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युवा जीवनशैली, बुढ़ापे के रोग

निखिल श्रीवास्तव | Nov 17, 2012, 00:08 AM IST

युवा जीवनशैली, बुढ़ापे के रोग
आजकल के युवाओं के पास पैसा है, मस्ती है और सोशल नेटवर्क पर दुनियाभर से दोस्ती भी। इन सबके बीच सेहत गुम हो गई है। यही वजह है कि बुढ़ापे की बीमारियां युवाओं को अपना शिकार बना रही हैं। नई जीवनशैली के नुकसान और इससे बचने के उपाय बता रहे हैं निखिल श्रीवास्तव
बीमारियां कभी भी आपको जकड़ लेती हैं। लेकिन, कुछ एक निश्चित उम्र के बाद ही आपके शरीर में घर बनाने की कोशिश करती हैं। बुढ़ापे में आने वाली दिल से जुड़ी ऐसी ही कुछ बीमारियां मॉडर्न लाइफस्टाल के साथ मुफ्त मिलती हैं। हाल ही में उपभोक्ता उत्पाद कंपनी मैरिको द्वारा देश के 12 बड़े शहरों में 1.12 लाख लोगों पर की गई ऑनलाइन स्टडी के मुताबिक, 30 से 34 साल के 74 फीसदी युवाओं को हार्ट अटैक का खतरा है। अपोलो हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. बी. नवासुंदी कहते हैं कि यह खराब लाइफस्टाइल, खानपान की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी का परिणाम है। करियर की जद्दोजहद में आपको न डाइट दुरुस्त करने का वक्त मिल रहा है, न ही आप रूटीन सही कर पा रहे हैं। इसी मौके के इंतजार में बैठी हैं बीमारियां। हालांकि, एक-दो दिन में आप लाइफस्टाइल नहीं बदल सकते। इसलिए नीचे दिए गए उपायों को अपने मौजूदा रूटीन में ही शामिल करके आप बीमारियों का खतरा कम कर सकते हैं।
डाइट और खानपान की आदत
सर्वे में पाया गया कि 30 से 49 आयु वर्ग के 59 फीसदी लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर काफी ज्यादा है। जबकि, 61 फीसदी लोगों में अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर खतरनाक रूप से कम है। इंदौर के चोइथराम हॉस्पिटल में डाइटेटिक्स डिपार्टमेंट की हेड पूर्णिमा भाले बताती हैं कि इसकी वजह खराब खानपान है। लोग अक्सर नौकरी के चक्कर में सुबह का नाश्ता नहीं करते, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। भाले के मुताबिक, ‘दिनभर में एक वयस्क को 2500 कैलोरी की जरूरत होती है। जो लोग सुबह हैवी नाश्ता नहीं करते, उनके शरीर में खुद-ब-खुद तमाम रोग पनपने लगते हैं।’ इससे न सिर्फ आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी घटती है, बल्कि लिवर और गैस्ट्रिक संबंधी कई बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ जाता है। भाले इसके लिए नाश्ते में भरवां रोटी, दलिया या प्लेन चपाती के साथ फल और दूध लेने की भी सलाह देती हैं। वह कहती हैं, ‘शरीर से मशीन की तरह जितना ज्यादा व्यवहार करेंगे, उसके खराब होने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाएगी।’ वर्किग कल्चर में चाय और कॉफी की जरूरत से ज्यादा खपत होती है। इससे भी कई तरह के रोग लोगों के शरीर में अपना घर बना लेते हैं। भाले की मानें तो चाय की जगह ग्रीन टी, छाछ या नींबू पानी ज्यादा फायदेमंद होता है।
शारीरिक गतिविधियां
सर्वे में शामिल 30 से 49 आयु वर्ग के 66 फीसदी लोगों ने माना कि वे दिल की समस्या से जूझ रहे हैं। दरअसल, ज्यादातर युवाओं को व्यायाम का समय नहीं मिलता। जयपुर के सचिन को ही ले लीजिए। ऑफिस में डेस्क जॉब है और शरीर सर्वाइकल प्रॉब्लम से जूझ रहा है। सचिन खुद मानते हैं, ‘दिनभर बैठने की वजह से ही यह दिक्कत हुई है।’ जयपुर में तलवर्कर्स जिम के संचालक आशीष दीक्षित शरीर को फिट रखने के लिए हफ्ते में दो-तीन बार सूर्य नमस्कार और पुश-अप्स जैसी कुछ कसरत करने की सलाह देते हैं। बकौल आशीष, ‘इन कसरत को नियमित रूप से करने से न सिर्फ लोग सर्वाइकल की परेशानी से बच सकते हैं, बल्कि उनका मन भी संतुलित रहता है।’ जो लोग कसरत का समय नहीं निकाल सकते, उनके लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल, लंच के बाद थोड़ी-सी वॉक, और रूटीन चेकअप कराना एक्टिव रहने का सबसे आसान तरीका है।
तनाव और अवसाद
दिल्ली की एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले अभिषेक हर दूसरे हफ्ते बहुत ज्यादा प्रेशर की गिरफ्त में आ जाते हैं। दफ्तर और घर की जिम्मेदारियों में तनाव होना लाजिमी है। कभी बच्चों की सेहत तो कभी ऑफिस में प्रोजेक्ट का प्रेशर। ऐसे में, वह अपने स्वास्थ्य को ही नजरअंदाज कर देते हैं। मन बहलाने के लिए सोशल नेटवर्किग साइट्स का सहारा लेते हैं। और, यही लाइफस्टाइल उनके स्वास्थ्य के लिए मुसीबत बन चुकी है। इंदौर के मोटिवेशनल गुरु सचिन भटनागर कहते हैं कि ऐसी जीवनशैली से तनाव बढ़ता जाता है और जल्द ही यह अवसाद का रूप ले लेता है। उनके मुताबिक, ‘ज्यादातर युवा पढ़ाई और करियर का बोझ संभालते-संभालते अलग-थलग पड़ चुके होते हैं। वे अपनी दुनिया बना लेते हैं, जिसमें ऊपर से तो वो चमकते रहते हैं लेकिन भीतर से कमजोर हो जाते हैं।’ इसी दौरान, बीमारियां हमला बोलती हैं। हाइपरटेंशन से दूर रहने के लिए सचिन मेडिटेशन की राय देते हैं। वह कहते हैं कि सुबह पांच बजे मेडिटेशन करना सबसे अच्छा है, लेकिन जिन लोगों की लेट नाइट जॉब है वे डिनर से पहले आधा घंटा मेडिटेशन कर सकते हैं।
नशा और तन्हाई
सर्वे में पाया गया कि मल्टीनेशल कंपनियों और कॉल सेंटर के दौर में युवाओं का एक बड़ा वर्ग अल्कोहल और सिगरेट से तनाव कम करता है। वे इस बात से अनजान हैं कि इससे ब्लड प्रेशर काफी बढ़ता है। वे रेडिकल्स भी शरीर से निकल जाते हैं, जो दिल की सेहत के लिए जरूरी हैं। सर्वे में शामिल लोगों में सबसे ज्यादा स्मोकर कोलकाता में थे और कैंसर के मरीज भी सबसे ज्यादा वहीं पाए गए। दरअसल, ज्यादातर लोग यह गलतफहमी पाल लेते हैं कि स्मोकिंग से तनाव दूर हो जाता है। लेकिन, नोएडा के इंडो गल्फ हॉस्पिटल में फिजिशियन डॉ. जीसी वैष्णव कहते हैं, ‘नशे की वजह से भी ज्यादातर बीमारियां युवाओं को अपना शिकार बनाती हैं।’ डॉ. वैष्णव की मानें तो तनाव की वजह से न सिर्फ हाइपरटेंशन होता है, बल्कि ब्लड प्रेशर, मोटापा और दिल की भी तमाम बीमारियां शरीर में आ जाती हैं। इससे बचने के लिए वह खानपान, पर्याप्त नींद और कसरत को रामबाण मानते हैं।
दिल्ली के योगगुरु कमल के पास सचिन और अभिषेक जैसे कई युवा रोज पहुंचते हैं। कमल बताते हैं कि नई जीवनशैली से दिल, पेट और मस्तिष्क संबंधी बीमारी भी होती हैं। हालांकि, वह युवाओं के पास वक्त की किल्लत को समझते हैं और कुछ अहम टिप्स देते हैं। वह कहते हैं, रोज भ्रामरी प्राणायाम के दस सेट किए जाएं तो शरीर के ज्यादातर रोग दूर हो जाएंगे। कमल का दावा है कि इससे मस्तिष्क के दोनों हिस्से काम करने लगते हैं और सकारात्मक सोच और व्यवहार व्यक्तित्व से झलकने लगता है।
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Web Title: Old times dieseases
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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