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PHOTOS: 30 पार की महिलाएं रखती हैं ऐसी ख्वाहिश!

DanikBhaskar.com | Jan 18, 2013, 00:20 IST

  • त्वचा का सौंदर्य निखारने के उपाय करने से पहले जरूरी है अपनी त्वचा का प्रकार जानना, ताकि आपके द्वारा किए जा रहे उपाय और उपचार फायदेमंद हों।



    स्वाभाविक रूप से त्वचा की क्वालिटी आनुवंशिक होती है, लेकिन उसके बाद त्वचा के रंग-रूप में आने वाला बदलाव आपके खानपान, रहन-सहन और खुद की देखभाल पर निर्भर करता है। प्रस्तुत है इस बार, स्किन की क्वालिटी के बारे में
    महत्वपूर्ण जानकारी..


    विश्व प्रसिद्ध सौंदर्य विशेषज्ञ का कहना है, ‘स्त्री 30 साल की उम्र के बाद उस चीज की ख्वाहिश करती है, जो उसके पास पहले से होनी चाहिए’।



    सामान्य तौर से त्वचा 5 प्रकार की होती है- सामान्य, सूखी, तैलीय, नाजुक और मिश्रित। सभी की अलग-अलग विशेषताएं होती हैं।

    जानिए- तस्वीरों की जुवानी...।

  • सामान्य :

    यह त्वचा चमकदार, साफ़ और कोमल होती है। इसमें नमी और ऑइल के तत्वों का संतुलित मिश्रण होता है, जिससे यह न तो चिपचिपी होती है और न ही सूखी। इसमें रोंए काफ़ी छोटे-छोटे होते हैं, दिखते नहीं हैं, यानी इस त्वचा में कहीं कोई विशेष कमी नहीं होती। यह त्वचा अच्छे आंतरिक स्वास्थ्य और बेहतर ब्लड प्रेशर का प्रतीक है।

    ऐसी त्वचा पर मुश्किल से ही कोई दाग़-धब्बा दिखता है, क्योंकि इस क्षेत्र में ऑइल बनाने वालीं सेबासियस ग्लैंड्स नहीं होतीं। इस प्रकार की त्वचा नियमित रूप से क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइश्चराइजिंग करने से निखरती है।

  • तैलीय:

    सीबम बनाने वाली सेबेशियस ग्लैंड्स की अति सक्रियता के कारण यह त्वचा चिपचिपी हो जाती है। बड़े रोम छिद्रों वाली यह त्वचा दूर से चमकती है और भद्दी लगती है। इसमें ऑइल की अधिकता धूल-कचरे के लिए चुंबकीय काम करती है।

    दाग़, धब्बे और मुंहासों की समस्या होती है। पसीना अधिक निकलता है, अत: मेकअप भी अधिक नहीं टिक पाता। अधिकांश आनुवंशिक होती है। कभी- कभी किशोरावस्था के दौरान ऑइल ग्लैंड्स की अति सक्रियता के कारण चिपचिपापन होता है।

    हालांकि इस पर उम्र का असर देर से आता है। इसके लिए क्लींजिंग और टोनिंग महत्वपूर्ण हैं। ‘ऑयल-फ्री’ और ‘वॉटर बेस्ड’ प्रसाधन इस्तेमाल करें। सनस्क्रीन हर प्रकार की त्वचा के लिए ख़ास है, लेकिन न्यूनतम 30 एसपीएफ वाले ‘ऑइल-फ्री’ सनस्क्रीन ही चुनें।

  • सूखी:

    सूखी त्वचा पोंछने पर काग़ज साफ़ नहीं, एकदम साफ़ ही दिखेगा, यानी इस पर धूल, कचरा नहीं जमता, लेकिन पपड़ी जमने की समस्या होती है और उसमें टाइटनेस बनी रहती है। इसमें पीलापन, झुर्रियां पड़ने की संभावना रहती है। रोमछिद्र बारीक़ होते हैं। त्वचा में खिंचाव और बुढ़ापे की झलक जल्दी आने लगती है। बेशक, युवावस्था में यह आकर्षित दिखती है, लेकिन इसके लिए नियमित रूप से नेचुरल मास्क और मॉइश्चराइजग जैसे त्वचा और सौंदर्य संबंधी उपाय और उपचार करने पड़ेंगे।

    नाजुक : सामान्य तौर पर यह बहुत सूखी, स़ख्त और रूखी होती है। जरा में लाल हो जाती है और इसमें चिढ़चिढ़ापन आ जाता है। नाजुक त्वचा में अक्सर हल्का लालपन आ जाता है, खुजलाहट के साथ चुभन महसूस होती है और जगह-जगह दाग़, धब्बे हो जाते हैं। बेहद नाजुकमिजाज इस त्वचा के साथ तमाम समस्याएं होती हैं, इसलिए इसकी देखभाल बड़े ध्यान से करना होती है। इसके लिए बेहद कोमल और सौम्य उत्पाद ही इस्तेमाल करने होते हैं, इसके लिए साबुन तो ़बिल्कुल ही इस्तेमाल नहीं किया जाए।

  • मिश्रित :

    यह अधिकतर महिलाओं में पाई जाती है। ऐसी त्वचा के नाक और माथे पर अक्सर आने वाले चिपचिपेपन को टिश्यू पेपर से ही साफ़ किया जा सकता है, लेकिन वे गालों की सॉफ्ट त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं। इसमें सूखी और ऑइली दोनों तरह की त्वचाओं जैसी परेशानियां आती हैं, इसलिए इसकी देखभाल के लिए (ख़ासतौर से चेहरे की), विशेष सावधानी की जरूरत होती है। इसमें सूखी त्वचा, विशेष रूप से गालों और आंखों के आसपास अच्छी क्रीम और मॉइश्चराइजर्स प्रयोग करना तथा चिपचिपी त्वचा, ख़ासतौर से नाक और माथे की नियमित क्लींजिंग की जरूरत होती है।

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
Web Title: Skin care treatment
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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