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पूरी तरह विश्वसनीय है कर्म का विचार

नडीन क्रीज़बर्गर | Sep 12, 2012, 17:02 IST

  • ट्रेन्डिंग नोटिफिकेशन्स
पूरी तरह विश्वसनीय है कर्म का विचार
आपके लिए आध्यात्मिकता के क्या मायने हैं? ये व्यक्ति के भीतर का कोई स्वाभाविक धार्मिक आवेग है। कुछ हद तक, मैं इसे विक्टोरियन सदी के अंतिम और बीसवीं सदी के शुरुआती दिनों की उस घटना से जोड़कर देखता हूं, जब लोग आध्यात्मिकता के विचार को व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन की खुशहाली के लिए अपना रहे थे। वे एक नया धर्म तलाश रहे थे और इसके लिए उनके पास तमाम युक्तियां थीं। उस समय, बहुतसे लोगों के लिए आध्यात्मिकता एक सामाजिक गतिविधि बन गई थी। क्या आपकी परवरिश धार्मिक वातावरण में हुई? हां, मेरी परवरिश रोमन कैथोलिक तरीके से हुई और मुझे कैथोलिक स्कूलों में भेजा गया। सेकंडरी स्कूल, जहां मैं गया, उसे बेनेडिक्ट मत के संत चलाते थे। उस समय कैथोलिक चर्च में सामाजिक चेतना थी, लेकिन कैथोलिक मत और संस्था से मेरा मोहभंग हो गया। मैं उस समय 14 या 15 साल का था, जब मुझे लगा कि इसका मेरे लिए कोई मतलब नहीं है। ये आंतरिक तौर पर कोई बोध पैदा नहीं करता। इसके अलावा, और बहुत-सी बातें थीं, जिन्हें कैथोलिक चर्च बढ़ावा दे रहा था, उन्हें मैं नापसंद करता था। आप यकीन करते हैं कि कोई बड़ी ताकत दिशा दिखाती है और रक्षा करती है? ऐसा सच में नहीं है। किशोरावस्था के आखिरी दिनों और युवावस्था के शुरुआती समय में मेरी रुचि बुद्धवाद में हुई, लेकिन तांत्रिक पक्ष से ज्यादा, इसकी दार्शनिकता में। बुद्ध दर्शन के ‘मन, पुनर्जन्म और कर्म’ के विचार के बारे में आपका क्या है? कर्म का विचार पूरी तरह विश्वसनीय है। मेरा काम और उसका परिणाम, दोनों ही मेरे लिए महत्वपूर्ण हंै और जीवन में अप्रत्याशित रूप से आने वाली चीजें भी मायने रखती हैं। इसीलिए, मैं कर्म के विचार को अपनाता हूं, लेकिन सीमित रूप में। समकालीनता और संयोग के बारे में क्या विचार है? जीवन में घटनाएं बेतरतीब ढंग से होती हैं या फिर बड़ी सच्चई का हिस्स होती हैं? मैं समकालीनता और संयोग में विश्वास रखता हूं, क्योंकि वे असाधारण ढंग से मेरे जीवन में घटी हैं, लेकिन मैं उन्हें किसी दैवीय सिद्धांत से नहीं जोड़ता। मैं बस ये सोचता हूं कि दुनिया इसी ढंग से काम करती है। मैं इसे एक अपने आप होने वाली प्रक्रिया की तरह देखता हूं। जीवन का कोई विशेष लक्ष्य? इस बात पर जो याल मुझे आता है, वो ये है कि यदि मैं लेखन की क्षमता का उपयोग नहीं करता तो उस प्रतिभा को व्यर्थ कर रहा हूं, जिसे आप ‘ईश्वर प्रदा’ कह सकते हैं। मैं इस योग्यता को अच्छाई के लिए प्रयोग करने का दायित्व महसूस करता हूं। कभीकभी सोचता हूं कि कितना भाग्यवान हूं, जो जीने के लिए लिखता हूं। मुझे यह काम समग्रता में करना चाहिए। क्या आप हमेशा जानते थे कि भविष्य में लिखना है?  हां, जब मैं बच्चा था, तब से। लिखते समय क्या आपको लगता है कि किसी बात को किसी दूसरे छोर तक पहुंचाने के लिए एक माध्यम की जरूरत है? मैं इस विचार को उन लोगों के लिए ठीक समझता हूं, जो फिक्शन लिखते हैं, लेकिन मैंने इसका अनुभव नहीं किया। आपका विविध आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भारत से बहुत जुड़ाव रहा है, इसने किसी तरह आपको प्रभावित किया? मुझे हमेशा धार्मिक जगहों पर जाना अच्छा लगता है, लेकिन उससे ज्यादा ये देखना कि लोग वहां कैसा व्यवहार करते हैं। पिछले साल मैंने कुछ समय कर्नाटक में बिताया। एक मस्जिद में गया, लेकिन ये देखने के लिए कि लोग इसे कैसे चला रहे हैं, बेंगलुरु का यह भाग खुद को अपने परिवेश से कैसे जोड़े हुए हैं। मैं मैसूर के एक गांव में भी किसी का साक्षात्कार लेने गया। वहां कुछ महत्वपूर्ण हिंदू मंदिर हैं। इस जगह बड़ा खराब अनुभव रहा, वहां की सामाजिक असमानता, लोगों और पुजारियों का व्यवहार, मंदिर के भीतर और बाहर चलता पैसों का खेल.. ये सब चीजें मेरी रुचि का केंद्र थीं। बहुत खराब लगा यह देाकर कि कैसे ये सब चीजें धार्मिकता बनकर सामाजिक तरीके से खेल रही हैं। यानी आपको कभी उन जगहों पर कोई महत्वपूर्ण या चुनौती भरा अनुभव नहीं हुआ? नहीं, मुझे नहीं हुआ। चुनौतियों के समय में आपको ऊर्जा और सुरक्षा कहां से मिलती हैं? मैं स्वीकार की सोचीसमझी आंतरिक प्रक्रिया से प्रेम करता हूं। अपने बेहद करीबी लोगों की मौत का सामना करते वक्त मैं सबसे पहले स्वीकार की इसी प्रक्रिया से गुजरता हूं, जो कि जाहिरसी बात है कि वक्त लेती ही है और फिर ये मेरे शेष जीवन से एकाकार हो जाती है। यदि पुनर्जन्म हो तो क्या बनना चाहेंगे? यदि ऐसा हुआ तो मैं कोई चुनाव नहीं करूंगा। यह प्रकृति को खुद ही तय करना होगा। ईश्वर से कोई प्रश्न पूछना हो तो वह क्या होगा? पहले तो मुझे उसके होने के प्रमाण चाहिए, तब पूछूंगा कोई प्रश्न। आपके लिए प्रसन्नता क्या है? प्रेम।
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Web Title: article of aha zindagi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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