओवादी को खत्म करने के लिए संगठन बनाए हैं। इधर जेएलटी से संबंध होने के कारण रामू गंझू माओवादियों के निशाने पर गया और वर्ष 2010 में वह पीएलएफआई में शामिल होकर गुज्जू गोप के दस्ते का सदस्य बन गया। 2011 में पीएलएफआई ने उसेे एरिया कमांडर तथा 2014 में सबजोनल कमांडर बनाया था।

बच्चों को हथियार नहीं, कलम पकड़ाने की जरूरत : पौलुस सुरीन

तोरपाविधायक पौलुस सुरीन ने कहा कि बच्चों को हथियार नहीं, कलम पकड़ाने की जरूरत है। नक्सलियों को सम्मानपूर्वक मुख्यधारा में लाया जा रहा है, यह सुखद है। इस मौके पर विधायक ने उग्रवादियों से पूछा कि उन्होंने समाज को क्या दिया है। लोगों को कैसी खुशी दी है।

तीनथाना क्षेत्रों में दर्ज हैं मामले

सरेंडरकरने वाले नक्सली राचंद्र सिंह उर्फ रामू गंझू के खिलाफ सिमडेगा जिले के तीन थाना क्षेत्रों में कुल 13 मामले दर्ज हैं। जलडेगा थाना में दर्ज हत्या के एक, बानो थाना में दर्ज कुल सात और कोलेबिरा थाना में 5 मामले दर्ज हैं।

पुलिस, पब्लिक, नेता प्रेस को एक प्लेटफार्म पर आने की जरूरत : एसपी

स्वागतभाषण में एसपी राजीव रंजन ने कहा कि उग्रवाद से सिर्फ पुलिस लड़ रही है। बाकी सभी एजेंसियां मौन हैं। लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन कर रहे हैं, लेकिन हमें यह सोचने की जरूरत है कि इतने वर्षों में हमने क्या खोया है और क्या पाया। नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए पुलिस, पब्लिक, पॉलटिसियन और प्रेस को एक प्लेटफार्म पर आने की जरूरत है। डीजीपी की मौजूदगी में हार्डकोर सबजोनल कमांडर के सरेंडर से एक संदेश जाएगा कि अब नक्सलवाद का खेल खत्म हो रहा है।

झारखंड की सरेंडर पॉलिसी सबसे बेहतर : डीसी

डीसीविजय कुमार सिंह ने कहा कि उग्रवादी गरीबों के विकास में बाधा बन रहे हैं। पूरे भारत में सबसे अच्छी सरेंडर पॉलिसी झारखंड की है। गलत राह पर चले गए लोगों के लिए अभी सुनहरा समय है। उन्होंने नक्सलियों की मां से अपील की। जमशेदपुर के निकट स्थित बोड़ांम प्रखंड में जनता की एकजूटता से नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो जाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अब बानोवासियों को भी बोड़ाम के लोगों के जैसा बनना है। इसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका अहम होगी।

बंदूक के साथ आत्मसमर्पण करता पीएलएफआई का जोनल कमांडर रामू गंझू।

हथियार के साथ सरेंडर करने के बाद रामचंद्र सिंह उर्फ रामू गंझू ने मंच से दिनेश गोप, गुज्जू गोप सहित अपने सभी साथियों से मुख्यधारा में लौट आने की अपील की। कहा, आज अपनी गलतियों का पश्चाताप करने का मौका मिला है। नक्सलवाद का रास्ता ठीक नहीं है। आत्मसमर्पण के बाद वह काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। उसके सरेंडर के दौरान उसकी मां कुसमी देवी, प|ी मिशन देवी, जयंती देवी सहित कई परिजन मौजूद थे।

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Web Title: उग्रवादियों का साथ देना छोड़ें जनप्रतिनिधि
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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