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Almost Virgin blog part3: दिल्‍ली की एक सिंगल लड़की की आपबीती

sheena | Sep 12, 2013, 15:11 IST

  • मुझे कई बार ऐसा लगा कि लड़की होकर खुले विचारों की जब मैं वकालत करती थी तो कैसे मेरे आसपास के लोग थोड़ा बिदक जाते थे, कुछ झिझक जाते थे और कई बार तो लोगों को अपने बारे में कहते सुनती थी, यार बेहद बिंदास और बोल्ड है ये लड़की। कई बार मां कहती थी - अब बड़ी हो गई हो... जरा ठीक-ठाक कपड़े पहनाकर, कब तक यू टॉम ब्वॉय बनकर रहेगी। खैर, ऐसा कुछ नहीं है कि मैं लड़कियों की तरह अपने सपनों के राजकुमार के बारे में नहीं सोचती थी। सपने तो मैं भी देखती थी, पहले प्यार और खूबसूरत रूमानी खतों के, लेकिन दिल-दीवाना हो पाता, ऐसा कोई बंदा इस दिल को पसंद ही नहीं आता। कॉलेज लाइफ में लड़कों की फौज देखकर ही डर लगता था। सिंपल हैंडसम कई बंदे दिल को अच्छे तो लगे, लेकिन वे अपने संसार में खोए रहे और मैं अपने । कहने को मैं बिंदास दिल्ली की खूबसूरत और मॉडर्न लड़की, लेकिन लड़कों की हरकतें और उनकी धोखेबाजी के किस्से सुनकर किसी पर विश्वास करने का दिल नहीं होता था। मेरी फ्रेंड सर्किल में कुछ ऐसी लड़कियां थीं, जिनको ब्वॉयफ्रेंड बनाने का क्रेज-सा था और कुछ ऐसी थीं जो ब्वॉयफ्रेंड और कपड़े बदलने में कोई खास अंतर नहीं रखती थी। मैं चाहकर भी इस मामले में हिम्मत नहीं जुटा पाती थी। पहले करियर, लाइफ और फिर अपनी पसंद के बंदे की तलाश... ताकि इश्क हो और फिर अपने दिल की दुनिया बसा ली जाए।
  • यूं कब तक सिंगल रहा जाए ...
    यूं कब तक सिंगल रहा जाए ...
    मिस्टर राइट की तलाश में अकेली-सी रह गई थी। मेरी सहेलियां अब शादी-शुदा हो गई थीं और अपनी बिंदास कॉलेज लाइफ को अलविदा कहकर भारतीय घरेलू बहू के टैग अपने साथ लगा चुकी थी। दूसरी तरफ मैं थी जो अपनी जवानी की एक्सप्रेस के साथ वर्जिनिटी का टैग लेकर चल रही थी और इसके साथ खुश भी थी। वो अलग बात है कि अब ऐसे ताने सुनने को मिलने लगे थे कि शादी क्यों नहीं कर लेती? कब तक यूं सिंगल रहोगी? मेरी सहेलियां वर्जिन कहीं की कहकर मुझ पर टोंट करती थी कि यूं ही जिंदगी बिता दी तो खुदा भी तुझसे नाराज हो जाएगा । ऑलमोस्ट सिंगल और वर्जिन लाइफ। जब आप ऐसे जीते हो तो तानों के लिए भी तैयार ही रहना पड़ता है। पर इधर कुछ दिनों से मुझे लगने लगा था कि यूं कब तक सिंगल रहा जाए और दिल भी इस बात में मेरा साथ दे रहा था। कसम से, इतने लफड़ों-झफड़ों में कइयों की जवानी एक्सप्रेस पैसेंजर में बदलने लगती है, पता ही नहीं चलता...कुछ अपनी इस एक्सप्रेस को लगातार दौड़ाते रहना चाहते हैं तेज और तेज...और जिसे ये हुनर आता है, उसका तो कहना ही क्या...मैं अपनी जिंदगी में बदलाव लाना चाहती थी और जिंदगी को जीने का मन बना चुकी थी ।
  • वर्जिनिटी का टैग
    वर्जिनिटी का टैग
    एक रात में बहुत कुछ बदल जाता है, सो हमारी जिंदगी की कहानी में हमें लग रहा था कि 31 दिसंबर की रात ऑलमोस्ट वर्जिन होने के फैसले को बदलने की रात होगी। इसलिए आईने में अपने आपको देखकर हमने उस दिन कहा सिंगल और वर्जिन होने का टैग अब उतार फेंका जाए, नहीं तो अब खुदा भी नाराज होकर कहीं लड़कियां बनाना ही कम ना कर दें। और मैं ऐसा करने वाली गोया कोई पहली लड़की तो हूं नहीं, अब मेरी उन सहेलियों का क्‍या जो आज शादी-शुदा और सावित्री टाइप दिखती तो हैं, लेकिन ये वही छोरियां हैं, जिन्होंने शादी से पहले कम उम्र में ही प्‍यार की पाठशाला में अपने प्रेमियों के साथ वर्जिनिटी का टैग उतार फेंका था। और उन अति मनचली और चालबाज सहेलियों के किस्सों का कहना ही क्‍या जो मर्द को बस अपने काम के लिए ही यूज करती थीं, मानो प्रेमी ना हुआ टिश्यू पेपर हो गया। काम खत्‍म किस्‍सा खत्‍म। इन विचारों ने मेरे साहस को कुछ ऐसा बढ़ाया कि अपनी शर्मोहया को भूलकर ऑलमोस्‍ट वर्जिन के टैग को अलविदा कहने के विचार पर अपनी सहमति की सील लगा दी और जब पीयूष जैसा हैंडसम, टॉल और जवान छोकरा जान छिड़कता हो तो ऐसे में भला मैं यह चांस कैसे मिस कर देती।
  • सीन 2 : रोमांस का मौसम और प्यार की बातें
    सीन 2 : रोमांस का मौसम और प्यार की बातें
    जी हां...। हम दोनों एक ही ऑफिस में काम करते थे। लेकिन मैं उस ऑफिस में पुरानी थी और पीयूष को ज्वॉइन किए हुए अभी मात्र 2 महीने ही हुए थे। दोनों का डिपार्टमेंट तो अलग था, लेकिन मैं तो इसे किस्मत ही कहूंगी कि दोनों को अक्सर एक-दूसरे से काम पड़ता ही रहता था। फिर प्रोफेशनल बातें कब पर्सनल होती गईं, पता ही नहीं चला। जब दिल बेताब हो तो फोन का बिल नहीं देखा जाता, ये जवानी की एक्‍सप्रेस है, चल जब चलती है तो सांस की रफ्तार और दिल की धक-धक इसकी ताल पर ऐसे डांस कर रहे हो गोया जंगल में मोर डांस करते हैं और ऐसा लगता है मधुमास आ गया हो । सो मेरे और पीयूष के बीच फोन पर 2 मिनट के लिए होने वाली बातें कब 2 घंटों तक खिंचने लगीं, पता ही नहीं लगा। फिर क्या हुआ...यह बताने से पहले से तो जान लीजिए कि वो लगता कैसा था?
  • सीन 3 : कुछ तो बात थी जो कर गई थी असर
    सीन 3 : कुछ तो बात थी जो कर गई थी असर
    आपको बता दूं कि जब वो चलता था तो दबंग सलमान से कम नहीं लगता था। डर नाम का शब्द तो उनकी डिक्शनरी में था ही नहीं। यानी हर तरीके से वो मुझे वैसा मर्द लगता था, जिसके साथ चलने, रहने, उठने-बैठने का ख्वाब हर लड़की देखती है। मर्द औरत में खूबसूरती में डूबी मादकता खोजता है और मेरी जैसी लड़कियां मर्द में उसकी मर्दानगी। इसी सोच पर तो आजकल के छोकरे अपनी हेल्‍थ और डोले-शोले बनाने के लिए जिम की शरण में जाते हैं।
    वैसे मैं खूबसूरत हूं, बिंदास और सेक्‍सी फिगर के लिए अपने कॉलेज में फेमस थी । लेकिन पीयूष जब वो मेरे लबों से सिगरेट छीनकर अपने होठों पर रखता था तो मैं तो बस यही सोचती रहती थी कि वो कब तक मेरी लिपस्टिक का अहसास इस कम्बख़त सिगरेट के ज़रिए करता रहेगा और जब वो मेरी आंखों में आंखे डालता था,तब मैं यह सोचती थी कि कब वो कुछ ऐसा करेगा कि मुझे शर्म के चलते आंखे बंद करनी पड़ जाएं। खैर, 3 महीनों के इस खेल के बाद हम दोनों कलीग से दोस्त और दोस्त से ब्वॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड तो बन गए थे।
  • सीन 4 : ऐसा तो सोचा न था ...
    सीन 4 : ऐसा तो सोचा न था ...
    31 दिसंबर का मुझे बेसब्री से इंतज़ार था, क्योंकि उस दिन पीयूष को रिझाने के लिए मैं नई टॉप और मिनी स्कर्ट लेकर आई थी। आखिरकार, 31 दिसंबर आ ही गया। पीयूष और मेरा डिस्को जाने का प्लान था। अब आप तो जानते ही हैं कि नए नवेले ब्वॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के प्राइवेट मूमेंट्स के लिए इससे प्राइवेट जगह कौन-सी होगी। डिस्को में पीयूष को मैंने जान-बूझकर खुद से ज़्यादा पिला दी थी ताकि वो अच्छे से पहल कर सके और कोई कमी ना छोड़े। इस नशेपन पर गुजरती रात के साथ कुंवारापन भी हमारे लिए एक पुरानी बात हो जाएगी। अपने इस बोल्‍ड फैसले पर हमारी खुशी का ठिकाना न था । डिस्को में 2-4 किस के अलावा उसने और कुछ तो नहीं किया। लेकिन मैंने भी ठान ली थी कि अपनी नई ड्रेस को वेस्ट नहीं जाने दूंगी।
    बातों और हरकतों से आगे जब मैं सीमा लांघने की हद से आगे बढ़ जाना चाहती थी तो ऐसे में पीयूष कुछ झिझका और बोल पड़ा - मैं ऐसा न कर सकूंगा। इस मामले में मैं अभी उतना फिट नहीं हूं... पीयूष की बात सुनकर मैं आश्चर्य और सोच में पड़ गई। सुना था कि आदमी नामर्द भी होता है, लेकिन कमबख्त अपना प्रेमी ही हॉट मौसम में ठंडी बर्फ साबित होगा, सोचा न था। कहां तो जवानी बेकरार थी अपने कुंवारेपन को अलविदा कहने को, लेकिन ये किसे पता था अपने लल्लन टॉप छुई-मुई घास की तरह ठंडे निकलेंगे। कसम से आजकल के छोकरे सलमान-सी बॉडी बना लेते हैं, पर पावर के नाम पर जीरो ही साबित होते हैं।
    खैर, ऐसे हालात में अपने-आप को संभालते हुए मैंने उसे इमोशनली ब्लैकमेल किया और उसे उकसाया, लेकिन वह फिर बोल पड़ा कि सेक्‍स उसके बस की बात नहीं। कमाल है, सामने गरम गोश्‍त पड़ा है और ये जनाब वेजिटेरियन हुए जा रहे हैं। कसम से जवानी का प्रेम उस वक्‍त मात खाता है, जब लड़की गर्म तूफान से गुजर रही हो और प्रेमी डर के मारे ठंडा हुआ जा रहा है। किस बात का हुआ छोकरा जवां रे। उसकी बात सुनकर एक बार मेरा मन किया कि उसका चेहरा चांटे से लाल कर दूं, लेकिन उसे ‘नामर्द’ कहकर मैंने अपना सारा गुस्सा थूक डाला।
    सीन 5: और नए साल की पहली सुबह
    खैर जो सोचा था वह ना हुआ। 31 दिसंबर की रात गुजर चुकी थी और हैप्‍पी न्‍यू ईयर शुरू हो गया था। मैं पहले की तरह ही आलमोस्टस वर्जिन थी। सुबह सूरज निकल चुका था, रात की बात सोचते हुए जैसे मैं भी होश में आ गई थी। पूरी बात सोचने पर ऐसा लगा कि शायद मैं बहुत बड़ी भूल करने जा रही थी और किसी शक्ति ने मुझे बचा लिया जो यह चाहती थी कि इस तरह से अपनी वर्जिनिटी विवाह से पहले तोड़ना सही बात नहीं। मैं अपने-आप पर हंसी और कुदरत की उस शक्ति को थैंक्स कहा, जिसके चलते मैं पहले की तरह ही पवित्र और आलमोस्ट वर्जिन थी। मेरी सहेलियां कहती हैं - अरे बाबा आलमोस्ट वर्जिन ही एक दिन मर जाएगी तो क्या स्वर्ग में खुदा अवार्ड देगा? खैर जो भी हो, इस मामले में नए साल में इंतजार और सही ...!
    मॉरल ऑफ द स्टोरी
    हम जवानी के दिनों में दिल के हाथों बेकरार होकर बहक कर कभी-कभी वर्जिनिटी का टैग उतार फेंकना चाहते हैं लेकिन कभी कभी कोई ऐसी शक्ति होती है जो हमें ऐसा करने से रोक देती है और हमें बताती है कि यह काम अच्छे लाइफ पार्टनर के साथ विवाह के बाद किया जाए तो जिंदगी बेहतर होती है और कम से कम पछतावे जैसी चीज नहीं होती।आप अपनी खुद की निगाहों में भी गिरने से बच जाते हो।
  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Almost Virgin blog
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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