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जानिए, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के मंत्रिपद के दौरान चार बड़ी असफलताएं

Sanjeev Srivastava | Feb 22, 2013, 00:24 IST

  • मुंबई। हैदराबाद में बम धमाकों से ठीक एक दिन पहले बुधवार को यूरोपीय देश बुल्गारिया के प्रधानमंत्री ने सिर्फ इसलिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया क्योंकि वहां प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था. इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि जिस देश में प्रदर्शनकारियों को पुलिस पीटती हो, वहां की सरकार का मुखिया मैं नहीं रह सकता।
    गौरतलब है कि बुल्गारिया यूरोपीय संघ का सबसे गरीब सदस्य देश है। राजधानी सोफिया में मंगलवार को बिजली की बढ़ी दरों के विरोध में प्रदर्शन हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें 14 लोग घायल हो गए थे।
    जबकि अगर भारत की बात करें तो 26 नवम्बर 2008 को मुंबई बम धमाकों के बाद शिवराज पाटिल को कपड़े बदलने और असंवेदनशील बयानों के कारण पद से हटाया गया और वित्त मंत्री पी चिदंबरम को गृहमंत्री का पद सौंपा गय. 26 जून को प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया।
    प्रणब मुखर्जी के बाद 1 अगस्त को चिदंबरम को पुनः वित्त मंत्री बनाया गया जबकि उसी समय सुशील कुमार शिंदे को गृहमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई।
    आगे की स्लाइड में जानिए शिंदे के मंत्रिपद के दौरान चार बड़ी असफलताएं...
  • 1. 1 अगस्त 2012 की शाम पुणे के जंगली महाराज इलाके रोड पर एक के बाद एक चार धमाके हुए। धमाके के वक़्त इलाके में बेहद भीड़-भाड़ थी। धमाके वाले इलाके में ही हैंग आउट स्थल मैक डोनाल्ड का रेस्त्रां भी था, जहां उस वक़्त काफी चहल-पहल थी।   
     
     
  • 2. गौरतलब है कि गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने से पहले सुशील कुमार शिंदे उर्जा मंत्री थे और पद छोड़ने वाले दिन यानी 31 जुलाई को उनके शासनकाल में ही देश का सबसे बड़ा बिजली संकट खड़ा हुआ था। 31 जुलाई को बिजली के तीन ग्रिड फेल हुए और लगभग आधा देश अंधेरे में डूब गया। देर रात आई इस गड़बड़ी की वजह से देश के लगभग 22 राज्यों में आवश्यक सेवाओं सहित रेल यातायात और मेट्रो सेवाएं ठप्प पड़ गईं थीं। 
  • 3. 17 अगस्त 2012 को पुणे के पिंपरी चिंचवाड़ इलाके में धमाका हुआ जिसमें पांच साल का एक बच्चा घायल हुआ। हालांकि पुलिस जांच के बाद इस धमाके के पीछे बिजली के शॉर्ट सर्किट को कारण बताया गया।
     
      
     
  • 4. 21 फरवरी 2013 को हैदराबाद के बाहरी इलाके में दो धामके हुए जिसमें 12 लोगों की मौत हुई। धमाकों के बाद गृहमंत्री ने मीडिया के सामने खुद इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें दो दिन पहले से धमाके किए जाने की सूचना मिल रही थी। उन्होंने इस सम्बन्ध में हैदराबाद शहर को भी अलर्ट जारी किया था। 
     
     
  • इन तथ्यों को पेश करने का मकसद मात्र इतना है कि जब एक पुलिसवाले को 100 रुपया घूस लेने का आरोप लगते ही सस्पेंड कर दिया जाता है तो फिर एक ही शख्स के मंत्रिपद पर रहते हुए होने वाली उपरोक्त घटनाएं क्या उनके खिलाफ किसी तरह की जिम्मेदारी तय करने या कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त नहीं है? क्या हमारे मंत्रियों को भी बुल्गारिया जैसे गरीब देश के प्रधानमंत्री से कुछ सीख नहीं लेनी चाहिए?
     
    मुद्दा यह नहीं है कि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है बल्कि, मुद्दा ये है कि आखिर हम कितने संवेदनशील हैं? किसी देश का प्रधानमंत्री लाठीचार्ज भर के मुद्दे पर इस्तीफा दे देता है जबकि, हमारे देश में बम धमाकों और उसकी पूर्व आशंका के बाद भी देश का नेतृत्व मौन है। 
     
    बात जिम्मेदारी से ज्यादा संवेदनशीलता की है। क्या दिल्ली गैंगरेप से लेकर हैदराबाद बम धमाके तक की घटना एक राष्ट्र और इसके नेतृत्व की संवेदनशीलता की परीक्षा नहीं है? क्या हमारी या हमारे नेतृत्व की संवेदनशीलता के इस स्तर से आप संतुष्ट हैं? अपनी राय जरुर दें ...    
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Web Title: Four major failures of Home Minister Sushil Kumar Shinde
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)
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