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जानिए, देश तो अमीर हुआ पर आप हुए या नहीं!

शादाब समी | Dec 05, 2012, 12:33 IST

  • पिछले कुछ वर्षो में देश में प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ी है, लेकिन क्या देश के साथ एक आम आदमी भी अमीर हुआ है।





    सरकार ने पिछले दिनों बताया कि 2011-12 में राष्ट्रीय स्तर पर हमारी प्रति व्यक्ति आय 60,603 रुपए दर्ज की गई है। इससे पहले 2009-10 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय 46,117 रुपए दर्ज की गई थी और 2010-11 में बढ़कर यह आंकड़ा 53,331 रुपए हो गया था।

    यानी पिछले वर्षो में हमारी प्रति व्यक्ति आय में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे आम आदमी को भी कुछ फायदा हुआ या यह सिर्फ आकडों की बात है। जानकारों की मानें तो बढ़ती प्रति व्यक्ति आय हमारी आर्थिक खुशहाली को तो दर्शाती है, लेकिन यदि देश में बढ़ती महंगाई की बात करें तो ये आंकड़े एक आम आदमी के लिए कोई खास उपयोगी नजर नहीं आते हैं।


    यही बात 2011 जुलाई माह में पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने भी कही थी। उन्होंने कहा था कि प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी के बावजूद समाज में घोर सामाजिक और आर्थिक असमानता व्याप्त है। उन्होंने कहा था कि असमानता की यह खाई पिछले कुछ वष्रो में और चौड़ी हुई है।

    इससे पहले जनवरी 2012 के अंत में केंद्रीय साख्यिकी कार्यालय ने बताया था कि देश में पहली बार प्रति व्यक्ति आय पचास हजार के आंकड़े के पार पहुंची है और हमारी प्रति व्यक्ति आय 53,331 रु. हो गई है। प्रति व्यक्ति आय यानी कि हर भारतीय की औसत कमाई का आंकड़ा पाने के लिए देश की कुल आय का भाग देश की कुल जनसंख्या से किया जाता है। यह आंकड़ा देश की समृद्धि को जांचने के लिए एक महत्वपूर्ण सूचकांक है, लेकिन एक आदमी को इससे क्या फायदा होता है, यह कई बातों पर निर्भर करता है। यानी कहा जा सकता है कि प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का मतलब है कि देश अमीर हो रहा है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि हर भारतीय अमीर हो रहा है।

    आज की बिग स्टोरी में प्रति व्यक्ति आय के जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर एक नजर...।

  • भारत अब भी पीछे, लेकिन उम्मीद बनी है



    देश में भले ही प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ रही हो, लेकिन यदि विश्व के अन्य देशों में प्रति व्यक्ति आय पर नजर डालें तो हम अब भी काफी पीछे हैं। इस सूची में 50 हजार रुपए से ज्यादा प्रति व्यक्ति आय होने के बावजूद हम 135वें स्थान पर हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि यदि हमारी आर्थिक वृद्धि दर अच्छी बनी रहती है तो हम 2025 तक मध्यम आय वाले देशों में शुमार हो जाएंगे। अगस्त 2012 में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी. रंगराजन ने कहा कि अगर देश की आर्थिक वृद्धि दर 9 फीसदी सालाना रहती है तो 2025 तक प्रति व्यक्ति आय 10 हजार डॉलर तक हो सकती है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है।


    प्रति व्यक्ति आय: टॉप 5 देश



    लक्जमबर्ग



    यहां हाई- इनकम इकोनॉमी है। यहां लगातार विकास हुआ है। महंगाई और बेरोजगारी की दर काफी कम है।

    कतर

    पिछले कुछ वर्षा में यहां की अर्थव्यवस्था काफी तेजी से बढ़ी है। इसका प्रमुख कारण तेल के दामों में वृद्धि है।

    नॉर्वे


    यह मॉनेटरी वैल्यू में दूसरा सबसे अमीर देश है। यहां की अर्थव्यवस्था का विकास काफी तेजी से हुआ है।


    स्विट्जरलैंड


    यह दुनिया की सबसे स्थिर अर्थव्यवस्था में शुमार है। यहां की इकोनॉमी को हाईटेक इकोनॉमी भी कहते हैं।

    ऑस्ट्रेलिया

    दुनिया की 13वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिल यहां विकास काफी तेजी से हुआ है।

  • प्रति व्यक्ति आय: कब होता है फायदा

    प्रति व्यक्ति आय का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए कब बेहतर है। बता रहे हैं आईआईएम इंदौर के इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर गणोश कुमार एन।

    महंगाई के अनुसार

    यदि महंगाई के अनुसार ही प्रति व्यक्ति आय भी बढ़ती है तो यह अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है। यदि महंगाई 10 फीसदी की दर से बढ़ी है तो प्रति व्यक्ति आय भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए। यदि राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय महंगाई की दर से कम बढ़ी है तो यह सकारात्मक तो है, लेकिन एक आम आदमी को इससे कुछ खास फायदा नहीं होगा।


    असली पैमाना

    यदि अर्थव्यवस्था के वास्तविक विकास को देखना है तो हमें संयुक्त राष्ट्र के ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स को देखना होगा। यदि इस इंडेक्स में हमारी स्थिति अच्छी होती है तो ही हम वास्तविक विकास का दावा कर सकते हैं, क्योंकि इस इंडेक्स में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी आधारभूत संरचनाएं शामिल होती हैं।-प्राफेसर गणोश कुमार एन


    वितरण के अनुसार

    प्रति व्यक्ति आय का सही ढंग से हर वर्ग के लोगों में वितरण होना आवश्यक है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है तो यह देखना जरूरी है कि इसका बॉटम के 20 फीसदी लोगों में कितना वितरण हुआ है और टॉप के 20 फीसदी लोगों में कितना वितरण हुआ है। यदि वितरण सही नहीं हुआ है तो अमीरों को तो फायदा होगा, लेकिन आम आदमी को कोई खास लाभ नहीं होगा।

    आय बढ़ी, लेकिन हाथ से पैसा कम हुआ


    नितिन तांतेड़, फाइनेंशियल एजुकेशन रिसोर्स पर्सन, सेबी


    प्रति व्यक्ति आय मुख्य रूप से सरकार द्वारा किए जाने वाले नीति निर्धारण के लिए उपयोगी है। इसके इतर यदि आम आदमी की बात करें तो प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से उसे कोई खास फायदा नहीं है। क्योंकि इसकी गणना करते समय देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) को कुल जनसंया से भाग दिया जाता है। ऐसे में आंकड़े तो बेहतर
    िमल जाते हैं, लेकिन एक आम आदमी को कोई प्रत्यक्ष फायदा नहीं होता है। हालांकि यह हमारी आर्थिक खुशहाली को जरूर दर्शाता है, लेकिन यदि हम इसमें मुद्रा स्फीति में बढ़ोतरी को शामिल करें तो इसका असर नगण्य हो जाता है। पिछले कुछ सालों में प्रति व्यक्ति आय तो नि:संदेह बढ़ी है, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण हमारा खर्च भी बढ़ा है। ऐसी स्थित में यह स्पष्ट है महंगाई के साथ प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का कोई मतलब नहीं रहता है। हालांकि सरकार इन आंकड़ों का प्रयोग जनउपयोगी कार्यो में, फंड निर्धारित करने, समाज के पिछड़े वर्ग के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं आदि में कर सकती है। लेकिन वास्तविकता यह होती है कि हमारी मोनेटरी इनकम तो बढ़ती है, लेकिन रियल इनकम में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है। मोनेटरी इनकम का मतलब होता है कि हमारी आय में कितना इजाफा हुआ है, जबकि रियल इनकम से आशय है कि हम उस आय से हमारी जरूरतों को किस हद तक पूरा कर सकते हैं।

  • भारत में प्रति व्यक्ति आय टॉप 5 राज्य

    गोवा

    2011-12- रुपए 1,92,652
    2010-11-रुपए 1,68, 572

    दिल्ली

    2011-12- रुपए 1,75,812
    2010-11- रुपए 1,50,653

    हरियाणा

    2011-12- रुपए 1,09,227
    2010-11- रुपए, 94,680

    तमिलनाडु

    2011-12- रुपए 84,058
    2010-11-रुपए 72,993


    केरल

    2011-12- रुपए 83,725
    2010-11- रुपए 71,४३४

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Web Title: Here, the country is so rich, or you do not!
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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