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दिव्यांग रूपा को मंजूला उठाकर ले जाती है परीक्षा केंद्र

Bhaskar News | Mar 20, 2017, 12:32 IST

दिव्यांग रूपा को मंजूला उठाकर ले जाती है परीक्षा केंद्र
अमरावती.जुनून व जज्बे को सहयोग की ताकत मिल जाए तो इंसान कितना भी कमजोर क्यों न हो सफलता की बुलंदियों तक पहुंचना उसके लिए बड़ी बात नहीं रह जाती। इसे चरितार्थ होते देखा जा सकता है वझ्झर स्थित स्व. अंबादास पंत वैद्य अंध, अपंग, मूक-बधिर व अनाथ आश्रम शाला में।
आश्रमशाला ने यहां रहने वाले दिव्यांग बच्चों में जुनून और जोश भर दिया। अब ये बच्चे खुद भी एक दूसरे की मदद कर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। यहां की दो छात्राएं रूपा व मंजूला की ही बात करते हैं। रूपा दोनों पैरों से विकलांग है। वहीं मंजूला मतिमंद है। रूपा 10वीं में है। उसने बोर्ड परीक्षा की तैयारी पूरी तरह कर ली थी। लेकिन परीक्षा केंद्र तक जाना उसके लिए किसी चुनौती से कम न था। लेकिन मंजूला के होते उसके लिए यह चुनौती बौनी साबित हो गई। मंजूला उसे रोज म्यूनिसिपल हाईस्कूल के परीक्षा केंद्र तक उठाकर ले जाती है और ऐसे ही वापस भी लाती है। विगत 7 मार्च को परीक्षा शुरू होने के साथ से ही यह क्रम जारी है।
बता दें कि इस आश्रमशाला को शंकरबाबा पापलकर द्वारा संचालित किया जा रहा है। रूपा जब एक साल की थी तब उसके माता-पिता ने उसे पंढरपुर के विठ्ठल मंदिर परिसर में लावारिस छोड़ दिया था। पुलिस ने अदालत के आदेश के बाद उसे वझ्झर के मतिमंद बाल अनाथालय को सौंपा, जहां उसे शंकरबाबा के रूप में मानों पिता की छत्रछाया मिल गई।
शिक्षा के प्रति उसकी रुचि को देखते हुए शंकरबाबा ने उसकी प्राथमिक शिक्षा परतवाड़ा की नपा प्राथमिक शाला तथा माध्यमिक शिक्षा आईएस गर्ल्स स्कूल में कराई। यहीं से आज रूपा कक्षा 10 वीं की परीक्षा दे रही है।
सवा सौ से अधिक बच्चों के लिए खुद पिता बने शंकरबाबा , बनवाया आधार:
दो दशक से अधिक समय से अनाथों की परवरिश कर रहे शंकरबाबा पापलकर के आश्रम में रहने वाले कई अनाथ बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर चुके हैं। यही नहीं शंकरबाबा ने करीब सवा सौ से अधिक बच्चों को गोद लेकर उन्हें बतौर पिता अपना नाम देकर उनका आधार कार्ड बनवाया। उनके नाम मतदाता सूची में भी दर्ज करवाए।
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Web Title: Success Story Of Physically Disabled Manjula
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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