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PICS : गद्दार राजा को देशभक्तों का शाप, किले पर हर साल होता है वज्रपात

Pankaj Saw | Dec 10, 2012, 00:04 IST

  • रांची।झारखंड की राजधानी रांची से करीब 18 किलोमीटर दूर रांची-पतरातू मार्ग पर स्थित है ऐतिहासिक पिठौरिया किला। पूरे देश की तरह झारखंड में भी कई ऐतिहासिक किले हैं, पर पिठौरिया किले की प्रसिद्धि उन सब से अलग एक शापित किले के रूप में है। इस किले के राजा ने मातृभूमि के साथ एक गद्दारी की थी। इस बात से नाराज देशभक्त शहीदों ने फांसी पर चढ़ते समय राजा को शाप दे दिया था। इसके बाद राजा का वंश तो धीरे-धीरे समाप्त हो ही गया, श्राप के प्रभाव से उसके किले पर हर साल वज्रपात होना जारी है। साल दर साल बिजली की मार खाती किले की दीवारें अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में कुर्बानी देने वाले शहीदों और गद्दारों की कहानी आज भी सुना रही हैं।

    अब तस्वीरों की जुबानी सुनिए गद्दारी और शहादत की कहानी...






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  • इसी किला के निकट बना एक फांसी घर है, जिसमें आजादी की लड़ाई लड़ने वाले दर्जनों शहीदों को अंग्रेजों के इशारे पर फांसी पर लटका दिया गया था। जगतपाल सिंह ने अंग्रेज के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान अंग्रेजों की सहायता की थी और आजादी के दिवानों के साथ गद्दारी कर उन्हें मौत की नींद सुलाने का भी काम किया था।
  • 1831 ई. की बात है। उस वक्त सिंदराय और बिंदराय ने आदिवासी आंदोलन का नेतृत्व किया था। यहां की भौगोलिक स्थिति से पूरी तरह अनजान अंग्रेज तो शायद इन्हें कभी हरा नहीं पाते अगर राजा का सहयोग नहीं मिलता। अंग्रेज अफसर विलकिंगसन युद्ध करने की स्थिति में नहीं थे, इसी समय पिठौरिया के राजा जगतपाल सिंह ने आंदोलनकारियों को दबाने में अंग्रेजों की मदद की। इसके बदले में तत्कालीन गर्वनर जनरल विलियम वैंटिक ने उन्हें 313 रुपए प्रतिमाह आजीवन पेंशन देने की घोषणा की थी।
  • कहा जाता है कि राजा जगतपाल सिंह को अंग्रेजों ने किसी को भी फांसी पर लटकाने की छुट दे रखी थी। जगतपाल के बेटे जयमंगल सिंह और जगदीश सिंह भी बाप के ही नक्शेकदम पर चले। सन् 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ। क्रांतिकारियों को रोकने के लिए दोनों ने पिठौरिया घाटी की घेराबंदी कर दी। साथ ही साथ क्रांतिकारियों की हर गतिविधियों की जानकारी अंग्रेज तक पहुंचाते रहे। इस बात पर नराज क्रांतिकारी ठाकुर विश्वनाथ नाथ शाहदेव ने उन्हें सबक सिखाने पिठौरिया स्थित एक किले को ध्वस्त कर दिया।
  • बाद में ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव गिरफ्तार हो गए और जगतपाल सिंह की गवाही के कारण उन्हें 16अप्रैल 1858 को रांची जिला स्कूल के सामने कदम्ब के वृक्ष पर फांसी पर लटका दिया गया। जिस जगह यह फांसी हुई वह स्थान अब शहीद चौक कहलाता है। यहां एक स्मारक भी बनाया गया है।
  • बताते है की फांसी पर झूलते समय शहीद विश्वनाथ शाहदेव ऩे जगतपाल को उसकी मातृभूमि से गद्दारी के कारण शाप दिया था कि उसका वंश ख़त्म हो जायेगा, जिस किले पर वह राज करता है तो खंडहर बन जायेगा और वहां आसमानी कहर टूटेगा, किले में जंगली जानवर मल-मूत्र त्याग करेंगे। तब से हर साल पिठोरिया स्थित जगतपाल सिंह के किले पर वज्रपात हो रहा है। जगतपाल सिंह को कई लोगों का शाप लगा था और इसी शाप का आज यह नतीजा है कि आज उनके वंश का खात्मा हो चुका है। किला खंडहर में तब्दील हो चुका है।
  • वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना एक चुनौती बना हुआ है कि आखिर इस किले में एक ही जगह पर हर साल वज्रपात क्यों हो रहा है। पिठौरिया के लोग इस किला को शापित किला के नाम से भी जानते है। मान्यता और मिथक के कारण आम आदमी के साथ-साथ साइंटिस्ट्स के लिए यह एक रहस्य बना हुआ है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: PICS: king was cused, every year at this Fort thun
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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