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‘रहमान’ और ‘सलमान’ के लिए ऑनलाइन हंट

निखिल श्रीवास्तव | Nov 25, 2012, 00:14 AM IST

‘रहमान’ और ‘सलमान’ के लिए ऑनलाइन हंट
टेलीविजन रियलिटी शो के लिए लगी लंबी कतारों ने भले ही लाखों युवाओं को मंजिल तक न पहुंचाया हो, पर टैलेंट हंट की ऑनलाइन दुनिया में सबके लिए जगह है। न कतार है, न लड़ाई, न स्क्रिप्ट है और नही फरेब। फिर भी कल के सलमान खान और ए आर रहमान के सपनों को उड़ान मिल रही है और मंजिल सामने है। निखिल श्रीवास्तव की रिपोर्ट..
अनुराग कश्यप, कुमार सानू, साधना सरगम, हरिहरन, महेश मांजरेकर, खय्याम, इरशाद कामिल और शंकर महादेवन जैसे बॉलीवुड के दिग्गज टैलेंट हंट की ऑनलाइन दुनिया में बॉलीवुड की अगली पीढ़ी को न सिर्फ तलाश रहे हैं, बल्कि उन्हें तराश भी रहे हैं। कुछ तो खास है इस दुनिया में कि ऑनलाइन टैलेंट हंट वेबसाइट तुमभी डॉट कॉम पर यूजर्स की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है।
ऐसी ही दूसरी वेबसाइट लाफैंगो डॉट कॉम पर भी दुनियाभर के करीब 10 लाख लोग हर महीने हजारों नए और ओरिजिनल गाने गढ़ते हैं। इस साइट पर सारेगामापा के सितारे भी मौजूद हैं और म्यूजिक मुगल एआर रहमान की टीम के सदस्य भी यहां टैलेंट खोजने चले आते हैं। ऐसी ही है टैलेंट्यूब डॉट कॉम। कुछ ही महीनों में यहां भी देश के कोनेकोने से हजारों युवा अपना टैलेंट पेश कर चुके हैं। मौका है महेश मांजरेकर की अगली फिल्म एफयू में काम करने का।
लाफैंगो डॉट कॉम हाशिए पर खड़े युवाओं को देना था मौका
अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के देविंदर सिंह ने सात साल पहले टैलेंटथ्रोव डॉट कॉम नाम से एक टैलेंट हंट वेबसाइट बनाने का फैसला किया। चार साल पहले इसका नाम कर दिया लाफैंगो। हर महीने बॉलीवुड सिंगिंग कांटेस्ट के साथ तमाम अन्य क्रिएटिव कॉन्टेस्ट लोगों को यूं पसंद आए कि आज की तारीख में दुनिया के 150 से भी ज्यादा देशों के करीब 10 लाख सदस्य इस वेबसाइट से जुड़ चुके हैं। वह बताते हैं, ‘दिनरात की मेहनत के बाद युवाओं का दिल टूटते देखना, उनका बिलखकर रोना बहुत अखरता था। गांवों के टैलेंटेड युवा तो हाशिए पर खड़े सिर्फ अपनी बारी का इंतजार ही कर रहे थे।
इसीलिए मैंने ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया, जहां पहुंचने के लिए युवाओं को जद्दोजहद न करनी पड़े। इंडस्ट्री को भी नए जमाने के लिए लेखन के खय्याम साब, संगीत के रहमान साब और एक्टिंग के सलमान खान मिल सकें।’ चर्चित टेलीविजन रियलिटी शो सारेगामापा के भी कई प्रतिभागी साइट पर मौजूद हैं। युवाओं को तराशने के लिए खय्याम, कुमार सानू, साधना सरगम और अभिजीत जैसे दिग्गज साइट से जुड़े हुए हैं। साइट पर कोलैब लैब नाम के अनोखे फीचर की मदद से भारत के युवा सिंगर, एडिटर या एक्टर दूसरे किसी देश का साथी चुन सकते हैं और अपना एलबम या वीडियो बना सकते हैं।
ऐसे हजारों एलबम बनाए भी जा रहे हैं। साइट के कई सिंगर्स को स्टेज शो करने का भी मौका मिलता रहता है। ऐसी ही हैं फ्लोरिडा की शर्मिष्ठा मजूमदार। कुछ साल पहले महज एक कंटस्टेंट रहीं शर्मिष्ठा अब साइट के लिए मीडिया का काम संभालती हैं। वह बताती हैं, ‘मैंने साइट के बारे में एक सोशल मीडिया साइट के जरिए जाना और एक सिंगिंग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया। कॉन्टेस्ट जीतने के बाद मैंने कोलैब लैब के जरिए कई दोस्तों के साथ एलबम बनाए।’ शर्मिष्ठा को दो एलबम के कॉन्ट्रैक्ट भी मिल चुके हैं, जिसमें एक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में रिलीज भी किया जाएगा। इसके अलावा, सौरव घोष, देबलीना मुखर्जी, आजम खान और अर्जित मुखर्जी जैसे युवाओं ने भी शंकर महादेवन और सोनू निगम से वाहवाही बटोरी है। शर्मिष्ठा ने बताया कि एआर रहमान के कुछ साथी भी उनकी साइट के जरिए टैलेंट की खोज में आते हैं। जल्द ही साइट के प्रतिभागियों को इंटरनेशनल फेम देने के लिए यूट्यूब से करार भी होने जा रहा है।
कैसे चुने जाते हैं विजेता
साइट को डेमोक्रेटिक बनाने के लिए वोटिंग और जज, दोनों को अहमियत दी गई है। देविंदर बताते हैं, ‘विजेता का चुनाव 75 फीसदी वोटिंग और 25 फीसदी जज के प्वाइंट के आधार पर किया जाता है। हालांकि, डुप्लिकेट वोटिंग रोकने के लिए एक खास सिस्टम बनाया गया है जो एक आईपी एड्रेस को चार बार से ज्यादा वोट नहीं करने देता।’ पिलक वोटिंग से इंटरनल रैंकिंग सिस्टम के जरिए टॉप के युवाओं को चुना जाता है और अंत में जजों की राय लेकर विजेताओं की घोषणा की जाती है।
तुम भी डॉट कॉम टैलेंट की खान में टैलेंट गायब
टैलेंट हंट वेबसाइट तुमभी डॉट कॉम की शुरुआत की थी फिल्म बनारस के निर्माता एलसी सिंह ने। एक देश जो टैलेंट के लिए दुनियाभर में मशहूर है, उसमें उन्हें इस फिल्म के लिए मनमाफिक किरदार नहीं मिले। कलाकारों से जुड़ने की जरूरत और कला की जुनूनी दुनिया बनाने की कसक से ही तुमभी ने आकार लिया। वेबसाइट के हेड ऑफ ऑपरेशंस रॉबिन रस्तोगी बताते हैं, ‘यह ऐसे युवाओं का रुपहला पर्दा, मंच और रैंप है जिन्हें टीवी जगह नहीं देता। यहां न
भेदभाव है, न धोखा। सबको बराबर मौका मिलता रहा है। यहां दोस्त मिलते हैं, गाइड मिलते हैं और किस्मत चमकाने के उम्दा मौके भी।’
तुमभी की सीढ़ियों ने कई युवाओं को उनकी मंजिल तक पहुंचाया है। ऐसे ही हैं प्रसून मिश्रा और गुंजन सक्सेना। वेबसाइट के पांच नाम के शॉर्ट स्टोरी कॉन्टेस्ट के दोनों विजेता मशहूर फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप के साथ स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर उनकी फिल्म के लिए कांट्रैक्ट साइन कर चुके हैं। प्रसून कहते हैं, ‘कुछ ही महीनों में जिंदगी ने यूटर्न ले लिया। फेसबुक पर लेखकों की एक कम्यूनिटी में कुछ लिखतेपढ़ते एक दिन इस कांटेस्ट का पता चला। अनुराग कश्यप जज थे तो पहली बार किसी ऑनलाइन टैलेंट कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और जाने कैसे जीत भी गया। यकीन नहीं होता कि आज मैं अनुराग के साथ काम कर रहा हूं।’ गुंजन भी अनुराग कश्यप के प्रोडक्शन हाउस में हैं। वह कहते हैं, ‘तुमभी और ट्विटर न होते, तो मैं आज भी शायद डायरियों में ही अपनी कहानियां लिख रहा होता।’ तुमभी से अन्य कई युवाओं को भी मुकाम हासिल हुआ है। स्वेच्छा भगत और विक्रम सिंह बथयाल ने नादान परिंदे कॉन्टेस्ट जीता और खुद मशहूर गीतकार इरशाद कामिल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र सौंपा।
इसके अलावा, भरत तिवारी और नीरज कुमार सिंह को मुंबई के दो बड़े महोत्सवों में परफॉर्म करने का मौका मिला है। कुछ लेखकों की स्क्रिप्ट पर पांच शॉर्ट फिल्में भी वेबसाइट की ओर से बनाई गई हैं, जिनमें से शोर नाम की शॉर्ट फिल्म को तमाम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया भी गया। इरशाद कामिल कहते हैं, ‘मुझे वेबसाइट की पहल खासी पसंद आई। यहां न सिर्फ युवा कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेते हैं, बल्कि उन्हें खुद को सुधारने के सुझाव भी मिलते रहते हैं। युवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। यही वजह है कि मैं भी युवाओं को कुछ सिखाना चाहता हूं।’
कैसे चुने जाते हैं विजेता
पहले वेबसाइट की टीम हर एंट्री को बारीकी से देखती है। इस टीम में अनुभवी समीक्षक शामिल होते हैं। इसके बाद, कुछ शॉर्टलिस्ट की गई एंट्रीज को ही जजों के पास भेजा जाता है और वे विजेता चुनते हैं। तुम भी डॉट कॉम किसी भी तरह की पिलक वोटिंग नहीं कराती है। रॉबिन कहते हैं, ‘हमारा मानना है कि टैलेंट की सही परख विशेषज्ञ को ही होती है। यही वजह है कि यूजर्स अपने प्रोफाइल पर कमेंट्स भले ही हासिल कर सकते हैं, लेकिन उसका जीतहार पर कोई फर्क नहीं पड़ता।’
टैलेंट्यूब डॉट कॉम ताकि ठगे न जाएं युवा
मुंबई में टैलेंट को मौका देने के नाम पर युवाओं के साथ ठगी का खेल बहुत पुराना है। किस तरह युवाओं के सपने रातों रात बनते और बिखर जाते हैं, यह कई फिल्मों में भी दिखाया गया है। असली टैलेंट अक्सर गुमनाम रह जाता है। यही वजह थी टैलेंट्यूब को जमीन देने की। जमीन टीवी या रेडियो पर नहीं, बल्कि इंटरनेट की दुनिया में। इस टैलेंट हंट वेबसाइट के संस्थापक विनोद नायर कहते हैं, ‘मैंने कई साल पहले यह प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला किया था, लेकिन तब ब्रॉडबैंड की पहुंच ज्यादा नहीं थी। यही वजह है कि बीते मई में वेबसाइट की ऑफिशियल लॉन्चिंग हुई है।’ बहुत ही कम वक्त में साइट पर हजारों युवाओं ने अपने पोर्टफोलियो तैयार कर लिए हैं। हालांकि, साइट पर निर्धारित शुल्क देकर ही आप अपना प्रोफाइल बना सकते हैं। विनोद कहते हैं, ‘खास बात यह है कि साइट पर मौजूद 40 मौकों में गायक, अभिनेता, संगीतकार और गीतकार सबके लिए संभावनाएं हैं। न ऑडियो और वीडियो अपलोड करने की कोई लिमिट है, न ही यह कसक कि यार..बस एक मौका और मिल जाता।’ मायानगरी में अपनी अलग पहचान के लिए मशहूर सुधीर मिश्र टैलेंटेड एक्टर्स को राह दिखा रहे हैं तो गायकों, गीतकारों और संगीतकारों को तराशने का काम मशहूर गायक हरिहरन के जिम्मे है। महेश मांजरेकर कहते हैं, ‘असली टैलेंट को ही मौका मिलेगा। जिन लोगों में दम होगा, हम उन्हें ही अपनी अगली फिल्म एफयू में रखेंगे।’इनके अलावा, मोबीसुर डॉट कॉम पर शंकर महादेवन गायक खोज रहे हैं तो सुनील शेट्टी मधुर भंडारकर के साथ उम्दा एक्टर्स के लिए अबमेरीबारी डॉट कॉम शुरू कर चुके हैं। उम्मीद है, यहां आपको मंजिल मिल जाएगी।
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Web Title: Online talent hunt competitions
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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