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दुनिया की पहली ऐसी सड़कें, जहां सरकार नहीं, सड़क खुद भर लेती है गड्ढे

dainikbhaskar.com | May 19, 2017, 12:12 IST

  • सड़कों पर गड्ढे ड्राइवर्स के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होते हैं। यूं तो सारी दुनिया की सड़कों पर गड्ढे बनते हैं, पर भारत में इनकी समस्या कुछ ज्यादा ही है। इस लिहाज से हिंदुस्तानियों के लिए खुश होने वाली खबर आई है नीदरलैंड से। वहां के साइंटिस्ट्स ने खुद को ठीक कर लेने वाली सड़कें बना ली हैं। यानी ये सड़कें गड्ढे और दरारें खुद भर लेती हैं। बस, इनके ऊपर इंडक्शन रोलर चलाना होता है। डच साइंटिस्ट्स सड़कों को गड्ढा-मुक्त रखने के लिए बैक्टीरिया की मदद भी ले रहे हैं।
    कोलतार की सड़कें क्यों होती हैं खराब?
    कोलतार यानी डामर की सड़कों पर बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। यह कोलतार की खूबी है और उसकी कमी भी। छिद्रों की वजह से ऐसी सड़कें शोर और गर्मी सोख लेती हैं। लेकिन दूसरी तरफ, इन्हीं छिद्रों के कारण उनमें दरारें और गड्ढे भी जल्दी पड़ते हैं।
    सेल्फ हीलिंग डामर कैसे काम करता है?
    -न्यूजीलैंड स्थित डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी में एक्सपेरिमेंटल माइक्रो-मैकेनिक्स के प्रमुख, डॉ. एरिक श्लेन्जन सेल्फ-हीलिंग डामर पर प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने स्टील फाइबर मिलाकर डामर की एक नई किस्म तैयार की है। यह कंडक्टिव (सुचालक) होती है।
    -जब इस प्रकार के डामर से बन सड़क पर साधारण इंडक्शन रोलर चलाया जाता है, तो सड़क अपने गड्ढे और दरारें खुद-ब-खुद भर लेती हैं।
    -नीदरलैंड में इस तरह के विशेष डामर से 12 सड़कें बनाई गई हैं, जो सन् 2010 से काम कर रही हैं। इनमें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है।
    -स्टील फाइबर मिश्रित डामर हालांकि सामान्य डामर से 25 प्रतिशत महंगा होता है, लेकिन लंबे समय में यह बहुत फायदेमंद है। मटेरियल्स साइंटिस्ट डॉ. श्लेन्जन के अनुसार, सामान्य सड़कों की लाइफ जहां 7-8 साल होती है, वहीं इस डामर से बनी सड़कें इससे दोगुना चलती हैं।
    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें कि सड़कों को लेकर और किस तरह के एक्सपेरिमेंट्स हो रहे हैं...
  • बैक्टीरिया भी बचाएगा हमारी सड़कें
    -डॉ. श्लेन्जन की टीम कंक्रीट की सड़कों को लेकर भी एक्सपेरिमेंट कर रही है। उन्हें एक खास बैक्टीरिया की मदद से कंक्रीट रोड की मरम्मत करने में कामयाबी मिली है।
    -यह बैक्टीरिया कैल्शियम कॉर्बोनेट प्रोड्यूस करता है। इससे सड़कों के क्रैक और गड्ढे खुद-ब-खुद भर जाते हैं। उनमें कोई मटेरियल नहीं मिलाना पड़ता।
    -अच्छी बात यह है कि इस किस्म का बैक्टीरिया 200 साल तक जीवित रहता है और इंसानों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Netherlands Is Developing Self-healing Roads
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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