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अपने दम पर फिर वापस आ रहा हूं...

सलोनी अरोरा | Mar 04, 2017, 17:09 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
अपने दम पर फिर वापस आ रहा हूं...
नब्बे के दशक की तो गोविंदा की कई यादगार फिल्में हैं। मार्च में वे कमबैक कर रहे हैं फिल्म 'आ गया हीरो' से। अंदाज उनका वही पुराना होगा जिसे खुद भी 'गोविंदा छाप' कहने से परहेज नहीं करते। मुंबई में रुइया पार्क, जुहू स्थित उनके घर पर हुई इस मुलाकात में फिल्म इंडस्ट्री की अदावतों, हालिया मुश्किलों, परिवार को लेकर कई बाते हुईं। मानने में गुरेज नहीं करते कि पत्नी सुनीता से डॉमिनेट होते हैं। रोचक बात यह रही कि इस इंटरव्यू को गोविंदा ने खुद भी रिकॉर्ड किया...

अरे, आप भी ये इंटरव्यू क्यों रिकॉर्ड कर रहे हैं?
मैं अपनी भाषा में सुधार करने की कोशिश कर रहा हूं। इस इंटरव्यू को जब अकेले में सुनूंगा तो भाषा की गलतियां पकड़ में आएंगी। सुधार करना आसान होगा। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं ना इसलिए सुधार के नए-नए तरीके निकालता हूं।

पढ़े-लिखे होना और गोविंदा होना, दोनों में बहुत बड़ा फर्क है?
फिल्म लाइन में हो और कामयाब हो तो बात अलग हो जाती है। परफेक्शन कुछ नहीं होता आपको हर दिन कुछ नया सोचना ही होगा। वरना थम जाएंगे।

"आ गया हीरो' क्या कहानी है?
सही समय पर लिया गया सही फैसला है। जीवन में आपको हर समय एक्ट करना है। अपने लिए, परिवार के लिए दुनिया के लिए। जिसे मेरी फिल्म का हीरो अपना काम कहता है। पुलिस वाले का किरदार है जो अभिनय के जरिए केस सॉल्व करेगा। मेरी एक फिल्म थी "हत्या' उसी तरह की फिल्म है ये। गाने, कॉमेडी है, लेकिन इसमें कंटेंट भी है। गाने हिट हैं। फिल्म अच्छी है। सही सोच और सन्देश है। फुल गोविंदा छाप फिल्म है। और हम करेंगे भी क्या? हमें यही आता है, भांड हैं।

पहले ख़राब माने जाते थे, लेकिन आज तो भांड भी ग्लोरिफ़ाई हो गए है?
हर वो चीज जिसमे सोच ख़राब ना हो, लोग पसंद कर रहे हैं। तो वह अच्छी चीज है। युवाओं के लिए तो आज ये फ़िल्मी दुनिया यह सबसे बड़ा कॅरिअर गोल है। मेरे गानों को अतरंगी कहा जाता है लेकिन फॉलो भी तो वही किये जाते हैं। 'किल दिल' में वापसी पर मुझे पहले जैसी ही सराहना मिली। मैंने समझा की लोगों की पसंद मेरे मामले में बदली नहीं।

आपने बहुत लंबा ब्रेक क्यों लिया?
जरूरी होता है कई बार पीछे हटना। फिल्म बनाने वाले सोचने लगे थे कि उनके पास सफलता का फाॅर्मूला है। जो वे करेंगे वही सही है। पैसे के खेल हैं जिसमे हमे कहना पड़ता था कि जो आप कर रहे हो वो बेस्ट है। ब्रेक से पहले तो जिन लोगों ने मुझे महज साइन किया था मेरी फिल्म के हिट होने के साथ वे बड़े निर्माता बन गए। इस बार मैं खुदके दम पर फिर वापस आ रहा हूं।

आपको लेकर फिल्म इंडस्ट्री में इतनी निगेटिविटी क्यों आई?
बुरी बातें किसी हीरो के लिए कहें तो ये उनके बिज़नेस का हिस्सा हो सकता है। लेकिन खास तौर पर किसी एक एक्टर को लेकर ही बुरी बाते कही जाए तो मामला गलत होता है। मेरे साथ ऐसा ही हुआ। लोगों ने रस और आनंद लेकर मुझे जिल्लत दी। महफ़िलों में, फिल्मों में, इंटरव्यू में, सीधे तौर पर मुझे बुरा कहा। मैंने बहुत आराम से यह सब देखा। पैसे ज्यादा हो तो आपकी राह में रोड़े लगाने के लिए पीछे नहीं हटते। फिर सोचा समय जो दिखा रहा है, उसमे भी कुछ सीख ही होगी। सब एक साथ हो गए थे झुंड में।

सबने झुंड बना कर आपको बुरा कहा?
ये तो होता ही है। जब ज्यादा लोग जमा हो तो आपको ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए कि ये लोग अकेले आपको नहीं तबाह कर पा रहे तो झुंड में आ रहे हैं। 30 साल झुंड में रहकर भी किसी एक का शिकार नहीं कर पाए तो मतलब ईश्वर मेरे साथ है। वो एक समय था निकल गया। सौ सुनार की हो गई अब एक लुहार की पड़ने का समय आ गया।

फिल्म की शूटिंग में मुश्किलें आईं?
मेरे पास काम नहीं था तो फिल्म के लिए फाइनेंस भी नहीं था। जब पैसे होते थे तो शूटिंग कर लेते थे। जब पैसे नहीं होते थे तो शूटिंग रोक लेते थे। फिल्म के संवाद और गाने मैंने लिखे। मैंने पहले भी अपनी फिल्मों के कई गानों के बोल लिखे हैं, लेकिन कभी क्रेडिट नहीं लिया। मेरे पास एक डायलाग राइटर था लेकिन उसे टीवी में काम करने के ज्यादा पैसे मिल रहे थे तो मैंने उसको जाने दिया। और डायलाग खुद ही लिख लिए।

दोस्तों का कोई सर्किल है क्या आपका?
सर्किल नहीं सिर्फ सलमान है। वो ही असली दोस्त है। सलमान का प्रतियोगिता करने का तरीका अलग है। वे किसी और को जलील करके आगे नहीं बढ़ते। हम ऐसे हैं ही नहीं की लोगों को पीछे करने का सोचे। सलमान का प्यार नजर आता है। सलमान से दिल की बाते करता हूं। सलमान की खासियत है कि वे झूठी तारीफ नहीं करते। सच बोलते हैं। सलमान के अलावा तीन-चार हीरो ही खुश हुए की गोविंदा की फिल्म एक बार फिर आ रही है। वहीं कुछ लोगों ने तो इस बारे में बात ही नहीं की। कुछ लोग बिज़नेस करते हैं उन्हें अच्छाई से मतलब ही नहीं है।

डील करना मुश्किल होता है कभी?...
फ़िल्मी दुनिया हमारा परिवार है, ये सब हमारे घर परिवार के ही लोग हैं। मैं उन्हें उसी तरह देखता हूं और अपना काम करता हूं। मेरी फिल्म के कई हिस्सों को लोगों ने बांट कर फिल्मों में डाल लिया। मैंने उन लोगों का भय देख लिया। ये गोविंदा जैसा वो गोविंदा जैसा लेकिन गोविंदा कही नहीं। उसकी पिक्चर को तो फाइनेंस देने के लिए भी कोई नहीं। ऐसा तो तब होता है जब आपका राष्ट्रीय रूप से घेराव होता है। आप उस लायक होते हैं तभी तो इतना विरोध होता है। उनकी जिंदगी का मकसद ही मुझे रोकना है। वे लोग भगवान को भूल जाते हैं। मैं चर्च जाता हूं लेकिन ईसा मसीह नहीं हूं। अब सोचा ऐसे लोगों को तो सबक सिखाना होगा। ३० साल से पीछे पड़े लेकिन हरा नहीं पाए।

लाइफस्टाइल में क्या बदलाव किया?
मैं पिछले दस साल से एक वक्त ही खाना खाता हूं। ज्यादातर शाकाहारी भोजन ही खाता हूं। मौसम ठंडा हो तब ही नॉनवेज खाता हूं। एक वक्त खाना खाने का लॉजिक यही है कि उम्र के साथ शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है। उसके लिए यह ठीक है। थकान कम होती है। बीमारियां कम होती हैं। अब तो मेरे बच्चे भी एक टाइम ही मेरे साथ बैठ कर खाना खाते हैं।

मुझे उनसे डॉमिनेट होना अच्छा लगता है
अफेयर की चर्चाओं के बीच भी आपकी पत्नी सुनीता ने ख़ामोशी से साथ दिया..
सुनीता तब भी कुछ नहीं कहती थी। उन्होंने मुझे कर के दिखाया, हर उतार-चढ़ाव में मेरे साथ रहीं। अब तो वो खुद चाहती हैं कि मेरी गर्लफ्रेंड हो। वो बहुत ही मॉडर्न और पढ़ी लिखी हैं।

डॉमिनेट भी करती हैं?
मुझे उनसे डॉमिनेट होना अच्छा लगता है। क्योंकि मुझे डॉमिनेट करना आसान नहीं है। वे इस लायक हैं कि डॉमिनेट कर सके। उन्होंने मुझे बहुत झेला है। मैं पढ़ा-लिखा नहीं हूं। उनकी जिंदगी की समझ मुझसे बहुत आगे है। सुनीता नेचुरल है, बिंदास जिंदगी जीती है। खुश रहती हैं। मैं उनकी ख़ुशी में खुश हूं।

बेटा भी फिल्मों में आने की तैयारी में है?
मेरा बेटा लंदन से फिल्म मेकिंग का कोर्स करके आया है। पढ़ा-लिखा है। मुझे आश्चर्य होता है उसको देख कर, उसकी समझ का स्तर बहुत आगे है। वो खुद अपनी जगह बनाएगा। मुझे लगता है कि आज के युवा पढ़े-लिखे हैं, हिम्मत करते हैं और खुद आगे बढ़ जाते हैं।

आपकी बेटी नर्मदा के फ़िल्मी कॅरिअर की शुरुआत में किस चीज की कमी रही?
मैं उस पर बात नहीं करना चाहता। उनको दुखी करे ऐसा कुछ नहीं बोलना चाहता। वे कहती हैं आप मेरे बारे में कुछ मत बोला करे।

फिरोजा और रुद्राक्ष किसी खास कारण से पहना है?
फिरोजा मुझे सूट करता है। खोटी निंदा से बचाते हैं। वास्तु पर काम करता है। रुद्राक्ष का फायदा बहुत है। क्रोध भी नहीं आता। लेकिन प्रोडक्शन में गुस्सा करना स्वाभाविक है क्योंकि वहां पैसे लगे होते हैं। दिमाग में सौ चीजे एक साथ चलती हैं। इनसे कंट्रोल महसूस करता हूं।
ऐसा भी सुना है आप स्वर्गवासी मां से बातें करते हैं?
मैं तो नेचर की तरह मां से जुड़ा हूं। बारिश के बाद प्रकृति का रूप फिर बदल जाता है। पैदा होते हैं तो नाभि मां से जुड़ी होती है। वो सदैव जुड़ी रहे आप सदैव जवान होते रहेंगे। उनसे जिंदगी में पॉजिटिव सोच ही मिली आज भी वो सही रास्ता दिखाने साथ हैं।
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(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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