Home »Magazine »Career Mantra » Article Of Career Mantra

ग्राहक के व्यवहार को समझ बढ़ाएं कारोबार

dainikbhaskar.com | Nov 26, 2012, 13:20 PM IST

ग्राहक के व्यवहार को समझ बढ़ाएं कारोबार
यह यूं तो एक इंटरनेट लतीफा या स्टोरी है, लेकिन इसमें इस बात के गहरे अर्थ छिपे हैं कि आप इस विशाल दुनिया में कैसे ग्राहक के व्यवहार को समझकर अपने उत्पाद को सफल बना सकते हैं। यह स्टोरी कुछ इस तरह है- इटली के रोम शहर में एक सड़क किनारे दो भिखारी आजू-बाजू में बैठे थे। एक भिखारी ने अपने आगे ‘क्रॉस’ (ईसाई धर्म का प्रतीक) रख रखा था। दूसरे भिखारी के पास ‘स्टार ऑफ डेविड’ (यहूदी धर्म का प्रतीक) था। वहां से गुजरने वाले लोग दोनों भिखारियों को देखते, लेकिन सिर्फ ‘क्रॉस’ लेकर बैठे भिखारी की टोपी में सिक्के वगैरह डालकर आगे बढ़ जाते।
कुछ समय बाद पोप का वहां से गुजरना हुआ। वे यह देखकर ठिठक गए कि लोग ‘क्रॉस’ रखने वाले भिखारी को तो पैसा दे रहे हैं, लेकिन ‘स्टार ऑफ डेविड’ वाले भिखारी को कोई कुछ नहीं दे रहा है।
पोप ‘स्टार ऑफ डेविड’ वाले भिखारी के पास पहुंचे और बोले, ‘बेटे, क्या तुम नहीं समझते कि यह एक कैथोलिक देश है और यह शहर कैथोलिसिज्म का गढ़ है? यदि तुम अपने सामने ‘स्टार ऑफ डेविड’ लेकर बैठे रहोगे, तो आने-जाने वाले लोग तुम्हें कुछ नहीं देंगे। खासकर तब जबकि तुम एक ऐसे भिखारी के बाजू में बैठे हो, जिसने ‘क्रॉस’ पकड़ रखा है। हो सकता है कि तुमसे चिढ़कर वे उसे और भी ज्यादा पैसे दें।’
‘स्टार ऑफ डेविड’ थामने वाला भिखारी पोप की बात सुनकर मुस्कराया और मुड़कर ‘क्रॉस’ वाले भिखारी से बोला, ‘मोइशे, (यहूदी नाम) देखो कौन गोल्डस्टीन बंधुओं को मार्केटिंग के बारे में सिखा रहा है!’
अब १९९७ के दौर में चलते हैं। उस वक्त ब्रिटैनिया मार्केट में एक टैगलाइन लेकर आया था- ‘स्वस्थ खाओ, तन-मन जगाओ।’ यह टैगलाइन ब्रिटैनिया के तत्कालीन एमडी व सीईओ सुनील अलघ के दिमाग की उपज थी। दरअसल उन्होंने पहले इस टैगलाइन को ‘ईट हैल्दी एंड लिव बैटर’ के रूप में तैयार किया था।
उन्होंने कुछ खास लोगों को बुलाकर अपनी यह टैगलाइन सुनाई। इसे सुनकर उन लोगों ने ‘लिविंग’ शब्द पर विरोध जताया। इन लोगों का कहना था कि ‘लिविंग’ शब्द ज्यादा बनावटी है और लोग इसे शरीर से जोड़कर देखते हैं, जबकि ‘थिंकिंग’ को दिमाग से जोड़कर देखा जाता है।
जिस तरह हॉर्लिक्स ने दक्षिण भारत जैसे दूध की निम्न आपूर्ति वाले बाजार में दूध की जगह ले ली, उसी तर्ज पर ब्रिटैनिया ने ‘एनलीन’ नामक एक ब्रांड नेम के साथ पूर्वी भारत में एक दुग्ध आधारित पेय बाजार में उतारा। इस उत्पाद का मकसद ऑस्टियोपोरोसिस से पीड़ित महिलाओं को आकर्षित करना था। लेकिन भारतीय महिलाएं ज्यादातर डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों के बारे में ही जानती थीं और ऑस्टियोपोरोसिस के बारे में जागरूक नहीं थीं। लिहाजा यह उत्पाद टेस्ट मार्केट लेवल से आगे नहीं बढ़ सका और इसे वापस बुलाना पड़ा। बाद में इसकी जगह ‘न्यूट्रीच्वाइस’ नामक ब्रांड ने ले ली।
इसके बाद इस तरह की बात आई कि मधुमेह रोगियों को ध्यान में रखते हुए कंपनी को क्या शुगर-फ्री उत्पाद बनाने चाहिए? बाद में उन्हें बाजार में शुगर-फ्री उत्पादों की भरमार देखते हुए लगा कि ग्राहक इनसे ऊब चुके हैं। कंपनी ने और गहराई से शोध किया, तब जाकर उन्हें पता लगा कि ग्राहक ऐसे उत्पाद चाहते हैं, जो उनकी शर्करा का स्तर स्थिर रखें। इस तरह कंपनी ने रागी और जई से बने उत्पादों को बाजार में उतारा और इन्हें छोटी-छोटी पैकिंग में पेश किया, ताकि ग्राहकों को इन्हें घर ले जाने में आसानी हो।
ऐसे में कोई आश्चर्य नहीं कि ब्रिटैनिया की बिक्री का ८क् फीसदी हिस्सा बिस्किटों से आता है, क्योंकि यह कंपनी बाजार में मासिक आधार पर ग्राहकों के व्यवहार को समझने में अपनी काफी ऊर्जा खपाती है।
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: article of career mantra
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From Career Mantra

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top