Home »Jharkhand »Ranchi »News» In Pics : Ichak, The Temple Town Of Jharkhand

महारानी को लग न जाए किसी की नजर, इसीलिए बनी थी यह 15 किमी की सुरंग

Pankaj Saw | Dec 17, 2012, 00:01 IST

  • रांची। हिन्दुस्तान में राजा-रानियों के किस्से आज भी घर-घर में सुने जाते हैं। आज के जमाने में भले ही किस्सों की कुछ बातें अव्यवहारिक लगती हों, पर कई बार उन किस्सों से जुड़े अवशेष असलियत बयां करने के लिए सामने आ जाते हैं। इस तस्वीर में जिस सुरंग का बंद दरवाजा दिखाई दे रहा है, वह सुरंग करीब 15 किलोमीटर लंबी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस सुरंग का इस्तेमाल सिर्फ एक बार वहां की महारानी ने पूजा के लिए मंदिर आने में किया। फिर इसे बंद कर दिया गया।

    आज हम आपको एक ऐसे ही सबूतों के एक गांव में लिए चलते हैं, जिसके बारे में जानकर आप भी मौजूदा हकीकत को भूलकर अतीत के अफसानों में खो जाएंगे।

  • झारखंड के हजारीबाग जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर पूर्व दिशा में स्थित एक गांव है इचाक। समय की मार खाते-खाते पहले कस्बा और फिर गांव का रूप ले चुका इचाक कभी एक व्यवस्थित शहर हुआ करता था, जिसे सिंह राजाओं ने बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से पल्लवित पुष्पित कर अपनी राजधानी बनाया था। इस गांव में सिंह राजाओं द्वारा निर्मित अनगिनत मंदिरों के अवशेष आज भी उनके सामाजिक और सांस्कृतिक वैभव की कहानी कहते हैं। इचाक को आज भी झारखंड में मंदिरों का शहर (The Temple Town of Jharkhand) कहा जाता है।

  • स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय इस जगह करीब 174 मंदिर थे लेकिन अब कुछ ही बचे हैं वह भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। बाकी मंदिर उपेक्षा के शिकार हो गए। कई मंदिरों में तो कोई मूर्ति ही नहीं है, वे संभवतः चोरी कर ली गई हैं और विदेशी बाजारों में बेची जा चुकी हैं। ये मंदिर आज भी अपने अच्छे दिनों की शानो-शौकत आज भी बयां कर रहे हैं।

  • इन्हीं मंदिरों में से एक है सूर्य मंदिर। इस सूर्य मंदिर के बगल से एक सुरंग गई है, जो वहां से 15 किलोमीटर दूर स्थित राजमहल में निकलती है। अब यह सुरंग बंद हो चुकी है। कहा जाता है कि कहा जाता है कि महारानी को एक बार यहां पूजा के लिए आने और वापस महल जाने के लिए इसका उपयोग हुआ था। चित्र में तीर का निशान बनी हुई जगह पर इसका प्रवेश द्वार है।

  • सिंह जब रामगढ़ से चले तो उन्होंने पद्मा( जो इचाक से उत्तर की ओर कुछ किलोमीटर की दूरी पर है) को अपनी राजधानी बनाने से पहले अपनी राजधानी बनायी थी। उनके विशाल महल का द्वार आज भी यहां के मुख्य बाजार में देखा जा सकता है। विशाल गुंबद वाला यह विशाल द्वार की शान और ऐश्वर्य का अंदाजा इसके विशाल खंडहर को देखकर सहज ही लगाया जा सकता है।

  • सिंह राजाओं द्वारा बनाए गए ये मंदिर 18वीं शाताब्दी के माने जाते हैं। मंदिर निर्माण की शैली से यह इस क्षेत्र में इनका अप्रतिम योगदान सहज ही समझा जा सकता है। मंदिरों का स्थापत्य शैली नागर और बंगाल शैलियों से मेल खाती है। मस्जिदों की तरह के गुंबद उन पर मुगल स्थापत्य कला के प्रभाव प्रदर्शित करते हैं।

  • यहां दो अखाड़े भी हुआ करते थे-बड़ा अखाड़ा और छोटा अखाड़ा। कभी ये अखाड़े इस शहर की शान हुआ करते थे, आज बदहाली के आंसू रो रहे हैं।

  • महल की ओर जाने वाले रास्ते में विशाल गुंबद वाला द्वार (एक छत से ली गई तस्वीर)।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: In pics : Ichak, the temple town of jharkhand
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From News

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top