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इनसाइड स्टोरी: 399 की घड़ी छूट के बाद 479 में बेचने का झूठा विज्ञापन

Rasrang | Feb 05, 2017, 00:00 IST

इनसाइड स्टोरी: 399 की घड़ी छूट के बाद 479 में बेचने का झूठा विज्ञापन
हर महीने एएससीआई "एडवर्टिजमेंट स्टैंडर्ड काउंसिल आॅफ इंडिया' के पास विज्ञापन मानकों का उल्लंघन करने वालों की लंबी सूची उपभोक्ताओं और विज्ञापनदाताओं की ओर से पहुंच रही है। शिकायत करने वालों में उपभोक्ता संगठन और सिविल सोसाइटी समूह भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर कंज्यूमर कंप्लेंट्स काउंसिल "सीसीसी' के पास 2015-16 में 2020 शिकायतें आईं, जिनमें से 1271 को सही पाया गया। रिपोर्टों पर नजर डालें तो पता चलता है कि झूठे, भ्रामक और निराधार दावों वाले विज्ञापन सिर्फ एक या दो क्षेत्रों में तक सीमित नहीं हैं। शिक्षा, रियल स्टेट, स्वास्थ्य, दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, ऑटोमोबाइल से लेकर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स तक इसका विस्तार है। और ऐसा भी नहीं है कि फर्जी दावों वाले विज्ञापन देने वाली कंपनियां छोटी या गुमनाम हैं। बड़े ब्रांड और प्रतिष्ठित कंपनियां इस खेल में शामिल हैं, मल्टीनेशनल भी भ्रामक विज्ञापन मामलों में दोषी हैं।
80% मामलों में विज्ञापनदाता झूठे एड में बदलाव कर लेते हैं
एएससीआई की महासचिव श्वेता पुरंदरे बताती हैं कि हम शिकायतों की सुनवाई और उस पर कार्यवाही में चार से आठ सप्ताह का समय लेते हैं। आमतौर पर शिकायतें आक्रामक और झूठे दावों वाले विज्ञापनों को रोकने या उनमें बदलाव को लेकर होती हैं। अगर शिकायत सही पाई गयी तो हम शिकायत पर विज्ञापनदाता से जवाब मांगते हैं और उसे बदलने के लिए 10 दिन का समय देते हैं। जरूरी होने पर हम तकनीकी टीम से मदद लेते हैं, जिसमें करीब एक सप्ताह का समय लगता है। 80 प्रतिशत मामलों में विज्ञापनदाता झूठे और भ्रामक विज्ञापनों में बदलाव कर लेते हैं।
भ्रामक विज्ञापन जिन्होंने दावा कुछ और किया जबकि सच कुछ ये था...
केस-1 बिना ऑपरेशन कैंसर का इलाज
हॉस्पिटल न्यू लाइफ कैंसर केयर के गुजराती विज्ञापन में दावा है- बिना ऑपरेशन के कैंसर का सफल इलाज। किसी भी तरह के ट्यूमर का बिना आॅपरेशन केवल दवा से कराएं सफल इलाज।
जबकि... जुलाई 2016 में सीसीसी ने पाया कि न्यू लाइफ कैंसर केयर के दावे क्लीनिकल साक्ष्यों से तालमेल नहीं खाते। यह ड्रग्स और मैजिक रेमेडिज एक्ट "आॅब्जेक्शनल एडवर्टीजमेंट एक्ट' का उल्लंघन है।
केस-2 सभी दावे झूठे और भ्रामक निकले
बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एक उत्पाद "दिव्य स्वसरी प्रवाही' के विज्ञापन में दावा किया जाता था कि लाखों-करोड़ों लोग इसका 20 साल से इस्तेमाल कर रहे हैं। इस दवा का जीरो प्रतिशत साइड इफेक्ट है और यह सौ फीसदी असरकारी है।
जबकि... मई 2016 के अपने निर्णय में पतंजलि के इस संबंध में किए जा रहे सभी दावों को सीसीसी ने झूठा और भ्रामक माना।
केस-3 छूट के बाद भी एमआरपी से ज्यादा
फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड ने टाइटन सोनाटा डिजिटल घड़ी का विज्ञापन दिया। विज्ञापन में घड़ी की कीमत 599 बताई गयी और छूट के बाद 479 रुपए में बेची जा रही थी।
जबकि... डिस्काउंट का दावा भ्रामक पाया गया। घड़ी पर कंपनी छूट देने के बजाए दाम से अधिक कीमत वसूल रही थी। अक्टूूबर-16 में सीसीसी ने जांच में पाया कि उत्पादक कंपनी की ओर से घड़ी की एमआरपी-399 है।
तीन मंत्रालय कर रहे हैं काम...
पिछले साल भ्रामक विज्ञापनों की चुनौती से निपटने के लिए फूड स्टैंडर्ड अथॉरिटी आॅफ इंडिया "एफएसएसएआई' और एएससीआई ने हाथ मिलाया। पिछले हफ्ते केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा एएससीआई के साथ एक एमओयू साइन हुआ है।
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 की जगह सरकार की तैयारी है कि "न्यू कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल 2015' को लागू किया जाए। लेकिन यह बिल संसद में लंबित पड़ा है...
एएससीआई की 3 मुश्किलें
1 काउंसिल के पास कोई ऐसा अधिकार नहीं है कि वह सीधे एक्शन ले सके।
2 एएससीआई विज्ञापनों के गलत होने की स्थिति में सिर्फ सुझाव दे सकती है, उनमें बदलाव करने को कह सकती है, बदले हुए विज्ञापन प्रसारित करा सकती, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं कर सकती।
3 यहां न तो पेनल्टी लगा सकती है और न ही भ्रामक विज्ञापन के जाल में फंसकर उपभोक्ता को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई कर सकती है।
एक साल में 1 हजार शिकायतें
एएससीआई शिकायतों के लिए सिर्फ उपभोक्ताओं और उद्योगों पर निर्भर हुआ करती थी। उसके बाद 2012 में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आने वाले भ्रामक विज्ञापनों को रोकने और उनको दुरुस्त करने के लिए नेशनल एडवर्टीजमेंट मॉनिटरिंग सर्विस का गठन हुआ। 2015 में फर्जी दावों में बहुत बढ़ोतरी हो गयी तो केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने एक बेबसाइट "ग्रिवांसेज अगेंस्ट मिसलीडिंग एडवर्टिजमेंट' लांच कर दी। सिर्फ 1 साल में वेबसाइट पर 1 हजार से अधिक शिकायतें आ गयीं।
पुष्पा गिरीमाजी
वरिष्ठ लेखिका और उपभोक्ता मामलों की स्तंभकार
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Web Title: Rasrang
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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