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PICS : दो बीवियां, 3 से ज्यादा नाम, काम सुनकर तो सन्न रह जाएंगे आप!

Pankaj Saw | Jan 08, 2013, 00:00 IST

  • रांची। संजीवनी का एलान, बिहार झारखंड में हो सबका मकान! साल 2005 में अचानक उभरे इस एक स्लोगन ने करीब सैकड़ों लोगों के सपनों को ऐसे लील लिया जैसे किसी जश्न मनाते शहर को सुनामी। जो जाती हुई जिंदगी लौटा दे, उसे संजीवनी कहा गया है, इस संजीवनी ने एक अदद छत का सपना संजोए करीब 500 भोले-भाले लोगों की उम्मीदों का गला ही घोंट दिया। गत 2 जनवरी को मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने धोखाधड़ी के इस चर्चित मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपने का निर्देश जारी कर दिया। यह मामला इतना हाईप्रोफाईल था, इसमें इतना बड़ा रैकेट काम कर रहा था कि उसके बारे में जानने पर एकबारगी विश्वास कर पाना मुश्किल होगा।

    इस काले कारनामे कैसे दिया गया अंजाम, पूरे मामले की तह में जाने के लिए आगे की स्लाइड्स पर क्लिक करें।

  • संजीवनी बिल्डकॉन के बिल्डरों पर करीब 500 लोगों से जमीन और घर दिलाने के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने का आरोप है। इस पूरे मामले का सूत्रधार है एक ही आदमी जो जयंत दयाल नंदी, जॉय सुमित नंदी (असली नाम) और सत्यव्रत नंदी आदि कई नामों से जाना जाता है। उसकी दो बीवियां हैं-अनीता नंदी और अनामिका नंदी। झारंखंड के ही हजारीबाग के हरनगंज मुहल्ले का यह शख्स अपने पुश्तैनी मकान की मरम्मत न करा सका लेकिन सुंदर आशियाने का सब्जबाग दिखाकर सैकड़ों लोगों से रुपये जरूर ऐंठ लिए। करीब 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी। पोल खुलने के बाद हद तो तब हो गई थी जब उसने गिरफ्तारी के डर से खुद को मृत घोषित करवा दिया था। उस समय हजारीबाग सदर के डीएसपी नौशाद आलम थे।

    (फोटो- पत्नी अनामिका नंदी)

  • ऐसे दिखाए सपने

    सन् 2005 में कुछ ऐसा ही कारनामा कर नंदी झारखंड भाग आया। यहां आकर उसने संजीवनी बिल्डकॉन नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई। खुद कंपनी का निदेशक बना दोनों बीवियां अनिता और अनामिका बन गईं को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्य।

    रांची में उसने ऐश्वर्य सिटी, डायना सिटी-2, फ्यूचर सिटी समेत 18 रेसीडेंसियल प्रोजेक्ट्स में सस्ती दरों पर फ्लैट दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों को चूना लगाया। फिल्मी सितारों और गायकों को बुलाकर बड़े-बड़े कार्यक्रम करवाता था जिसमें राज्‍य के नेता और अफसर शामिल होते थे। उसके रसूख का कमाल था कि मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के उसकी गिरफ्तारी के आदेश देने के बावजूद भी पुलिस ने उसे कई महीनों तक गिरफ्तार नहीं किया। ठगी के बाद ने बड़ी तेजी से कंपनी के रांची स्थित एक्सिस बैंक के अपने खाते से सारे पैसे निकाल लिए थे।

    (फोटो- पत्नी अनीता नंदी)

  • जब खुलनी शुरू हुई पोल

    जब उसके काले कारनामों की पोल खुलनी शुरू हुई तो उसके खिलाफ कई आरोप अलग-अलग थानों में दर्ज होने लगे। पहली एफआईआर लोर बाजार थाने में दर्ज कराई गई। इसमें संजीवनी के एमडी जयंत दयाल नंदी और बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स श्याम किशोर गुप्ता, जयंत की पत्नी अनामिका नंदी व अनीता नंदी सहित 35 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। इसी आधार पर राजधानी और ग्रामीण इलाकों में संजीवनी के खिलाफ धोखाधड़ी के कुल 33 मामले दर्ज किये गये।

    हेर फेर का गणित

    नंदी अपने हेरफेर के काम में कुछ ऐसे तरीके अपनाता था कि लोगों को समझने में देर लग जाती थी। जैसे - एक ही जमीन की रजिस्ट्री कई लोगों के नाम करा देना, जमीन के गलत कागज बनाकर पैसे ऐंठ लेना, जमीन पर जबरन कब्जा करना, बिना पैसे दिए जमीन खरीद लेना, फर्जी डीड का सहारा लेना, फ्लैट के लिए पैसे लेकर नहीं देना और फर्जी साइट दिखा कर लोगों से पैसे वसूलना जैसे गंभीर अपराध वह चुटकियों में कर लेता था।

  • क्या मिला था अनुसंधान में

    अनुसंधान के दौरान पुलिस बिल्डरों की संपत्ति तक जब्त कर चुकी है। जांच में बिल्डरों पर धोखाधड़ी के आरोप स्थापित हो चुके हैं। यह बात भी सामने आयी कि बिल्डर को कई अधिकारियों का संरक्षण व सहयोग प्राप्त था।

    एसआइटी का हुआ था गठन

    मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए विशेष अनुसंधान दस्ता (एसआइटी) का गठन किया था। इसके निर्देश पर पुलिस जांच करने लगी। लेकिन जांच के दौरान पुलिस एसआइटी के निर्देश का भी पालन नहीं कर पायी। जयंत दयाल नंदी, श्याम किशोर गुप्ता और पीपी लाला को नहीं तलाश पायी।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: cm directed CBI probe to sanjeevani buildcon fraud case
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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