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PICS : ऐसे तैयार होता है मिनरल वाटर, पढ़ेगे तो भूल जाएंगे पीना

सुरेंद्र सावंत | Dec 04, 2012, 00:22 IST

  • रांची।जार का पानी आपको कभी भी बीमार बना सकता है। झारखंड के बोकारो नगर में कई ऐसे प्लांट बिना लाइसेंस के चलाए जा रहे हैं। वहीं कई बिना जांच किए ही पानी बेच रहे हैं। स्टेट ड्रग एण्ड फूड लेबोरेट्री में विगत तीन वर्षों में सैंपल की जांच नहीं हुयी है।

    नगरवासियों के शिकायत के बाद तहकीकात में यह बात उभर कर सामने आयी कि नगर के किसी भी सेक्टर में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से किसी प्रकार का लाइसेंस ही नहीं दिया गया है। जबकि नियम के अनुसार जार या बोतल में मिनरल वाटर बेचने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेना पड़ता है। इतना ही नहीं स्टेट फूड कंट्रोलर से लाइसेंस भी लेना पड़ता है। यही नहीं पानी की पैकेजिंग कर बेचने वालों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पेयजल स्वच्छता विभाग अथवा नगर निगम से अनुमति लेनी पड़ती है। मगर सारे नियमों को ताक पर रखकर बोकारो के कई सेक्टरों में जार में पानी भरकर सप्लाई का धंधा जोरों पर है।

    अब तस्वीरों के साथ देखें साफ पानी(?) की कहानी...

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  • पानी से भरे एक जार को ये कंपनियां 40 रुपये में बेचती हैं। जिसमें 20 लीटर पानी होता है। ये कम्पनियां बगैर किसी लाइसेंस के या तो बीएसएल के सप्लाई पानी को या फिर बोरिंग से सीधे जार में भरकर बेच रहीं हैं। जबकि लोग समझते हैं कि हमें जार में पानी स्वच्छ व पूरी तरह शुद्ध मिल रहा है। मगर लोगों के साथ सरासर धोखा हो रहा है। प्रतिदिन इन कपंनियों का पानी जार में भरकर ऑटो के माध्यम से चास-बोकारो के विभिन्न स्थानों में सप्लाई किया जा रहा है। पानी लेनेवाले इस बात से अनजान हैं कि जो पानी जार में भरकर उन्हें दिया जा रहा है, वह मिनरल वाटर है भी या नहीं।
  • जार में पानी भरकर शहर के विभिन्न होटलों व शादी विवाह तथा अन्य समारोहों में भी सप्लाई की जाती है। बिना किसी लाइसेंस के मनमाने ढंग से ही कई कंपनियां इस अवैध धंधे में लगी हुयी हैं। मिनरल वाटर के नाम पर जार में पैकेजिंग कर जार का पानी धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। जिसकी कभी भी जांच नहीं होती है। बिना जांचे ही जार में बंद पानी की सप्लाई होटलों आदि में किया जा रहा है।
  • क्या है नियम : पानी प्लांट लगाने वालों को निश्चित नियमों के तहत लाइसेंस लेना पड़ता है। भारतीय मानक ब्यूरो से लाइसेंस लेने के लिए ऐसी कपंनियों को प्लांट बैठाने से पूर्व आवेदन देना पड़ता है। इसके बाद स्टेट फूड कंट्रोलर से लाइसेंस लेना पड़ता है। यही नहीं पानी की पैकेजिंग कर बेचने वालों को प्रदूषण विभाग व पेयजल स्वच्छता विभाग अथवा नगर निगम से अनुमति लेनी पड़ती है। ऐसा नहीं करनेवालों के खिलाफ संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: PICS: this is the process of manufacturing mineral
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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