Home »Jharkhand »Ranchi »News» PHOTOS: Ravana Had Beencheated Here, Bholenath Sti

PICS : यहां रावण भी खा गया था धोखा, फेल मिशन के गवाह हैं भोलेनाथ

Pankaj Saw | Dec 05, 2012, 00:04 IST

  • ravan_575रांची।देवी-देवताओं और मानवों के साथ राक्षसों के द्वारा छल-कपट की बात तो खूब सुनी होगी आपने। पर ऐसे उदाहरण बहुत कम हैं जब किसी राक्षस से साथ भगवान ने छल की हो। बात तो वाकई विचित्र है कि भगवान किसी राक्षस के साथ छल क्यों करें, सच्चाई यह है कि ऐसा हुआ है। और तो और यह छल किसी और के साथ नहीं बल्कि ब्राह्मण कुल में उत्पन्न होकर राक्षसों के राजा बने लंकाधिपति रावण के साथ हुआ था। इस पौराणिक का प्रसंग का प्रमाण है एक ज्योतिर्लिंग जो आज भी झारखंड प्रांत के देवघर में स्थापित है।

    आइए हम तस्वीरों के साथ पेश कर रहे हैं, राक्षसराज के साथ भगवान विष्णु के छल की दास्तान...

    Related Articles:
    PICS : रावण यहीं से बना रहा था स्वर्ग की सीढ़ी, आज भी ‘राक्षसों’ का कब्जा








  • शिव ने रावण से कहा कि वह उसके साथ नहीं जा सकते हैं. वह चाहे तो यह शिवलिंग ले जा सकता है। भगवान शिव ने रावण को वह शिवलिंग ले जाने दिया जिसकी पूजा करते हुए उसने नौ सिरों की भेंट चढ़ाई थी। शिवलिंग को ले जाते समय शिव ने रावण से कहा कि इस ज्योर्तिलिंग को रास्ते में कहीं भी भूमि पर मत रखना अन्यथा यह वहीं पर स्थापित हो जाएगा। भगवान विष्णु नहीं चाहते थे कि यह ज्योर्तिलिंग लंका पहुंचे। अत: उन्होंने गंगा से रावण के पेट में समाने का अनुरोध किया। रावण जब झारखंड के देवघर नामक स्थान से गुजर रहा था तभी उसके पेट गंगा पहुंच गईं। अब रावण को जोर की लघुशंका लग गई। तभी विष्णु भगवान एक ग्वाले के भेष में वहां प्रकट हुए। रावण ने उस ग्वाले बालक को देखकर उसे शिवलिंग सौंप दिया और ज़मीन पर न रखने की हिदायत दी।
  • रावण जब मूत्र विसर्जन करने लगा तब गंगा के प्रभाव से उसकी मूत्र की इच्छा समाप्त नहीं हो रही थी ऐसे में रावण को काफी समय लग गया। इधर बालक रूप धरे विष्णु का मौका मिला और वह शिवलिंग को भूमि पर रखकर गायब हो गए। रावण जब लौटकर आया तब लाख प्रयास करने के बावजूद शिवलिंग वहां से टस से मस नहीं हुआ। अंत में रावण को देवघर से खाली खाली हाथ लंका लौटना जाना पड़ा। बाद में सभी देवी-देवताओं ने आकर इस ज्योर्तिलिंग की पूजा की और विधिवत रूप से स्थापित किया।
  • काफी वर्षों के बाद वैजनाथ नामक एक व्यक्ति को पशु चराते हुए इस शिवलिंग के दर्शन हुए। इसी के नाम से यह ज्योर्तिलिंग वैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मान्यता है कि वैद्यनाथ धाम के मंदिरों का निर्माण देव शिल्पी विश्वकर्मा ने किया है। मंदिर निर्माण के विषय में कथा है कि मंदिर बनाते समय जब देवी पार्वती के मंदिर का निर्माण विश्वकर्मा कर रहे थे उस समय अचानक दिन निकल आने के कारण विश्वकर्मा को निर्माण कार्य बंद कर देना पड़ा जिससे पार्वती का मंदिर विष्णु एवं शिव के मंदिर से छोटा रह गया। इस मंदिर के प्रांगण में गंगा मैया, भैरव नाथ सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. मंदिर के प्रांगण में एक प्राचीन कुआं भी है। वैद्यनाथ धाम में यूं तो सालों भर लोग शिव के नवम ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए आते हैं. किन्तु सावन एवं अश्विन मास में यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ पहुंचती है। यहां आने वाले श्रद्धालु भक्तों को बम के नाम से पुकारा जाता है।
  • देवघर में कांवड़ चढ़ाने का बड़ा ही महत्व है। श्रद्धालु भक्त सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर लगभग 106 किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा करते हुए देवघर बाबाधाम की यात्रा करते हैं। रास्ते में कई धर्मशाला हैं जहां वह विश्राम करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं। कांवड़ चढ़ाने वाले इन बामों को सामान्य बम कहा जाता है। यह रास्ते भर बोल बम-बोल बम का नारा लगाते हैं। कुछ लोग सुल्तान गंज से गंगाजल लेकर डाकबम बनकर 24 घंटे में 106 किलोमीटर की दूरी तय कर बाबा धाम पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कुछ लोग अपनी मन्नतों को पूरा करने के लिए अपने घर से ही दंड प्रणाम करते हुए देवघर की यात्रा करते हैं। इनकी यात्रा काफी कष्टकारी एवं लम्बी होती है।
  • बाबा वैद्यनाथ के मंदिर के चारों तरफ बाज़ार है जहां चूड़ा, पेड़ा, चीनी का बना ईलांइची दाना, सिंदूर, माला आदि मिलता है। लोग प्रसाद स्वरूप इन चीजों को खरीदकर अपने घर ले जाते हैं। यहां से कुछ किलोमीटर दूर वासुकीनाथ के रास्ते में घोड़मारा नामक स्थान हैं जहां का पेड़ा अति स्वादिष्ट होता है। आप बाबाधाम की यात्रा करते समय अपने परिवार एवं कुटुम्बों के लिए प्रसाद के तौर पर यहां से पेड़ा खरीद कर ले जाते हैं।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: PHOTOS: Ravana had beencheated here, Bholenath sti
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From News

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top