Home »Magazine »Navrang » Mirgi Can Be Cure

लाइलाज नहीं है मिरगी

रोहित गुप्ता | Nov 17, 2012, 00:05 AM IST

लाइलाज नहीं है मिरगी

मिरगी का दौरा पड़ऩे पर लोग सुध-बुध खो देते हैं, लेकिन डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि इसका इलाज संभव है। यह दैवीय प्रकोप या जादू-टोने से जुड़ी समस्या नहीं, बल्कि इसका संबंध दिमाग से है। आज राष्ट्रीय मिरगी दिवस (17 नवंबर) पर इससे जुड़ी भ्रांतियां सामने लाते हुए उससे निपटने के कारगर तरीकों पर रोशनी डाल रहे हैं रोहित गुप्ता


मिरगी कुछ सबसे पुरानी बीमारियों में से एक है। इसे अपस्मार और अंग्रेजी में ऐपिलेप्सी भी कहते हैं। यह न्यूरॉजिकल डिस्ऑर्डर यानी दिमाग की नसों से जुड़ी बीमारी है। इसमें मरीज को दौरे पड़ते हैं, जो आमतौर पर 30 सेकेंड से लेकर 2 मिनट तक के होते हैं। कुछ मरीजों में दौरे की अवधि लंबी भी होती है। दौरे के दौरान मरीज का बेहोश हो जाना, दांत भिंच जाना, शरीर लडख़ड़ाना, मुंह से झाग निकलना आम है। भारत में इसके मरीजों की तादाद लगभग 10 लाख है, जबकि दुनिया में करीब 5 करोड़ लोग इससे पीडि़त हैं। दिल्ली के जीबी पंत हॉस्पिटल में न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. विनोद पुरी के मुताबिक, किसी को कम से कम दो या इससे ज्यादा बार दौरा पड़े तभी उसे मिरगी का मरीज माना जाता है। इंफेक्शन वाला पोर्क, बीफ और पालक तथा बंदगोभी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों से भी मिरगी हो सकती है। आम बोलचाल में इसके लिए दिमाग में कीड़ा होने जैसा जुमला इस्तेमाल किया जाता है। इससे बचने के लिए डॉक्टर सब्जियों को धोकर और बंदगोभी के पत्तों की ऊपरी दो-तीन परतें उताकर इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।

वजह और लक्षण


मिरगी कोई बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग की बीमारी का लक्षण है। पंत हॉस्पिटल में डिपार्टमेंट ऑफ न्यूरोसर्जरी में प्रोफेसर डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं, 'मिरगी दिमाग में ट्यूमर, टीबी और धमनियों में गुच्छे का संकेत हो सकता है। इसलिए दिमाग में जो बीमारी होती है, उसी का इलाज किया जाता है। मिरगी के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। यह बच्चों में बुखार, दिमाग का सही विकास न हो पाने और ब्रेन इंजरी से भी हो सकता है। ब्रेन में इंफेक्शन और ट्यूमर भी वजह हो सकते हैं। यानी यह सीधे तौर पर दिमागसे जुड़ी समस्या है। एम्स, दिल्ली में न्यूरोलॉजी की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी कहती हैं, 'हमारे दिमाग में इलेक्ट्रिक एक्टिविटी चलती रहती है, लेकिन जब यह एक्टिविटी या इलेक्ट्रिक डिस्चार्ज बढ़ जाता है तो झटके लगने या बेहोशी की दिक्कत आती है।


मिरगी के लक्षण दिखने पर झाड़-फूंक आजमाने की बजाय न्यूरोलॉजिस्ट का रुख करना चाहिए। डॉ. सिंह कहते हैं, 'लक्षणों से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि मरीज मिरगी से पीडि़त है या नहीं। अलबत्ता, पुष्टि के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन या ईईजी की जरूरत होती है। इन्हीं टेस्ट के जरिए मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों में इलेक्ट्रिक एक्टिविटी देखी जाती है। हिस्टीरिया के मरीज में भी मिरगी जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि टेस्ट के बाद ही होती है।

दौरे कैसे-कैसे


मिरगी के दौरे कई तरह के होते हैं। डॉ. पुरी बताते हैं, 'सेंसरी सीजर में इंद्रियों पर असर पड़ता है। पीडि़त लोगों के मुंह का स्वाद बिगड़ सकता है। आंखों से धुंधला या स्पॉट दिखना या फिर दर्द हो सकता है। मांसपेशियों में फडफ़ड़ाहट भी हो सकती है। मोटर सीजर में हाथ-पैर लडख़ड़ाने, जबड़ा भिंच जाने और पेशाब निकल जाने जैसे लक्षण होते हैं। इसमें कई बार मरीज भूल जाता है कि उसे दौरा पड़ा था। दोनों तरह के दौरों में मरीज बेहोश हो सकता है।


एक मिरगी ऐसी भी होती है, जिसमें कारण पता नहीं चलता। डॉ सिंह कहते हैं,'इडियोपैथिक ऐपिलेप्सी में टेस्ट के बाद भी वजह पता नहीं चलती। इस तरह की मिरगी आम है। कुछ लोगों को यह बीमारी अपने माता-पिता से मिलती है। डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक, ' ऐसी मिरगी से पीडि़त महिला या पुरुष को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

इलाज


यह मिथक तोडऩा बेहद जरूरी है कि मिरगी लाइलाज है। डॉ. पुरी कहते हैं, '६०-७० फीसदी लोगों का इलाज दवा के जरिए होता है, जबकि लगभग 30 फीसदी लोगों को ठीक होने के लिए सर्जरी यानी ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। लगातार 3 साल तक दवा लेने के बाद लगभग 70 फीसदी लोगों के दौरे हमेशा के लिए बंद या कंट्रोल हो जाते हैं।फरीदाबाद, हरियाणा की दीप्ति (19) को मिरगी का इलाज कराते हुए लगभग ढाई साल हो गए हैं। उनके पिता मदन सिंगला के मुताबिक, 'जब से दीप्ति ने दवा लेनी शुरू की है, तब से एक बार भी दौरा नहीं पड़ा। इलाज शुरू होने से पहले उसे औसतन 15 दिन में एक दौरा पड़ रहा था और इसी वजह से स्कूल की पढ़ाई भी छूट गई थी।

ठीक होने के बाद उसकी पढ़ाई फिर से शुरू हो गई है। हालांकि कई मरीजों को जीवनभर दवा लेनी पड़ती है। डॉ. सिंह के मुताबिक, 'मार्केट में 300 से ज्यादा दवाएं उपलब्ध हैं और ज्यादातर मरीज एक ही दवा देने से कंट्रोल में आ जाते हैं। अगर पेशेंट को 2-3 दवाएं देने से भी फायदा नहीं होता या दवाओं का बहुत ज्यादा साइड इफेक्ट दिखता है तो सर्जरी का विकल्प होता है। किसी पेशेंट की उम्र 16 साल से ज्यादा है और वह 2 साल से दवा ले रहा हैं, फिर भी उसे 2 या इससे ज्यादा दवाएं देने पर महीने में 2 या ज्यादा दौरे पड़ते हैं, तो उसके लिए भी सर्जरी ही विकल्प होता है। फिलहाल हमारे देश में सर्जरी आम तौर पर बड़े शहरों में ही होती है और सर्जरी से 60-90 फीसदी लोगों को फायदा होता है। दिल्ली में एम्स और जीबी पंत जैसे सरकारी अस्पतालों में सर्जरी होती है। प्राइवेट हॉस्पिटल में आम तौर पर 3-5 लाख रुपए में सर्जरी (दवाओं और हॉस्पिटल में रहने का खर्च समेत) हो जाती है।


डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक मिरगी से पीडि़त लोगों को दिमागी थकान, स्ट्रेस, नशीली दवाओं और ज्यादा शराब पीने से बचना चाहिए क्योंकि इससे दौरे जल्दी-जल्दी पड़ सकते हैं। ऐसे लोगों को दवा बीच में नहीं छोडऩी चाहिए।

कानून बदला, सोच नहीं


दिलचस्प है कि हिंदू मैरिज एक्ट और स्पेशल मैरिज एक्ट के मुताबिक, अगर पति-पत्नी में से कोई एक मिरगी से पीडि़त होता था, तो पहले सिर्फ इसी आधार पर उनके बीच तलाक का प्रावधान था। हालांकि दिसंबर 1999 में कानून में बदलाव हुआ, फिर भी मिरगी पीडि़त ज्यादातर लड़कियों की शादी में बहुत दिक्कत आती है।

डॉ. त्रिपाठी कहती हैं, मिरगी के बावजूद 95 फीसदी महिलाओं को प्रेग्नेंट होने में दिक्कत नहीं होती। यह समस्या माइग्रेन, बीपी जैसी है और ज्यादातर पेशेंट कुछ सेकेंड या मिनट में ही नॉर्मल हो जाते हैं। इसका इलाज भी उपलब्ध है, इसलिए किसी भी लड़की को सिर्फ मिरगी के आधार पर शादी करने से इनकार करना गलत है।


जब टोनी ग्रेग मिरगी के बावजूद पहले क्रिकेट के मैदान में और बाद में कमेंटेटर के तौर पर मैदान के बाहर तहलका मचा सकते हैं और जोंटी रोड्स इस बीमारी को मुंह चिढ़ाकर दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फील्डर बन सकते हैं तो आप मिरगी के बावजूद नॉर्मल जिंदगी क्यों नहीं जी सकते? जरूरत है सिर्फ सही इलाज और हौसले की।

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे! हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App
Web Title: Mirgi can be cure
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
पढ़ते रहिए 5.5 करोड़ + रीडर्स की पसंदीदा और विश्व की नंबर 1 हिंदी न्यूज़ वेबसाइट dainikbhaskar.com, जानो ख़बरों से ज़्यादा।

Stories You May be Interested in

      More From Navrang

        Trending Now

        पाएं लेटेस्ट न्यूज़ एंड अपडेट्स

        दैनिक भास्कर के ट्रेंडिंग खबरों के नोटिफिकेशन रखेंगे आपको अपडेट..

        * किसी भी समय ब्राउजर सेटिंग्स बदलकर नोटिफिकेशंस ऑफ कर सकते हैं.
        Top