Home »Magazine »Career Mantra » Article Of Career Mantra

स्थायी आजीविका का साधन करें तैयार

एन. रघुरामन | Dec 04, 2012, 15:05 PM IST

स्थायी आजीविका का साधन करें तैयार

यदि बेंगलुरू का इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम-बी) समाज-सेवा की दिशा में पहल करते हुए कुछ ग्रामीण लोगों तक पहुंचता है और वहां के अल्प-पोषित व कुपोषित बच्चों को पोषाहार देता है तो दुनिया जरूर इस पर गौर करेगी, क्योंकि यह शैक्षणिक गतिविधियों से इतर किया गया काम है।


आईआईएम-बी ने अपने एक सामाजिक कार्यक्रम के तहत ग्रामीण लोगों तक पहुंचते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। इस संस्थान के एक वर्षीय एक्जीक्यूटिव पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट पाठ्यक्रम के छात्रों ने अपने सामाजिक कार्यक्रम ‘प्रयास’ के बैनर तले ‘प्रोजेक्ट न्युट्रिशन’ शुरू किया। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में रहने वाले कुपोषित बच्चों की सेहत को सुधारना है।


उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर इस साल अगस्त से मगाडी में अपने इस सामाजिक कार्यक्रम की शुरुआत की। मगाडी कर्नाटक के रामानगर जिले में स्थित एक कस्बा है। यहां वनों की समृद्ध विरासत रही है, लेकिन अवैध शिकार और जंगलों की कटाई के चलते इसका वन्य जीवन काफी हद तक कम हो गया। इस जगह से कावेरी नदी की एक सहायक नदी भी निकलती है। यहां पर एक मानवनिर्मित झील और एक छोटा-सा पनबिजली संयंत्र भी है। प्रचुर जल भंडार और इंडस्ट्रीज होने के बावजूद यह जगह गरीबी के लिए जानी जाती है।


कार्यक्रम के पहले चरण में १ से ३ साल तक के ५३ बच्चों को चुना गया। ५३ बच्चों के इस समूह में तीन बच्चे अल्पपोषित पाए गए, बाकी पचास कुपोषण का शिकार थे। इसके बाद कमेटी ने इसी गांव से एक वॉलेंटियर नियुक्त करते हुए उसे इन बच्चों को रोज स्कूली घंटों के दौरान दाल व दूध से युक्त भोज्य पदार्थ वितरित करने का जिम्मा सौंपा। इस पूरी प्रक्रिया पर लगातार निगाह रखी गई। इससे बच्चों की सेहत में कुछ सुधार आया और उनका वजन भी बढ़ा। हालांकि फिलहाल यही कहा जा रहा है कि इस कार्यक्रम की वास्तविक सफलता साल के अंत में ही मापी जा सकती है। इस कार्यक्रम के तहत लोगों के घर-घर जाकर गांव के डॉक्टर की मदद से उन्हें जागरूक किया गया और मांओं को साफ-सफाई और टीकाकरण सुविधाओं के बारे में बताया गया। हालांकि ‘प्रयास’ फंड के तहत यह कार्यक्रम आईआईएम-बी के फेकल्टी व छात्रों द्वारा प्रायोजित है, फिर भी यह काफी हद तक बेहतरीन पहल है, जहां पर छात्र बच्चों के जीवन में सुधार लाने के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। इसी तर्ज पर गार्डन सिटी फार्मर्स ट्रस्ट (जीसीएफटी) लोगों के घरों की छतों को एक ऑर्गेनिक फार्म में बदलते हुए उन्हें नई जिंदगी दे रहा है। यह समूह आम किसानों के साथ जैविक खेती से जुड़ी तमाम जानकारियों को साझा करेगा। सब्जियां व फल इत्यादि धीरे-धीरे गरीबों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में गरीब लोग कम से कम इतना तो कर सकते हैं कि अपनी कुटिया के बाहर या बरामदे में इन्हें उगाएं। जो आप खाते हैं, उसे उगाइए और जो उगाते हैं, उसे खाइए।


यह कार्यक्रम बीएम इंग्लिश स्कूल के साथ मिलकर चलाया जाएगा, जो नियमित तौर पर पर्यावरण जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। यह स्कूल किचन गार्डनिंग के साथ-साथ उन सब्जियों के लिए भी मशहूर है, जिन्हें यह उगाता है और स्टाफकर्मियों के लिए छात्रों के अभिभावकों को बेचता है। यह अपने विद्यार्थियों को अपने-अपने घरों की छतों पर भी ऐसा बगीचा तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। कोई भी शहर की छतों पर अपनी रोज की खपत की कम से कम ३० फीसदी फल व सब्जियां और गांवों की छतों पर कम से कम ७० फीसदी फल व सब्जियां उगा सकता है।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: article of career mantra
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From Career Mantra

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top