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STING PICS : 300 रुपए में ड्राइविंग लाइसेंस, SSP ऑफिस के सामने DSP तक का बनता है

विकास श्रीवास्तव। | Dec 08, 2012, 00:04 IST

  • जिला मुख्यालय के बगल में गोरखधंधा : पुराना कोर्ट के सामने एसएसपी, डीसी व जिला परिवहन कार्यालय का स

    जमशेदपुर।एसएसपी कार्यालय के सामने फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने का धंधा चल रहा है। पुराना कोर्ट परिसर के सामने दर्जनों दलाल खुलेआम घूम रहे हैं। ये 300 रुपए लेकर घंटे भर के अंदर फर्जी लाइसेंस बनाने का काम करवाते हैं। यह बिल्कुल असली लाइसेंस के माफिक दिखता है। डीबी स्टार की टीम को कुछ दिनों से इस बात की जानकारी मिल रही थी।

    नकली डीएल के खेल को जानने के लिए डीबी स्टार की टीम ने स्टिंग ऑपरेशन चलाया। टीम ने दो दिनों तक पुराना कोर्ट परिसर में घूम कर जानकारी लेने की कोशिश की। इसमें मालूम हुआ कि कोर्ट में परिसर में लगने वाले अनेक दुकानों में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का अवैध धंधा चल रहा है।

    ग्राहकों की तलाश में दलाल कोर्ट परिसर में घूमते रहते हैं। वे लोगों को रोककर पूछते रहते हैं। टीम के सदस्य को भी एक दलाल ने सवालिया लहजे में पूछा की आपको क्या बनवाना है। टीम ने कहा कि मुझे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है। इतना सुनते ही दलाल ने कहा कि यह तो घंटे भर का काम है। झट से टीम ने लाइसेंस बनाने के लिए हामी भर दी। साथ ही टीम ने जाना कि ये लोग किसी का भी लाइसेंस बनवा सकते हैं। इन्हे तो सिर्फ पैसे से मतलब है।

    उक्त व्यक्ति अपराधी है या नक्सली, इस बात से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। टीम के एक सदस्य ने अपना लाइसेंस बनाने के साथ शहर के ट्रैफिक डीएसपी राकेश मोहन सिन्हा की तस्वीर देते हुए लाइसेंस बनाने की बात कही।

    उसने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि यह तस्वीर किसकी है? तकरीबन 30 मिनट के अंदर ही उसने टीम के सदस्य और डीएसपी का लाइसेंस बनाकर दे दिया। साथ ही दलाल ने कहा कि वह किसी भी तरह के कागजात बना सकते हैं। उन्होंने फर्जी डीड बनाने की बात बताई।

    ऐसे बनता है फर्जी लाइसेंस

    फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए एक पासपोर्ट साइज की तस्वीर, नाम और पता एक सादे कागज में लिखकर देने की बात कही जाती है। पता के लिए न तो आईडी प्रूफ मांगी जाती है और ना ही यह जानने का प्रयास किया जाता है कि इस पर अंकित पता सही है या गलत। एक लाइसेंस के लिए 300 रुपए लिया जाता है।

    लगा है डीटीओ का स्टांप

    फर्जी लाइसेंस में जिला परिवहन विभाग का मुहर भी लगा है। पहले पन्ने पर अशोक स्तंभ के साथ गोलाई में डिस्ट्रिक्ट ट्रांसपोर्ट ऑफिसर जमशेदपुर लिखा है। तीसरे पन्ने पर भी हस्ताक्षरयुक्त जिला परिवहन विभाग का मुहर अंकित है। काफी शातिर तरीके से काम किया गया है। जांच के दौरान आसानी से असली और नकली डीएल की पहचान कर पाना मुश्किल है।

    आप भी देखिये तस्वीरें और जानिए पूरा मामला -










  • अंडर एज को भी देते हैं बनाकर : डीएल बनाने के लिए लोगों की उम्र सीमा निर्धारित की गई है। लेकिन यहां र
    अंडर एज को भी देते हैं बनाकर : डीएल बनाने के लिए लोगों की उम्र सीमा निर्धारित की गई है। लेकिन यहां रोजाना कम उम्र के बच्चे फर्जी डीएल बनाने के लिए पहुंच रहे हैं। वे नकली लाइसेंस के दम पर धड़ल्ले से बड़ी-बड़ी गाडिय़ां चला रहे हैं। पकड़े जाने पर होगा मुकदमा : आईपीसी की धारा-420 के तहत नकली लाइसेंस बनाने और उपयोग करने वालों के खिलाफ मुकदमा हो सकता है। साथ ही इनके खिलाफ विभाग की ओर से अन्य आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं। बैंक एकाउंट व सिम कार्ड भी इश्यू : बैंक एकाउंट, सिम कार्ड इश्यू कराने के साथ आईडी, एड्रेस प्रूफ व केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षा योजना यूआईडी कार्ड (आधार) बनाने के लिए फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • ये लाइसेंस बुक भी रखते हैं : कोर्ट परिसर में घूमने वाले दलाल लाइसेंस बनाने के लिए उपयोग में आने वाल
    ये लाइसेंस बुक भी रखते हैं : कोर्ट परिसर में घूमने वाले दलाल लाइसेंस बनाने के लिए उपयोग में आने वाले सारे कागजात अपने पास रखते हैं। ये जिला परिवहन विभाग के द्वारा लाइसेंस निर्गत करने के दौरान उपयोग में लाए जाने वाले लाइसेंस बुक भी अपने पास रखते हैं। डीएसपी का बना दिया लाइसेंस : दलाल ने फोटो और 300 रुपए लेने के बाद महज घंटे भर के अंदर ड्राइविंग लाइसेंस थमाते हुए कहा कि लीजिए साहब आपका लाइसेंस ओके हो गया है। इसके बाद टीम ने शहर में तैनात ट्रैफिक डीएसपी राकेश मोहन सिन्हा की तस्वीर देते हुए कहा कि इनका भी लाइसेंस बनाना है। उसने तस्वीर के बारे में जानकारी लिए बगैर डीएसपी श्री सिन्हा का लाइसेंस भी 30 मिनट के अंदर बनाकर दे दिया।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: STING PICS : driving license in Rs 300
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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